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‘नशे का आदी था हिटलर, इंजेक्शन से उसकी नसें बेकार हो गई थीं’

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 06, 2016 09:45 pm IST,  Updated : Oct 06, 2016 09:45 pm IST

एक नई किताब में दावा किया गया है कि जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर की नसें अफीम वाले हजारों इंजेक्शन के चलते बर्बाद हुई थी और द्वितीय विश्व युद्ध के आखिरी चरण में नाजी तानाशाह के सनकी फैसलों की वजह मादक पदार्थों पर उसकी अत्यधिक निर्भरता थी।

Adolf Hitler | Photo: AP- India TV Hindi
Adolf Hitler | Photo: AP

एक नई किताब में दावा किया गया है कि जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर की नसें अफीम वाले हजारों इंजेक्शन के चलते बर्बाद हुई थी और द्वितीय विश्व युद्ध के आखिरी चरण में नाजी तानाशाह के सनकी फैसलों की वजह मादक पदार्थों पर उसकी अत्यधिक निर्भरता थी। पुरस्कार विजेता जर्मन लेखक नार्मन ओहलर के मुताबिक हिटलर को हेरोईन जैसे एक मादक द्रव्य की लत लग गई थी जिसे युकोडेल कहा जाता है। 1944 में लगे सदमे के बाद उन्हें इसकी सलाह दी गई थी। 

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ओहलर की किताब ‘ब्लिट्ज: ड्रग्स इन नाजी जर्मनी’ में दलील दी गई है कि हेरोईन जैसा नशीला पदार्थ हिटलर के आखिरी समय में उसके सनकी व्यवहार के लिए काफी हद तक जिम्मेदार था। इस किताब की ब्रिटिश इतिहासकारों ने सराहना की है। इसने हिटलर के निजी चिकित्सक डॉक्टर थियो मोरेल के जर्नल से विषय वस्तुओं पर प्रकाश डाला है। चिकित्सक ने एक बार शिकायत थी कि वह (हिटलर) अब और इंजेक्शन नहीं ले सकेंगे क्योंकि उनकी सारी नसें बेकार हो गई हैं। इस किताब में एक जगह लिखा हुआ है, ‘मैंने आज इंजेक्शन नहीं दिया ताकि पहले से बनी सुराख को भरने का मौका मिल सके।’ 

ओहलर ने बताया है कि 1944 में ऑपरेशन वाकयरी के रूप में जानी जाने वाली हिटलर की हत्या की कोशिश में बचने के बाद उसे नशे की लत लगी थी। इस घटना के तहत विरोधी खेमे ने हिटलर की मेज के नीचे एक ब्रीफकेस में बम रख दिया था। इस विस्फोट से हिटलर की दोनों कान के पर्दे फट गए। शरीर में छर्रे घुस गए और नसें प्रभावित हो गई। ओहलर को यह कहते हुए हुए बताया गया, मैं 1944 से डरा हुआ हूं, हिटलर ने एक दिन भी चैन से नहीं बिताया। ओहलर ने बताया कि इस घटना के पहले हिटलर लोगों के बीच रहने वाला व्यक्ति था। लेकिन अपने उपर जानलेवा हमले के बाद वह एकाकी हो गया , उसने दूसरों पर भरोसा करना छोड़ दिया और व्याकुल रहने लगा। 

हिटलर ने डॉक्टर मोरेल से अपना पुराना आत्मविश्वास बहाल करने को कहा इसलिए उस वक्त से उसे हजारों इंजेक्शन लगाए गए। अक्सर उसे यूकोडोल लगाया जाता जो हेरोईन जैसा है लेकिन यह आपको खुशफहमी में लाने की काफी क्षमता रखता है। ब्रिटिश युद्ध इतिहासकार एंटनी बीवोर ने बताया कि किताब में दिए तथ्य दुश्मन को हराने की अंतिम कोशिश में लड़ी गई बुल्गे की लड़ाई के दौरान हिटलर की अतार्किक तरकीबों की व्याख्या करते हैं। उन्होंने बताया, ‘ये सभी चीजें जाहिर करती हैं कि उसका खुद पर नियंत्रण नहीं रहा था जबकि जर्मन सेना उसके नियंत्रण में थी।’

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