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दहशत में चीन! सता रहा है अमेरिकी हमले का डर, ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने कही ये बात

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Sep 29, 2020 12:32 am IST,  Updated : Sep 29, 2020 12:36 am IST

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने ट्वीट कर कहा है कि ट्रंप प्रशासन साउथ चाइना सी में चीन के द्वीप पर हमला कर सकता है।

China fear American attack दहशत में चीन! सता रहा है अमेरिकी हमले का डर, ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने कह- India TV Hindi
China fear American attack दहशत में चीन! सता रहा है अमेरिकी हमले का डर, ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने कही ये बात Image Source : ANI

बीजिंग. चीन की नापाक करतूतें पूरी दुनिया के सामने हैं। एक तरफ जहां चीन लद्दाख में भारत को परेशान करने की पूरी कोशिश कर रहा है तो वहीं साउथ चाइना सी में कई देशों को परेशान कर रहा है। हालांकि चीन अपनी गलत हरकतों को पूरी तरह समझता भी है, इसीलिए डरा हुआ भी रहता है। अब चीन को इस बात का डर सता रहा है कि अमेरिका उसपर हमला कर सकता है। दरअसल चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने ट्वीट कर कहा है कि ट्रंप प्रशासन साउथ चाइना सी में चीन के द्वीप पर हमला कर सकता है।

ग्लोबल टाइम्स के एडिटर Hu Xijin ने कहा, "मुझे मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी चुनाव में दोबारा जीत हासिल करने के लिए अमेरिका का ट्रंप प्रशासन साउथ चाइना सी में MQ-9 Reaper drones के जरिए चीन के द्वीप पर हमला कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो चीनी PLA निश्चित रूप से जमकर लड़ाई लड़ेगी और युद्ध शुरू करने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

चीन ने पर्यावरण, दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका पर पलटवार किया

अमेरिका और चीन के बीच टकराव सोमवार को उस समय और बढ़ गया जब बीजिंग ने वाशिंगटन के इन आरोपों को लेकर पलटवार किया कि वह वैश्विक पर्यावरण क्षति का एक प्रमुख कारण है और वह दक्षिण चीन सागर का सैन्यीकरण नहीं करने के अपने वादे पर पलट गया है। चीन ने अमेरिका को ‘‘अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सहयोग का सबसे बड़ा विध्वंसक’’ करार देते हुए सवाल किया कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन को लेकर पेरिस समझौते से क्यों पीछे हट रहा है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के विदेश विभाग ने पिछले सप्ताह एक दस्तावेज जारी किया था जिसमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से वायु, जल और मृदा के प्रदूषण, अवैध कटाई और वन्यजीवों की तस्करी के मुद्दों पर चीन के रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था। दस्तावेज में कहा गया है, ‘‘चीनी लोगों ने इन कार्रवाइयों के सबसे खराब पर्यावरणीय प्रभावों का सामना किया है। साथ ही बीजिंग ने वैश्विक संसाधनों का लगातार दोहन करके और पर्यावरण के लिए अपनी इच्छाशक्ति की अवहेलना करके वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्वास्थ्य को भी खतरे में डाला है।’’

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