काठमांडू: नेपाल में पिछले साल नए संविधान की घोषणा के बाद से नेपाली पुरुषों से शादी करनेवाली 3,672 भारतीय महिलाओं को इस हिमालयी देश की नैसर्गिक नागरिकता मिलेगी। नेपाल के गृह मंत्रालय ने मंगलवार को यह घोषणा की है। नेपाली नागरिकों से शादी करनेवाली महिलाओं की नागरिकता का मुद्दा तराई-मधेशी आन्दोलन के दौरान बड़ा मुद्दा था।
भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सात सितंबर को संसद में कहा था कि भारतीय महिलाएं, जिन्होंने नेपाली नागरिकों से शादी की है, उन्हें नेपाल की नैसर्गिक नागरिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "लेकिन नेपाल के नए संविधान ने शादी के जरिए नैसर्गिक नागरिकता पाने के अधिकार को छीन लिया।" नेपाल के आंतरिक मामलों के संयुक्त सचिव बिनोद के. सी. ने कहा कि तराई/मधेशी क्षेत्र के 20 जिलों में ज्यादा भारतीय लड़कियों की शादियां हुई हैं, और उन्हें नैसर्गिक नागरिकता का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि नए संविधान में नेपाली नागरिकों से शादी करनेवाली विदेशी महिलाओं के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है।
संविधान के प्रावधान अनुच्छेद 11(6) के मुताबिक, नेपाली व्यक्ति से शादी करनेवाली विदेशी महिलाओं को संघीय कानून के मुताबिक नागरिकता मिल सकती है, अगर वह चाहे तो।" वर्तमान में नेपाल के संसद के 12 सदस्यों को नैसर्गिक नागरिकता प्राप्त है। मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उनकी नागरिकता रद्द करने का फैसला किया गया था। क्योंकि यह पाया गया कि नेपाली नागरिकता पाने के लिए उन्होंने झूठा शपथ पत्र दायर किया था।
महेंद्र कुमार मिश्रा, अनिल कुमार मिश्रा और सतीश कुमार मिश्रा ने नेपाल-भारत सीमा पर स्थित रुपनदेही जिले में नागरिकता प्राप्त की थी। नेपाल सरकार के प्रवक्ता शेरधन राय ने कहा, "सरकार ने जब यह पाया कि उन्होंने नकली दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता पाई है तो मंत्रिमंडल ने इसे रद्द करने का फैसला किया।"