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विश्व राजनीति में बढ़ी हलचल, ट्रंप के दौरे के तुरंत बाद पुतिन क्यों जा रहे चीन, किन मुद्दों पर होगी चर्चा? जानें डिटेल्स

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : May 16, 2026 04:17 pm IST,  Updated : May 16, 2026 04:35 pm IST

जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा खत्म हुआ क्रेमलिन की ओर रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीजिंग दौरे का ऐलान कर दिया गया। वे 19 मई को दो दिवसीय दौरे पर बीजिंग जा रहे हैं।

Putin- India TV Hindi
व्लादिमीर पुतिन Image Source : AP

मॉस्को/बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के दो दिवसीय दौरे पर जाने वाले हैं। ट्रंप की बीजिंग यात्रा पूरी होने के तुरंत बाद क्रेमलिन ने एक बयान जारी कर पुतिन की चीन यात्रा का ऐलान किया। बताया गया कि पुतिन अपनी इस यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी और आपसी सहयोग को मजबूत करने के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। दोनों नेताओं के बीच वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। जिनपिंग और पुतिन में वार्ता के बाद संयुक्त घोषणा पत्र जारी किए जाने की भी संभावना है।

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आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी चर्चा

पुतिन का चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात का भी कार्यक्रम है। इस मुलाकात में  दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर चर्चा होने की संभावना हो रही है। क्रेमलिन ने पुतिन के चीन दौरे का ऐलान ट्रंप का चीन दौरान खत्म होने के ठीक एक दिन बाद किया है। ट्रंप का यह दौरा करीब एक दशक में किसी मौजूदा राष्ट्रपति द्वारा किया गया चीन का पहला दौरा था। इस दौरे पर ताइवान, व्यापारिक संबंधों और ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर प्रमुखता से चर्चा हुई।

ताइवान मुद्दे पर जिनपिंग की ट्रंप को दो टूक

शी जिनपिंग के साथ डोनाल्ड ट्रंप की मीटिंग के दौरान ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बनकर उभरा। जिनपिंग ने ताइवान को लेकर अमेरिका को सख्त संदेश दिया कि इस मुद्दे को गलत तरीके से डील करने से वाशिंगटन और बीजिंग के बीच टकराव बढ़ सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्या चर्चा हुई?

ट्रंप ने बाद में एयर फ़ोर्स वन में सवार होने के बाद कहा कि शी जिनपिंग की आपत्तियां सुनने के बाद उन्होंने अभी तक यह तय नहीं किया है कि ताइवान के लिए एक बड़े अमेरिकी हथियार पैकेज को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने और शी जिनपिंग ने ने ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर चर्चा की। ट्रंप ने दावा किया कि जिनपिंग इस बात पर सहमत थे कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहना चाहिए।

चीन रूस का प्रमुख आर्थिक साझेदार 

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से चीन और रूस के संबंध और मजबूत हुए हैं। पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच चीन रूस का प्रमुख आर्थिक साझेदार बनकर उभरा है। चीन रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीद रहा है, जिससे मॉस्को की अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है। हालांकि चीन खुद को यूक्रेन युद्ध में तटस्थ बताता रहा है और उसने रूस को हथियार आपूर्ति करने के पश्चिमी आरोपों को खारिज किया है।

यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी नजदीकियां!

फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन में अपना सैन्य अभियान शुरू किया तब से चीन ने रूस के संबंध मजबूत हुए हैं। हालांकि बीजिंग ने बार-बार शांति वार्ता का आह्वान किया है, लेकिन उसने रूस के कार्यों की निंदा करने से परहेज किया है और खुद को एक तटस्थ पक्ष के रूप में पेश किया।  चीन ने उन पश्चिमी आरोपों से भी इनकार किया है कि वह यूक्रेन संघर्ष के लिए रूस को हथियार या सैन्य उपकरण की आपूर्ति कर रहा है। वहीं बीजिंग ने पश्चिमी देशों पर यूक्रेन को लगातार हथियार देकर युद्ध को लंबा खींचने का आरोप लगाया है।

हाल के वर्षों में चीन रूस का एक प्रमुख आर्थिक भागीदार बन गया है। खासतौर से तब जब रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने मॉस्को को कई वैश्विक बाजारों से अलग-थलग कर दिया था। चीन रूसी जीवाश्म ईंधन के सबसे बड़े खरीदारों में से एक बना हुआ है, जो प्रतिबंधों के दबाव के बीच रूस की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में मदद करता है। 

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