विशेष विमान से: उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा है कि भारत आसियान देशों के साथ समग्र संबंध विकसित करना चाहता है और वह किसी तरह के क्षेत्रीय या नौवहन विवादों में नहीं पडे़गा। कंबोडिया और लाओस की चार दिवसीय यात्रा से लौटते हुए कल रात अंसारी ने संवाददाताओं से कहा, भारत का दक्षिण पूर्व एशिया के बारे में पूरी तरह से स्पष्ट रूख है। हम एक दूसरे की जरूरतों के आधार पर समग्र संबंध विकसित करना चाहते हैं।
स्थिरता से ही कारोबार और विकास संभव
उपराष्ट्रपति ने कहा, जरूरत शांति, स्थिरता और विकास की है । अगर शांति और स्थिरता नहीं होगी, तो करोबार नहीं होगा, निवेश नहीं होगा और व्यापार नहीं होगा। इस बारे में हमारे विचारों में समानता है। यह पूछे जाने पर कि दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में क्षेत्रीय और नौवहन विवाद होने की स्थिति में क्या भारत स्थिरता प्रदान करने वाली ताकत बन सकता है, उपराष्ट्रपति ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा, हम स्थिरता प्रदान करने के कारोबार में नहीं है, यह काम जहाज निर्माण उद्योग का है।
आसियान के साथ अच्छे संबंध जरूरी
आसियान के साथ काफी अच्छे संबंधों पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, यह हमारा कर्तव्य है और हमने ऐसा किया है... न केवल आसियान के साथ अच्छे संबंध बनाये बल्कि आसियान के प्रत्येक सदस्य देश के साथ अच्छे संबंध बनाये।
उन्होंने कहा कि भारत काफी जतन से ऐसा कर रहा है और आगे भी ऐसा करना जारी रखेगा। अंसारी ने कहा, अब अगर इनके बीच कोई समस्या है, तो उसे उन्हें ही सुलझाना है। समस्याओं को सुलझाने का आसियान का अपना तंत्र है।
आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी
आतंकवाद के मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह बुराई अब अंतरराष्ट्रीय घटना का स्वरूप ले चुकी है और इसका मुकाबला केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही किया जा सकता है। अंसारी ने कहा, यह नहीं कह सकते कि यह अमुक देश की समस्या है जो अमुक देश से इतनी दूरी पर है क्योंकि हम नहीं जानते कि इन समूहों के भीतर क्या सम्पर्क स्थापित हो सकते हैं । अंतरराष्ट्रीय सहयोग बड़ी जरूरत बन गई है। यह विकल्प का विषय नहीं है और हमें एक होकर सहयोग करना है।
कंबोडिया और लाओस में माहौल अच्छा रहा
अपनी कंबोडिया और लाओस यात्रा के बारे में चर्चा करते हुए अंसारी ने कहा कि दोनों देशों में माहौल काफी अच्छा रहा। उपराष्ट्रपति ने दोनों देशों की यात्रा के दौरान वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गए। अंसारी ने कहा, यात्राएं अलग अलग तरह की हो सकती हैं लेकिन एक खास माहौल का काफी महत्व होता है। उन्होंने काफी आभार के साथ याद किया कि 60 वर्ष पहले भारत किस तरह से लाओस के साथ खड़ा था और अंतरराष्ट्रीय आयोग में हिस्सा लिया था। वास्तव में स्थान भारत को दिया गया था। वे इस बात को लेकर भी प्रसन्न थे कि हमने किस तरह से अंतरराष्ट्रीय मिशन में हिस्सा लिया। हमारे द्विपक्षीय संबंध काफी अच्छे हैं।
आसियान देशों से संबंध मजबूत बनाने की कोशिश
भारत की आसियान देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने की कोशिशों की पृष्ठभूमि में अंसारी की लाओस और कांबोडिया यात्रा हुई है। कंबोडिया और लाओस की यात्रा के दौरान अंसारी ने आसियान देशों विशेष तौर पर कंबोडिया, लाओस, म्यामांर और वियतनाम के साथ करीबी संबंधों पर जोर दिया। इस क्षेत्र में कुछ देशों में क्षेत्रीय और नौवहन दावों से जुड़े विवाद भी सामने आए हैं।
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