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Fighter Jet Tejas: मलेशिया की हवाई शक्ति को बढ़ाएगा तेजस, चीन और दक्षिण कोरिया के विमानों को दरकिनार कर भारत के फाइटर जेट पर भरोसा जताया

Fighter Jet Tejas: मलेशिया अपने एयरफोर्स की ताकत बढ़ाने जा रहा है। उसने भारतीय कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ तेजस विमान खरीद के लिए पूरा मन बना लिया है। बता दें कि मलेशिया ने चीन, दक्षिण कोरिया और रूस को छोड़कर भारत के HAL कंपनी के साथ सौदा करना चाहता है।

Pankaj Yadav Written By: Pankaj Yadav
Updated on: July 03, 2022 18:20 IST
Tejas Fighter Jet- India TV Hindi News
Image Source : ANI Tejas Fighter Jet

Highlights

  • भारत से तेजस लड़ाकू विमान खरिदेगा मलेशिया
  • खरीद प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्ष में चल रही बातचीत
  • तेजस ने चीन और दक्षिण कोरिया के लड़ाकू विमान को पछाड़ा

Fighter Jet Tejas: भारत का ‘तेजस’ हल्का लड़ाकू विमान मलेशिया की पहली पसंद बनकर उभरा है और यह दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अपने पुराने हो चुके लड़ाकू विमानों को बदलना चाहता है। HAL निर्मित तेजस ने प्रतिस्पर्धा में शामिल चीनी और दक्षिण कोरियाई विमानों को पछाड़ दिया है। एचएएल के चेयरमैन ने कहा कि चीनी विमान जेएफ-17, दक्षिण कोरियाई विमान एफए-50 और रूस के मिग-35 तथा याक-130 से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद भी मलेशिया ने तेजस पर भरोसा जताया है। तेजस विमानों को लेकर दोनों पक्ष वार्ता कर रहे हैं, ताकि खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। 

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन आर माधवन ने कहा कि चीन के जेएफ-17, दक्षिण कोरिया के एफए-50, रूस के मिग-35 और याक-130 लड़ाकू विमानों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद मलेशिया तेजस की खरीद के लिए बात कर रहा है। भारत ने पैकेज के तहत मलेशिया में एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल) सुविधा स्थापित करने की पेशकश की है, क्योंकि मॉस्को पर लगे प्रतिबंध के कारण रूस से खरीदे गए एसयू-30 विमानों के कलपुर्जों की खरीद में मलेशिया को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 

यह बड़ा सौदा क्या जल्द पूरा होगा

माधवन ने कहा कि मैं इसे लेकर बहुत अधिक आश्वस्त हैं बशर्ते कोई राजनीतिक बदलाव नहीं हो।’’ राज्य द्वारा संचालित दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी के शीर्ष कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि अगर सौदा तय हो जाता है, तो यह विमान के अन्य संभावित खरीदारों को ‘बहुत अच्छा संकेत’ देगा और इसकी समग्र निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। माधवन ने कहा, ‘‘बातचीत लगभग अंतिम चरण में है। हम एकमात्र देश हैं, जो उन्हें एसयू-30 विमानों के साथ-साथ रूस के अलावा अन्य देशों के विमान के लिए सहयोग की पेशकश कर रहे हैं। हम उसके बेड़े के रखरखाव से जुड़ी हर जरूरत के लिए मलेशिया का सहयोग कर सकते हैं।’’ 

तेजस का मुकाबला नहीं कर पाया चीनी फायटर जेट

यह पता चला है कि चीनी जेएफ-17 सस्ता था, लेकिन यह तेजस एमके-आईए संस्करण के तकनीकी मापदंडों और भारत द्वारा प्रस्तावित एसयू-30 बेड़े के रखरखाव की पेशकश से मुकाबला नहीं कर सका। खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उच्च पदस्थ अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक टीम के जल्द ही भारत आने की उम्मीद है। माधवन ने कहा कि जेएफ-17 और एफए-50 की तुलना में तेजस काफी बेहतर विमान है और भारतीय विमानों के चयन से मलेशियाई को भविष्य में अपने बेड़े के उन्नयन के लिए एक विकल्प मिलेगा। एचएएल द्वारा निर्मित तेजस एक एकल इंजन और अत्यधिक सक्षम बहु-भूमिका वाला लड़ाकू विमान है, जो उच्च-खतरे वाले वायु वातावरण में संचालन में सक्षम है। 

भारतीय हवाई सैन्य बल की शान है तेजस

पिछले साल फरवरी में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए HAL के साथ 48,000 करोड़ रुपए का सौदा किया था। भारत ने तेजस के MK-2 संस्करण के साथ-साथ पांचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCF) को विकसित करने के लिए पांच अरब अमेरिकी डॉलर की महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू कर दिया है।

HAL मलेशिया को भी उसी स्तर की सेवाएं जैसी भारत को देगा

माधवन ने कहा, ‘‘वास्तव में हम अकेले हैं जिन्होंने उनकी जरूरत की हर चीज को कवर किया और उनकी बजट आवश्यकताओं को भी पूरा किया।’’ HAL प्रमुख ने कहा, ‘‘कोई भी उन्हें इतनी तेजी से अपग्रेड की पेशकश नहीं करेगा, जितना तेज हम करेंगे। उनके पास तेजस मार्क 2 में एक विकल्प उपलब्ध होगा और वे AMCA के बारे में सोच भी सकते हैं।’’ मलेशिया कितने विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है, यह तत्काल स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि HAL मलेशिया को उसी स्तर की सेवाएं देगा, जैसी वह भारतीय वायुसेना को देता रहा है। 

यह पूछे जाने पर कि क्या मलेशिया से एचएएल के अनुबंध से भारतीय वायुसेना को तेजस जेट की आपूर्ति प्रभावित होगी। इस पर माधवन ने कहा कि आवश्यकता के आधार पर विमान का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। योजना के मुताबिक एचएएल वर्ष 2025 में भारतीय वायुसेना को जेट (MK-IK संस्करण) देना शुरू कर देगा और सभी 83 जेट विमानों को 2030 तक सौंपना होगा। 

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