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नेपाल में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच चीन ने दिया पहला बयान, नहीं लिया दोस्त ओली का नाम

 Published : Sep 10, 2025 04:53 pm IST,  Updated : Sep 10, 2025 04:53 pm IST

नेपाल में तख्तापलट हो चुका है और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार का पतन हो गया है। यह सब महज कुछ घंटों में हिंसक प्रदर्शन की वजह से हुआ। नेपाल के हालात पर अब चीन की ओर से भी पहला बयान सामने आया है।

केपी शर्मा ओली (L) शी जिनपिंग (R)- India TV Hindi
केपी शर्मा ओली (L) शी जिनपिंग (R) Image Source : AP

Nepal Gen-Z Protest China Reaction: नेपाल में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच अब चीन का भी बयान सामने आया है। शिन्हुआ न्यूज के मुताबिक बुधवार को चीन ने नेपाल के सभी पक्षों से घरेलू मुद्दों को उचित तरीके से निपटाने, सामाजिक व्यवस्था और स्थिरता बहाल करने का आग्रह किया। गौर करने वाली बात यह है चीन की ओर से दिए गए बयान में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का नाम तक नहीं लिया गया है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क्या कहा?

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक मीडिया ब्रीफिंग में नेपाल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'चीन और नेपाल के बीच पारंपरिक रूप से दोस्ताना पड़ोसी वाला रिश्ता रहा हैं। हमें उम्मीद है कि नेपाल में सभी वर्ग घरेलू मुद्दों को उचित ढंग से संभालेंगे, सामाजिक व्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता को जल्द से जल्द बहाल करेंगे।'

लिन जियान ने नहीं लिया ओली का नाम

नेपाल में सोशल मीडिया बैन को लेकर Gen-Z आंदोलन की वजह से केपी शर्मा ओली को पीएम पद छोड़ना पड़ा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान ओली के इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की। ओली को चीन समर्थक नेता माना जाता है। उन्होंने चीन के साथ नेपाल के रणनीतिक संबंधों को गहरा करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

नेपाल में हुआ हिंसक आंदोलन

भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को Gen-Z आंदोलन में पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई थी। इन मौतों के बाद आंदोलन उग्र हो गया था और प्रधानमंत्री ओली को ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि प्रदर्शनकारियों ने संसद, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी इमारतों, राजनीतिक दलों के कार्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के घरों में आग लगा दी थी। फिलहाल, नेपाल में हालात को काबू करने के लिए सेना को आगे आना पड़ा है।

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