इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजरायल को हथियार बनाने की अपनी क्षमता विकसित करके अमेरिकी सैन्य निर्भरता से आजादी हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ चल रहे संघर्ष के लिए यह बदलाव जरूरी है। वेस्ट बैंक के गुश एत्जियन में रिजर्व कॉम्बैट अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान उन्होंने यह बात कही। नेतन्याहू ने आगे कहा, "मैं उस समर्थन की बहुत सराहना करता हूं जो हमें मिला है और जो मैंने पिछले कुछ वर्षों में अपने अमेरिकी दोस्तों से हासिल किया है। लेकिन आज मैं कहता हूं, हमें अपने खुद के स्वतंत्र हथियार-उत्पादन सिस्टम की ज़रूरत है। हमें अपने हथियार खुद बनाने होंगे।"
अमेरिकी सैन्य मदद खत्म करने की नीति
वहीं सुरक्षा हालातों पर बात करते हुए नेतन्याहू ने आगे कहा, "हम अब ईरान और उसके प्रॉक्सी (प्रतिनिधियों) का सामना कर रहे हैं। हमने उन पर जोरदार प्रहार किया है। यह अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह हमारी ताकत पर निर्भर करता है। 30 साल बाद हम कहां होंगे, यह हमारी ताकत पर निर्भर करता है। इसीलिए हम अभी और ज़्यादा ताकत बना रहे हैं।" नेतन्याहू ने इजरायल के लिए "स्वतंत्र हथियार क्षमता" रखने की अपनी महत्वाकांक्षा का जिक्र किया। हालांकि नेतन्याहू ने आने वाले दशक में अमेरिकी सैन्य मदद को धीरे-धीरे खत्म करने की नीति अपनाई है, लेकिन ये टिप्पणियां तनावपूर्ण माहौल में आई हैं।
US-ईरान समझौते को खारिज कर रहा इजरायल
यरूशलेम को अपनी ऑपरेशनल आजादी पर संभावित अमेरिकी पाबंदियों को लेकर चिंता बढ़ रही है, खासकर इसलिए क्योंकि वाशिंगटन तेहरान के साथ एक ऐसे समझौते की कोशिश कर रहा है जिसे इजरायल काफी हद तक खारिज करता है। नेतन्याहू ने कहा, "हमें निर्भरता से खुद को मुक्त करने, लगातार अपनी ताकत बढ़ाने, ज़्यादा से ज़्यादा टेक्नोलॉजी को शामिल करने और आप जैसे कमांडरों की और पीढ़ियों को तैयार करने की ज़रूरत है, क्योंकि आखिरकार यही हमारी स्थिति तय करेगा।"
ट्रंप के बयान के बाद नेतन्याहू का रिएक्शन
यह बयान पिछले हफ़्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणियों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ महीनों में, "इजरायल की सुरक्षा करने वाले दो-तिहाई रक्षा हथियार" अमेरिका द्वारा सप्लाई और फाइनेंस किए गए थे। 'द टाइम्स ऑफ इजराइल' के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली प्रतिनिधियों ने हाल ही में 10 साल के नए सुरक्षा सहयोग ढांचे पर बातचीत शुरू की है, जिसका मकसद मौजूदा व्यवस्था को मदद से बदलकर पूरी तरह से आपसी साझेदारी में "धीरे-धीरे बदलना" है।
यह भी पढ़ें-
"हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं", JD Vance के बयान पर बवाल, सीनेटरों ने लगा दी क्लास-इतिहास भूल गए?