उफा: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत को पूर्ण सदस्यता देने के लिए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का आभार जताया और कहा कि भारत आतंकवाद तथा चरमपंथ का सामना करने में एससीओ के साथ मिलकर काम करेगा। मोदी ने 15वें एससीओ शिखर बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को पूर्ण सदस्यता देना, इतिहास के स्वाभाविक मेल को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, "समृद्धि का भविष्य शांति के आधार में निहित है। हम आतंकवाद तथा चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में एससीओ के साथ काम करेंगे।"
मोदी ने कहा कि एससीओ के साथ भारत के सहयोग में यूरेशिया के विभिन्न क्षेत्रों को दोबारा जोड़ने तथा एकजुट करने के साझा दृष्टिकोण को बढ़ाने की जरूरत होगी।
एससीओ एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका गठन 15 जून, 2001 को किया गया था। इसके छह सदस्य चीन, कजाकिस्तान, किíगस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान हैं।
एससीओ का लक्ष्य रिजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर (आरएटीएस) तथा संपर्क बहाली के जरिए क्षेत्र में सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
मोदी ने कहा, "पिछले कुछ सदियों में हमने इस महान क्षेत्र से समुद्र तथा अन्य दिशा में देखे हैं, अब समय आ गया है कि हम इस क्षेत्र में एक-दूसरे की तरफ देखें।"
उन्होंने कहा, "हम एक-दूसरे की तरफ देखेंगे, तो हम आधारभूत संरचना के निर्माण में सहयोग देंगे, व्यापार के अवरोध को कम करेंगे, संपर्क को बढ़ाएंगे।"
मोदी ने कहा कि भारत एचआरडी, आईसीटी, फार्मा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और पूंजी बाजार, एमएसएमई, माइक्रो वित्त तथा खाद्य क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगा।
उन्होंने भारत की तरह पाकिस्तान को एससीओ के पूर्ण सदस्य बनने पर उसे बधाई दी।
मोदी ने कहा, "एससीओ हमारे दृष्टिकोण का अहम हिस्सा है। मैं एससीओ को अपना पूर्ण सहयोग देने का भरोसा दिलाता हूं।"
उन्होंने आपसी समझ तथा आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की मांग करते हुए कहा कि यह विशेषकर हमारे युवाओं के बीच होना चाहिए, जो क्षेत्र तथा इससे बाहर एकता को बढ़ावा देंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा, "उन्नतिशील भविष्य शांति के आधार में निहित है। भारत क्षेत्र में शांति तथा मित्रता बढ़ाने में योगदान देगा।"
अफगानिस्तान, ईरान और मंगोलिया इसके पर्यवेक्षक देश हैं, जबकि बेलारूस, तुर्की और श्रीलंका इसके संवाद साझेदार हैं।
एससीओ के नेताओं ने उफा में शिखर सम्मेलन के दौरान दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत बेलारूस को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया है। जबकि अजरबैजान, अर्मेनिया, कंबोडिया और नेपाल को संवाद साझेदार तथा भारत और पाकिस्तान को स्थायी सदस्य का दर्जा दिया गया।
पाकिस्तान और भारत ने सितंबर 2014 में सदस्यता की औपचारिक दावेदारी पेश की थी।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि कुछ अन्य देशों ने भी सदस्य बनने में रुचि दिखाई है और कहा कि उनकी दावेदारी पर विचार किया जाएगा।
एससीओ की अगली बैठक उज्बेकिस्तान के ताशकंद में 2016 में होगी।