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भारत से दोस्ती का दामन जोड़ने के बाद SCO समिट से पहले चीन का अमेरिका पर हमला, विश्व शांति के लिए बताया खतरा

 Published : Aug 22, 2025 06:22 pm IST,  Updated : Aug 22, 2025 11:45 pm IST

इस वर्ष की SCO बैठक को वैश्विक राजनीतिक ध्रुवीकरण और अमेरिका की टैरिफ नीतियों की पृष्ठभूमि में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन ने इस मंच के माध्यम से अमेरिका के खिलाफ एक वैकल्पिक वैश्विक नेतृत्व मॉडल प्रस्तुत करने की कोशिश की है।

चीनी प्रेसवार्ता की प्रतीकात्मक फोटो। - India TV Hindi
चीनी प्रेसवार्ता की प्रतीकात्मक फोटो। Image Source : AP

बीजिंग/तियानजिन: चीन के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की वार्षिक बैठक से ठीक पहले बीजिंग ने अमेरिका पर अप्रत्यक्ष हमला बोला है। चीन ने अमेरिका का नाम लिए बिना आरोप लगाया है कि वह “विश्व शांति को खतरे में डाल रहा है”। चीन ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब वह 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच अपने पूर्वोत्तर बंदरगाह शहर तियानजिन में इस वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक की मेजबानी करने जा रहा है...और इस बैठक में भारत, रूस जैसे देशों के राष्ट्राध्यक्षों के शामिल होने की प्रबल संभावना है।

चीन ने क्या कहा?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में बताया कि इस बार 20 से अधिक देशों के प्रमुख SCO समिट में भाग लेंगे। इनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन प्रमुख नाम हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक देश विश्व शांति के लिए खतरा है, क्योंकि वह खुद को सबसे ऊपर समझता है। 

अमेरिका का बिना नाम लिए किया कटाक्ष

लियू बिन ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा, एक ऐसा देश जो अपने राष्ट्रीय हितों को दूसरों के हितों से ऊपर रखता है। इस दौरान उन्होंने SCO को एक ऐसा मंच बताया जो समय के साथ अधिक शक्तिशाली और प्रासंगिक होता जा रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका कभी भी SCO का हिस्सा नहीं रहा है और पश्चिमी देशों में इसे एक ऐसा पूर्वी गठबंधन माना जाता रहा है जो नाटो का संभावित विकल्प बन सकता है।

ये देश हैं एससीओ के प्रमुख सदस्य

2001 में गठित SCO में मूल रूप से चीन, रूस, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़बेकिस्तान शामिल थे। अब इसमें ईरान, भारत, पाकिस्तान जैसे सदस्य जुड़ चुके हैं। साथ ही मंगोलिया से लेकर सऊदी अरब तक कई संवाद साझेदार भी शामिल हैं।

वैश्विक व्यवस्था में बदलाव का प्रयास

लियू बिन ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग समिट के दौरान "तियानजिन डिक्लेरेशन" पर अन्य नेताओं के साथ हस्ताक्षर करेंगे और अगले 10 वर्षों के लिए SCO की रणनीति को मंज़ूरी देंगे। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग इस मंच के माध्यम से “वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार के नए सुझाव और तरीके” भी पेश करेंगे।

भारत-चीन रिश्तों में नया मोड़

हाल के दिनों में भारत और चीन के बीच रिश्तों में नरमी आई है। दोनों देश विवादित सीमा रेखा को स्पष्ट करने पर विचार करने को तैयार हुए हैं, जो दोनों देशों के बीच वर्षों से तनाव का कारण रही है। 

SCO समिट के बाद सैन्य परेड में झलकेगा शक्ति प्रदर्शन

SCO समिट के बाद 3 सितंबर को चीन द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक सैन्य परेड का आयोजन किया जाएगा, जिसमें नवीनतम चीनी हथियारों की झलक भी देखने को मिलेगी। पुतिन और बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको के इसमें रुकने की संभावना है। । भारत, रूस, ईरान, तुर्की जैसे प्रमुख देशों की भागीदारी इसे और भी रणनीतिक रूप से अहम बनाती है।

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