नई दिल्ली: हम सभी ने स्कूल में इतिहास की किताबों में पढ़ा है कि दूसरे विश्व युद्ध के समय जापानी सैनिकों ने चीन के नागरिकों को बहुत सताया था। जापानी सैनिकों ने भी इसे स्वीकार किया है और इससे संबंधित कई किताबें लिखी हैं। जापानी सैनिकों की ओर से लिखे इन सभी इकरारनामों को चीन का प्रशासन जारी कर रहा है। इसी इकरारनामें में एक जापानी सैनिक मसाओ कनाजावा का नाम भी है जो कि उस समय जापानी सेना का एक हिस्सा था।
उसने अपने इकरारनामे में लिखा है कि मैंने एक किसान को बहुत पानी पिलाया। जब उसका पेट फूल गया तो मैं उसके पेट पर कूदने लगा, लगभग 1 घंटे में उस किसान की मौत हो गई। कनाजावा और उसके साथियों ने मिलकर कई चीनी और कोरियाई महिलाओं के साथ सामूहिक बालात्कार किया था।
इसी प्रकार कुछ अन्य जापानी सैनिकों ने भी अपना इकरारनामा दिया है। उस समय तोकोकिची नागाता को सेना में बतौर डॉक्टर के पद के लिए भर्ती कराया गया था। उसने बताया कि एक जापानी सैनिक ने चिकित्सा में काम आने वाली छुरी से चीन के दो नागरिकों को मार दिया था। नागाता ने भी बहुत सी महिलाओं के साथ दुष्कर्म की बात को स्वीकार किया है।
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