Highlights
- सर्बिया में चुनाव से पहले बेलग्रेड में छात्र संगठन की रैली में करीब डेढ़ लाख लोग जुटे।
- नोवी साद रेलवे स्टेशन हादसे में 16 लोगों की मौत के बाद छात्र आंदोलन तेज हुआ।
- पूर्व राष्ट्रपति वुसिक प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं, जबकि चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
बेलग्रेड: सर्बिया में रविवार को होने जा रहे संसदीय चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राजधानी बेलग्रेड में छात्र संगठन ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ ने सरकार के खिलाफ बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। इस रैली में करीब 1.5 लाख लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है। इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबला पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) और छात्र आंदोलन से निकले नए राजनीतिक संगठन के बीच माना जा रहा है। छात्र संगठन का लक्ष्य वुसिक और उनकी पार्टी के करीब 14 साल के शासन को चुनौती देना है।
नोवी साद रेलवे स्टेशन हादसे से शुरू हुआ आंदोलन
सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद हुई थी। देश के उत्तरी शहर नोवी साद के रेलवे स्टेशन पर छज्जा गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद सरकारी रेलवे परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई। इसके बाद छात्रों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिए।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर छात्रों का आंदोलन
शुरुआत में हादसे को लेकर शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन में बदल गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और कानून का शासन कमजोर हो रहा है। उनके आंदोलन को उन लोगों का भी समर्थन मिलने लगा, जो पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश हो चुके थे। छात्रों की मांगों में न्याय, पारदर्शिता और सरकारी कामकाज में जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रमुख है।
‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ बनाकर चुनावी मैदान में उतरे छात्र
करीब दो साल से चल रहे आंदोलन के बाद छात्रों ने ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ नाम से एक नया राजनीतिक संगठन बनाया। उन्होंने समय से पहले चुनाव कराने की मांग की। अब यह संगठन सीधे चुनाव में उतरकर वुसिक की पार्टी को चुनौती दे रहा है। छात्र आंदोलन ने ‘स्टूडेंट्स जीतेंगे’ और ‘सर्बिया या माफिया’ जैसे नारों के जरिए अपना चुनाव प्रचार किया है। इसका नेतृत्व किसी एक चेहरे के हाथ में नहीं है। संगठन भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और कानून का शासन बहाल करने पर जोर दे रहा है।
गांव-गांव तक पहुंचने की है छात्रों की कोशिश
छात्र संगठन ने अपने अभियान को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा। छात्र पैदल मार्च और साइकिल यात्राओं के जरिए ग्रामीण इलाकों तक पहुंचे और मतदाताओं से संपर्क किया। ये इलाके परंपरागत रूप से वुसिक की पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाते हैं। सरकार समर्थक मीडिया में छात्रों की आलोचना के बावजूद आंदोलन से जुड़े लोग अपना प्रचार जारी रखे हुए हैं। बेलग्रेड में हुई अंतिम चुनावी रैली में भी बड़ी संख्या में समर्थक जुटे और उन्होंने जीत के नारे लगाए।

2 बार राष्ट्रपति रहे वुसिक अब PM पद की दौड़ में
अलेक्जेंडर वुसिक 2 बार सर्बिया के राष्ट्रपति रह चुके हैं। देश में तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का प्रावधान नहीं होने के कारण अब वह प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी पार्टी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी यानी SNS वर्ष 2012 से सत्ता में है। इस चुनाव को वुसिक के राजनीतिक भविष्य और उनकी पार्टी के लंबे शासन के लिए अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर, छात्र संगठन सत्ता परिवर्तन की उम्मीद के साथ मतदाताओं के बीच पहुंच रहा है।
विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप
वुसिक ने चुनाव प्रचार के दौरान सरकार समर्थक मीडिया पर लगातार अपनी बात रखी है। उन्होंने विरोधियों को विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने वाला बताया और आरोप लगाया कि वे देश में ‘कलर रिवोल्यूशन’ यानी रंग क्रांति के जरिए अराजकता फैलाना चाहते हैं। वुसिक का कहना है कि उनकी योजनाओं से देश में समृद्धि आएगी। उन्होंने नई सड़कों और अस्पतालों के निर्माण जैसे विकास कार्यों को भी अपने अभियान का हिस्सा बनाया है।
वुसिक पर लोकतांत्रिक आजादी दबाने के आरोप
वुसिक के आलोचकों का आरोप है कि उनके शासन में भ्रष्टाचार बढ़ा है, संगठित अपराध से कथित संबंध रहे हैं और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पर दबाव डाला गया है। खास तौर पर मीडिया की आजादी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, वुसिक इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। रेलवे परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की आशंकाओं ने भी सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ाने में भूमिका निभाई। नोवी साद हादसे के बाद छात्रों ने इसी मुद्दे को अपने आंदोलन का केंद्र बना लिया।
पुतिन के समर्थन का चुनाव प्रचार में जिक्र
वुसिक चुनाव प्रचार के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन का भी बार-बार जिक्र कर रहे हैं। वर्ष 2012 में सत्ता में आने के लिए उन्होंने यूरोपीय संघ समर्थक रुख अपनाया था, लेकिन अब रूस के साथ संबंधों को भी प्रमुखता दे रहे हैं। सर्बिया के सरकारी टीवी चैनल RTS को दिए बयान में वुसिक ने कहा कि पुतिन जानते हैं कि अगर उनकी लोकलुभावन राजनीति करने वाली पार्टी जीतती है, तो रूस पर प्रतिबंध नहीं लगाए जाएंगे। वुसिक ने यह भी कहा कि पुतिन ने उनके प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद जताई है।
रत्को म्लादिच के अंतिम संस्कार पर यूरोपीय संघ नाराज
पिछले महीने वुसिक ने यूरोपीय संघ की नाराजगी के बावजूद बेलग्रेड में रत्को म्लादिच का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होने दिया। म्लादिच बोस्नियाई सर्ब सेना का पूर्व कमांडर था, जिसे नीदरलैंड स्थित संयुक्त राष्ट्र न्यायाधिकरण ने नरसंहार के अपराध में दोषी ठहराया था। इसके बाद SNS ने वुसिक की पूर्व कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी सर्बियन रेडिकल पार्टी के साथ भी गठबंधन किया। इस पार्टी के नेता वोइस्लाव शेसेल्ज को भी 1990 के दशक के यूगोस्लाव संघर्षों से जुड़े युद्ध अपराधों में दोषी ठहराया गया था।

चुनाव की निष्पक्षता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता
सर्बिया यूरोपीय संघ की सदस्यता का उम्मीदवार देश है। हालांकि, यूरोपीय संघ ने वहां लोकतंत्र के कमजोर होने को लेकर चिंता जताई है। इस बार चुनाव से पहले लोगों को हिरासत में लेने, मीडिया पर सरकार के लगभग पूर्ण नियंत्रण और कार्यकर्ताओं की निगरानी तथा साइबर हमलों की खबरों ने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षकों और यूरोपीय संघ ने भी मतदान की सुरक्षा और निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई है।
पिछले चुनाव के बाद भी लगे थे धांधली के आरोप
सर्बिया में वर्ष 2023 के पिछले चुनाव के बाद विपक्ष ने धांधली का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किए थे। उस समय अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया था। इस सप्ताह चुनाव पर नजर रखने वाले संगठन ‘सेंटर फॉर रिसर्च, ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी’ ने अपनी रिपोर्ट में चुनाव में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों और मतदाताओं की स्वतंत्रता में कमी तथा असमानता बढ़ने की बात कही। संगठन के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा की 100 से अधिक घटनाएं सामने आईं।
सर्बिया के 64 लाख मतदाता करेंगे फैसला
सर्बिया में करीब 64 लाख मतदाता हैं और संसद में कुल 250 सीटें हैं। चुनाव में कई राजनीतिक दल हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन मुकाबला वुसिक की SNS और ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ के बीच सिमटता नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों को मतदान में बड़ी संख्या में लोगों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। उनके मुताबिक, कई छोटे दलों के लिए संसद में पहुंचने के लिए जरूरी 3 प्रतिशत वोट हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में चुनाव का परिणाम देश की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
छात्रों की अंतिम रैली में गूंजे जीत के नारे
गुरुवार शाम बेलग्रेड में छात्रों की अंतिम चुनावी रैली आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक जुटे। भीड़ ने ‘जीत’ के नारे लगाए। छात्र आंदोलन की समर्थक लिडिया मिलादिनोविच ने कहा,
'रविवार के बाद सब कुछ शानदार नहीं हो जाएगा, लेकिन हालात बहुत, बहुत बेहतर होंगे।'
छात्रों का कहना है कि वे देश में न्याय और कानून का शासन बहाल करना चाहते हैं। इस चुनाव को दुनिया भर में भ्रष्टाचार, लोकतंत्र और सरकार की जवाबदेही को लेकर जनता के रुख की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। (AP से इनपुट्स के साथ)
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