ढाका: बांग्लादेश ने पिछले तीन सप्ताह से फेसबुक पर लगे प्रतिबंध को आज हटा लिया। उच्चतम न्यायालय की ओर से 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए युद्ध अपराधों के लिए विपक्ष के दो नेताओं की सजा बरकरार रखे जाने के बाद सरकार ने इस लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग पर प्रतिबंध लगा दिया था। दूरसंचार मंत्री तराना हालिम ने कहा, गृह मंत्रालय से मिली सिफारिशों के आधार पर हमने सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को तुरंत फेसबुक पर से प्रतिबंध हटाने के निर्देश दे दिए हैं।
हालिम ने कहा, हालांकि सुरक्षा कारणों से व्हाट्सएप्प और वाइबर पर लगा प्रतिबंध अभी जारी रहेगा। हालिम ने प्रतिबंध के दौरान सब्र रखने के लिए लोगों को शुक्रिया कहा। सूचना संचार प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जुनैद अहमद पलक ने हालिम के बयान में और जानकारी जोड़ते हुए कहा कि फेसबुक अधिकारियों से बातचीत जारी रहने के दौरान फेसबुक के जरिए चलायी जा रही आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा मौत की सजा बरकरार रखे जाने के बाद पिछले महीने फेसबुक, व्हाट्सएप्प और वाइबर पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। दो नेताओं..... जमात-ए-इस्लामी के महासचिव अली एहसान मोहम्म्द मुजाहिद और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी :बीएनपी: नेता सलाहुद्दीन कादर चौधरी, को पाकिस्तान के खिलाफ 1971 मंे हुए युद्ध के दौरान किए गए अपराधों के लिए कुछ ही दिन पहले फांसी दी गयी है।
सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया था, क्योंकि सरकार को डर था कि इनका प्रयोग सरकार विरोधी प्रदर्शनों के आयोजन हेतु किया जा सकता है।
पहले प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी जरूरत होने पर संदेश भेजने और फोन करने के लिए लोकप्रिय सेवाओं व्हाट्सएप्प और वाइबर पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगाने का संकेत दिया था, ताकि देश में आतंकवादी गतिविधियों को रोका जा सके क्योंकि कुछ लोग इन एप्प का दुरूपयोग कर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।