इस्लामाबाद: पाकिस्तान अपने सेना प्रमुख राहिल शरीफ की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिका की यात्रा के दौरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ अपने परमाणु हथियारों पर चर्चा नहीं करेगा। इसके बजाय वह अपने परमाणु दर्जे को उचित ठहराने के लिए भारत के कोल्ड-स्टार्ट डॉक्टि्रन की ओर इशारा करेगा। यह बात आज एक मीडिया रिपोर्ट में कही गई है। जनरल शरीफ 15 से 20 नवंबर तक चलने वाली अपनी यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इससे पहले पिछले ही माह प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अमेरिका की यात्रा की थी।
द डॉन ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से कहा कि यदि अमेरिकी पक्ष की ओर से इस मुद्दे को उठाया जाता है तो पाकिस्तान विनम्रता के साथ उन्हें याद दिलाएगा कि मौजूदा स्थिति पैदा करने के पीछे भारत का कथित है। पाकिस्तान का दावा है कि कोल्ड-स्टार्ट डॉक्टि्रन के अंतर्गत, भारत ने सीमा के पास छावनियां और हवाई पट्टियां बनाईं, जिसके कारण हमला करने में लगने वाले समय में कमी आ गई। द डॉन की खबर के अनुसार, परमाणु हथियारों पर पाकिस्तान की यह बढ़ी हुई निर्भरता भारत के हमले से निपटने के लिए है।
इसमें अमेरिकी मीडिया की उन खबरों को भी रेखांकित किया गया, जिसके अनुसार अमेरिकी अधिकारी पाकिस्तानी सेना प्रमुख को उनके देश की परमाणु नीति में संशोधन के लिए कहेंगे। पाकिस्तान ने अमेरिकी मीडिया के बेनामी सूत्रों के उन अटकलों को भी खारिज कर दिया कि उसके भारतीय आक्रमण के डर बेबुनियाद पाए गए हैं। पाकिस्तान के एक राजनयिक सूत्र ने कहा, अभी, उनकी :भारतीय सेना की: 21वीं कोर इस कोल्ड स्टार्ट या अग्र सक्रिय रणनीति के तहत राजस्थान में एक अभ्यास करने में व्यस्त है। सूत्र ने पाकिस्तान द्वारा अमेरिकियों के साथ इस विषय पर चर्चा नहीं करने की इच्छा के बारे में बताते हुए कहा, परमाणु वाला मुद्दा द्विपक्षीय विषय नहीं है।
सूत्र ने कहा, हमारा परमाणु कार्यक्रम सिर्फ भारत से पैदा होने वाले खतरों पर ही ध्यान केंद्रित करता है और केवल भारत ही है जो कि इन खतरों के कारण पैदा होने वाली चिंताओं को मिटा सकता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या जनरल शरीफ की वाशिंगटन में होने वाली बैठकों के एजेंडे में परमाणु मुद्दा शामिल है, तो उन्होंने कहा, बिल्कुल नहीं, एक बैठक भी नहीं। ध्यान अफगानिस्तान पर केंद्रित होगा। इससे पहले अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख अपनी मर्जी से अमेरिका की यात्रा पर आएंगे क्योंकि पेंटागन में मौजूद उनके किसी भी समकक्ष की ओर से उन्हें कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिया गया।