काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार देश के नागरिकों को संविधान द्वारा मिले अधिकारों को पूरी तरह से मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ओली ने 67वें अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर अपने संदेश में कहा, "नेपाल सरकार नागरिक और राजनैतिक अधिकारों के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को लोगों का मूलभूत अधिकार मानती है।"
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार ओली ने नेपाल के तराई में मधेसी और कुछ अन्य जातीय समुदायों के आंदोलन पर कहा कि सरकार इस मुद्दे को संवैधानिक और राजनैतिक रूप से निपटाने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने नेपाल सरकार के सामने उन चुनौतियों का भी जिक्र किया जो सितंबर के मध्य से मधेसी आंदोलन की वजह से नेपाल-भारत सीमा पर पैदा हुई हैं और जिनकी वजह से देश में ईंधन और जरूरी वस्तुओं का अभाव हो गया है।
इससे पहले दिसंबर के महीने की शुरुआत में नेपाल की तीन प्रमुख पार्टियों ने नये संविधान में अगले तीन महीनों के भीतर संशोधन करने का फैसला किया था, ताकि भारतीय मूल के मधेसियों की मांगों का समाधान किया जा सके। वहीं मधेसियों से त्रिपक्षीय वार्ता बंद कर दी गई थी क्योंकि आंदोलनकारी नेता इसमें शामिल होने नहीं आए थे। सत्तारूढ़ सीपीएन...यूएमएल और यूसीपीएन...माओवादी और मुख्य विपक्षी नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने यह निर्णय बलुआटार में नेपाल के प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में किया था। बैठक का आयोजन देश में जारी राजनीतिक संकट को सुलझाने के लिए किया गया था।