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बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने खोले मोहम्मद यूनुस के राज, पद से हटाने की साजिश रचने समेत लगाए गंभीर आरोप

 Edited By: Amit Mishra
 Published : Feb 23, 2026 06:42 pm IST,  Updated : Feb 23, 2026 06:49 pm IST

बांग्लादेश के प्रेसिडेंट मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप गाए हैं। शहाबुद्दीन ने यूनुस पर उन्हें गैर-संवैधानिक तरीके से पद से हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस- India TV Hindi
बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस Image Source : AP

ढाका: बांग्लादेश में हाल ही में हुए आम चुनावों के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार ने सत्ता संभाल ली है। नई सरकार बनने के कुछ दिनों बाद, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को लेकर बड़े दावे किए हैं। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने यूनुस पर उन्हें गैर-संवैधानिक तरीके से पद से हटाने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। राष्ट्रपति ने बांग्लादेशी दैनिक अखबार कलेर कांथो को ढाका के राष्ट्रपति भवन बंगभवन में दिए एक इंटरव्यू में यह दावा किया है। 

'रची गई साजिशें'

मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्होंने कहा कि यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में बांग्लादेश को अस्थिर करने और संवैधानिक संकट पैदा करने की कई कोशिशें की गईं। शहाबुद्दीन ने कहा, "उन डेढ़ सालों में मुझे किसी भी महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल नहीं किया गया। मेरे खिलाफ तरह-तरह की साजिशें रची गईं।"

'संवैधानिक जिम्मेदारियों का किया गया उल्लंघन'

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि यूनुस ने संविधान के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया। उन्होंने बताया कि मुख्य सलाहकार के रूप में यूनुस ने उनके साथ जरूरी संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा, "संविधान के अनुसार, विदेश दौरे पर जाने के बाद मुख्य सलाहकार को राष्ट्रपति से मिलकर चर्चा के नतीजों की लिखित जानकारी देनी होती है। यूनुस ने 14-15 बार विदेश यात्राएं की, लेकिन एक बार भी मुझे सूचित नहीं किया। वो कभी मुझसे मिलने नहीं आए।"

'महल का कैदी' बना दिया गया

शहाबुद्दीन ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में उन्हें महल का कैदी बना दिया गया। उन्होंने बताया कि उनकी 2 पूर्व-नियोजित विदेश यात्राएं कोसोवो और कतर को यूनुस प्रशासन ने रोक दिया था। 133 अध्यादेशों (ऑर्डिनेंस) के जारी होने पर सवाल उठाने पर उन्होंने कहा कि कुछ स्थितियों में अध्यादेश जरूरी हो सकते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में उन्हें जारी करने का कोई उचित आधार नहीं था। 

अमेरिका के साथ समझौते की जानकारी नहीं

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने दावा किया कि अंतरिम सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किए गए किसी भी समझौते की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा, "मुझे कुछ नहीं पता। ऐसे राज्य स्तर के समझौतों के बारे में मुझे औपचारिक रूप से बताया जाना चाहिए था। पिछली सरकारों के प्रमुख हमेशा राष्ट्रपति को सूचित करते थे, यह संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन उन्होंने ना तो मौखिक रूप से बताया और ना ही लिखित में।

शहाबुद्दीन ने किया बड़ा खुलासा

शहाबुद्दीन ने खुलासा किया कि "एक समय पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश को गैर-संवैधानिक तरीके से मेरी जगह लाने और उन्हें राष्ट्रपति बनाने की साजिश रची गई थी।" हालांकि, एक जज ने संवैधानिक बाधाओं का हवाला देकर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने 22 अक्टूबर 2024 को बंगभवन के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन को 'डरावनी रात' बताया, जिसमें भीड़ ने राष्ट्रपति भवन को लूटने की कोशिश की थी। स्थिति को सेना की तैनाती से नियंत्रित किया गया था।

सेना और BNP का मिला समर्थन

राष्ट्रपति ने बांग्लादेश की सेना और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व का आभार जताया, जिन्होंने संवैधानिक निरंतरता बनाए रखने में उनकी मदद की। उन्होंने बताया कि तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उनसे कहा था, "आप सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। आपकी हार का मतलब पूरी सेना की हार होगी। हम इसे किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे।"

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