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सर्वाधिक गरीब बच्चों पर ध्यान केंद्रित करे विश्व: यूनिसेफ

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 28, 2016 12:24 pm IST,  Updated : Jun 28, 2016 12:33 pm IST

UNICEF ने मंगलवार को कहा कि दुनिया को पिछले 25 वर्षों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए सर्वाधिक गरीब बच्चों की मदद करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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संयुक्त राष्ट्र: UNICEF ने मंगलवार को कहा कि दुनिया को पिछले 25 वर्षों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए सर्वाधिक गरीब बच्चों की मदद करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। UNICEF ने अपनी वार्षिक स्टेट ऑफ द वल्ड्र्स चिल्ड्रन रिपोर्ट में कहा कि उसने 1990 के बाद से शिशु मृत्युदर में आई 53 प्रतिशत गिरावट और अत्यधिक गरीबी में आई नाटकीय कमी जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियों का जायजा लिया। उसने चेतावनी दी कि यदि पांच साल से कम आयु के सबसे कमजोर छह करोड़ 90 लाख बच्चों पर प्रमुखता से ध्यान नहीं दिया गया तो वे ऐसे कारणों से मारे जाएंगे जिन्हें रोका जा सकता था और 16 करोड़ 70 लाख लोग आगामी 15 वर्ष में गरीबी से जूझेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक 75 करोड़ लड़कियों का बाल विवाह होगा। UNICEF के उप कार्यकारी निदेशक जस्टिन फोर्सिथ ने कहा कि अब तक हुई प्रगति मुख्य रूप से उन बच्चों पर ध्यान केंद्रित करके की गई है जिन तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान है या यह प्रगति उच्च प्रभाव के साथ स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में हस्तक्षेपों से की गई है। उन्होंने कहा, हम अब यह देख रहे हैं यदि हम सर्वाधिक वंचित पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हैं तो इस प्रगति को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे।

UNICEF ने कार्यक्रमों के निदेशक टेड चैबन ने कहा, हमने शानदार प्रगति की है लेकिन यह प्रगति न्याय संगत नहीं रही है। UNICEF के अनुसार विश्व के अमीर बच्चों की तुलना में सबसे गरीब बच्चों की पांच वर्ष की आयु से पहले मौत हो जाने और गंभीर रूप से कुपोषित होने की दोगुनी आशंका है। दक्षिण एशिया एवं उप सहारा अफ्रीका में जिन बच्चों की माताएं शिक्षित नहीं हैं, उनकी माध्यमिक शिक्षा प्राप्त मांओं के बच्चों की तुलना में पांच वर्ष की आयु से पहले मौत हो जाने की करीब तिगुनी अधिक आंशका है।

इसके अलावा, अमीर घरों की तुलना में सर्वाधिक गरीब परिवारों में लड़कियों का बाल विवाह होने की आशंका दोगुनी है। चैबन ने कहा कि स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की संख्या में वर्ष 2011 के बाद से हुआ इजाफा चिंता का एक अन्य कारण है। उन्होंने कहा कि करीब 12 करोड़ 40 लाख बच्चे आज प्राथमिक या माध्यमिक स्कूल में दाखिला नहीं लेते, ऐसे में शिक्षा सबसे कमजोर लोगों तक पहुंचने की कुंजी है। चैबन ने कहा, विश्वभर में जहां मौलिक शिक्षा में निवेश बहुत बढ़ा है, वहां निवेश पर अच्छा लाभ भी मिला है।

शिक्षा पूरी होने के प्रति वर्ष के साथ व्यस्क की आय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। फोर्सिथ ने कहा कि यदि विश्वभर में असमानता से निपटने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया, तो विश्वभर के समाजों पर नाटकीय प्रभाव पड़ेगा और इससे अस्थिरता बढ़ेगी।

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