तेहरान: ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घरीबाबादी ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन ऐसा तभी होगा जब वह विश्वास बहाली के लिए सार्थक कदम उठाएगा। ईरान शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के उप विदेश नीति आयुक्त के साथ बैठक करने वाला है। जून में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध के बाद यह पहली वार्ता होगी। इस युद्ध के दौरान अमेरिकी बमवर्षक विमानों ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था।
क्या बोले ईरान के उप विदेश मंत्री
घरीबाबादी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वार्ता में शामिल होने के लिए, ईरान ‘कई प्रमुख सिद्धांतों’ को बनाए रखने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इनमें ‘‘ईरान का विश्वास फिर से बहाल करना, सैन्य कार्रवाई जैसे गुप्त एजेंडे के लिए वार्ता को एक मंच के रूप में इस्तेमाल करने से बचना, परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान के अधिकारों का सम्मान और प्रतिबंधों को हटाना शामिल है।
'ईरान नहीं छोड़ेगा परमाणु कार्यक्रम'
इस बीच यहां यह भी बता दें कि, हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि पिछले महीने अमेरिकी हमलों के बाद परमाणु ठिकानों को हुई "गंभीर" क्षति के बावजूद, ईरान की अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने की कोई योजना नहीं है। ईरान का यूरेनियम एनरिचमेंट प्रोग्राम जारी रहेगा।
इजरायल ने दी है चेतावनी
हाल ही में इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने ईरान को चेतावनी दी थी। काट्ज ने कहा था कि ईरान को खतरनाक स्तर तक संवर्धित (एनरिच) किए गए यूरेनियम को वापस करना होगा। उन्होंने कहा था कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान को यह संदेश दिया गया है कि उसे अपना एनरिच यूरेनियम सौंपना होगा। माना जाता है कि ईरान अपने यूरेनियम को 60 फीसदी तक एनरिच कर चुका था। अगर यह स्तर 90 प्रतिशत तक पहुंच जाता तो ईरान परमाणु बम बनाने में सक्षम हो जाता। (एपी)
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