मास्को: रूस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जापान में फुकुशिमा आपदा के बाद इसके सुरक्षा मानदंडों को बढ़ाने के लिए तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु उर्जा संयंत्र में कुछ खास प्रौद्योगिकी मानदंडों को बढ़ाया गया है। स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉरपोरेशन रोस्तम में भारत परियोजना निदेशक व्लादिमीर ए एंजेलोव ने बताया कि चूंकि ये गंभीर संशोधन हैं इसलिए अनुबंध की कीमत बगैर बदलाव वाली रहेगी।
हाल ही में यहां हुए एटमएक्सपो 2016 से इतर चुनिंदा भारतीय पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में परमाणु उर्जा संयंत्र जेनरेशन 3 प्लस है जो फुकुशिमा घटना को ध्यान में रखते हुए हैं। उन्होंने बताया, हमने फुकुशिमा से सबक सीखते हुए यूनिट 3 और 4 में कुछ खास प्रौद्योगिकीय मानदंड बढ़ाए हैं। हालांकि, ये गंभीर संशोधन हैं पर अनुबंध की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत ने रूसी विशेषज्ञों को कुछ खास मानदंड बढ़ाने की संभावना की समीक्षा करने का अनुरोध किया था, हमने उनका विश्लेषण करने और उन्हें बढ़ाने की कोशिश भी की।
उन्होंने बताया कि इसलिए उर्जा इकाई 3 और 4 को उच्च भूकंपीय परिस्थिति और तकनीकी प्रभाव के लिए डिजाइन किया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या इकाई 1 और इकाई 2 फुकुशिमा घटना बाद के मुताबिक है उन्होंने कहा, यह एक एनपीपी और एक डिजाइन है। गौरतलब है कि प्रशांत महासागर तट पर स्थित जापान के फुकुशिमा परमाणु उर्जा घर को मार्च 2011 में आए भूकंप और सुनामी से भारी नुकसान पहुंचा था। साल 1986 के चेर्नोबिल आपदा के बाद यह सबसे बड़ी परमाणु त्रासदी थी।