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'दूसरे विश्व युद्ध के बाद भारत और रूस...', मॉस्को से जयशंकर ने दिया बड़ा बयान

 Published : Aug 21, 2025 11:40 pm IST,  Updated : Aug 21, 2025 11:40 pm IST

रूस की राजधानी मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की बैठक में भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति बनी। दोनों के बीच व्यापार संतुलन, तेल सहयोग, भारतीयों की रिहाई, आतंकवाद, और यूक्रेन संकट जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

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एस जयशंकर और सर्गेई लावरोव। Image Source : AP

मॉस्को: भारत और रूस ने एक बार फिर अपनी दोस्ती को और मजबूत करने का वादा किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित और स्थायी तरीके से बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सर्गेई लावरोव के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने कहा, 'दूसरे विश्व युद्ध के बाद भारत और रूस के रिश्ते दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तों में से एक रहे हैं। भू-राजनीतिक एकजुटता, नेताओं के बीच संपर्क और लोगों की भावनाएं इस दोस्ती की मजबूत बुनियाद हैं।'

रूस को निर्यात बढ़ाने पर खास ध्यान

जयशंकर ने मंगलवार को मॉस्को पहुंचकर रूस के साथ व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा शुरू की। उन्होंने लावरोव और रूस के फर्स्ट डिप्टी-पीएम डेनिस मंतुरोव के साथ बातचीत में भारत से रूस को निर्यात बढ़ाने पर खास ध्यान दिया। जयशंकर ने कहा, 'हमारा लक्ष्य है कि दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित बनाया जाए। इसके लिए गैर-टैरिफ बाधाओं और नियमों की रुकावटों को जल्दी हटाना जरूरी है।' भारत से दवाइयों, खेती और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने की बात हुई, ताकि व्यापार में मौजूदा असंतुलन को ठीक किया जा सके।

तेल के व्यापार को और बढ़ाने की बात हुई

चर्चा में रूस को उर्वरक की लंबे समय तक सप्लाई और भारतीय स्किल्ड वर्कर्स, खासकर आईटी, कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग सेक्टर में रूस की जरूरतों को पूरा करने पर भी सहमति बनी। जयशंकर ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को बनाए रखने की अहमियत पर भी जोर दिया। भारत और रूस के बीच तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों के व्यापार को और मजबूत करने की बात हुई। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, लेकिन भारत ने साफ किया है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की मांग पर आधारित है।

रूसी सेना में भारतीयों के होने का मुद्दा भी उठा

जयशंकर ने रूसी सेना में कुछ भारतीयों के शामिल होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, 'कई भारतीयों को रिहा कर दिया गया है, लेकिन कुछ मामले अभी बाकी हैं और कुछ लोग लापता हैं। हम उम्मीद करते हैं कि रूस इस मामले को जल्द सुलझाएगा। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और रूस ने एक साथ मिलकर हर तरह के आतंकवाद से लड़ने का संकल्प लिया। जयशंकर ने कहा, 'हम आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हैं। सीमा पार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करना हमारा हक है।' दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और जी20, ब्रिक्स और SCO जैसे मंचों पर सहयोग को और गहरा करने की भी बात की। 

यूक्रेन और अफगानिस्तान पर भी हुई चर्चा

जयशंकर और लावरोव ने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान की स्थिति पर भी बात की। जयशंकर ने कहा, 'भारत का रुख हमेशा बातचीत और कूटनीति पर रहा है। हम मानते हैं कि मतभेदों को सुलझाने का यही रास्ता है।' पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी और कहा था कि यूक्रेन संकट का हल युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत से निकलेगा। अगस्त में मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात कर दोनों पक्षों को शांति के लिए जल्द बातचीत शुरू करने की सलाह दी थी।

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