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अमेरिका ने इस द्वीप पर बना रखा है खुफिया अड्डा, रूस और चीन ने किया हमला तो...

 Published : Sep 26, 2025 01:33 pm IST,  Updated : Sep 26, 2025 01:56 pm IST

दुनिया भर में अमेरिका ने कई सैन्य बेस बा रखे हैं लेकिन मार्शल आइलैंड्स पर बने अमेरिकी सीक्रेट बेस के बारे में दुनिया कम ही जानती है। यहां क्वाजालीन द्वीप में अमेरिका ने ऐसी तैयारी कर रखी है कि उसे किसी भी तरह के हमले की सूचना तुरंत मिल जाएगी।

America Secret Base (Representational Image)- India TV Hindi
America Secret Base (Representational Image) Image Source : AP

America Secret Base: प्रशांत महासागर के बीच बसा मार्शल आइलैंड्स देखने में तो एक छोटा और शांत द्वीप है, लेकिन इसकी सच्चाई से दुनिया अनजान है। यह वही जगह है जहां अमेरिका ने दशकों तक परमाणु परीक्षण किए हैं और सीक्रेट अड्डे बना रखे हैं। यहां मौजूद अमेरिकी सीक्रेट बेस के बारे में दुनिया कम ही जानती है। चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं। 

1,200 द्वीपों का समूह है मार्शल आइलैंड्स

मार्शल आइलैंड्स प्रशांत महासागर के बीच स्थित लगभग 1,200 छोटे-छोटे द्वीपों का समूह है। इनका क्षेत्रफल तो बहुत छोटा है लेकिन रणनीतिक लिहाज से ये बेहद महत्वपूर्ण हैं। खास बात यह है कि यह एशिया और अमेरिका के बीच समुद्री मार्ग पर स्थित है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान और अमेरिका ने इस जगह को लेकर संघर्ष किया था। अमेरिका ने 1944 में इसे अपने कब्जे में ले लिया और युद्ध के बाद इसे “ट्रस्ट टेरिटरी” घोषित किया। इसका मतलब यह था कि अमेरिका को यहां अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए खुली छूट मिल गई।

छोटा द्वीप, रोल बड़ा

1200 द्वीपों एक द्वीप क्वाजालीन भी हैं जो अमेरिका के लिए सबसे अहम है। माना जाता है कि अमेरिका अपने जिस सिक्योरिटी सिस्टम पर इतराता है उसके पीछे इस छोटे द्वीप का बड़ा रोल है। अमेरिका करोड़ों डॉलर खर्च भी करता है, यहां तक कि इस जगह के नेताओं को भी मोटी रकम दी जाती है। खास बात यह है कि यहां चीन की भी नजरें गढ़ाए बैठा है। चीन भी यहां के लोगों को पैसा या फिर सुविधाएं देकर अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है। तमाम कोशिशों के बाद भी अभी तक चीन की दाल यहां नहीं गली है।

America Secret Base (Representational Image)
Image Source : APAmerica Secret Base (Representational Image)

यहां से होती है अंतरिक्ष निगरानी

मार्शल आइलैंड्स में अमेरिका का सबसे बड़ा और गुप्त अड्डा क्वाजालीन में है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा एटोल (प्रवाल द्वीप) माना जाता है और यहां पर अमेरिकी सेना ने अपने कई हाईटेक ठिकाने बना रखे हैं। इसे “Ronald Reagan Ballistic Missile Defense Test Site” के नाम से भी जाना जाता है। यहां से अमेरिका मिसाइलों का परीक्षण करता है और अंतरिक्ष निगरानी भी करता है। माना जाता है कि अमेरिका ने यहां स्पेस ट्रैकिंग राडार, मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम और सैटेलाइट कंट्रोल सेंटर स्थापित कर रखे हैं। यहां आम लोगों की एंट्री बैन है। मार्शल आइलैंड्स की सरकार भी अमेरिका की अनुमति के बिना यहां कदम नहीं रख सकती है।

हमले के समय अमेरिका को मिल जाएगी जानकारी

अब ऐसे में समझा जा सकता है कि अगर अमेरिका पर चीनी या रूस की ओर से हमले किए जाते हैं तो अमेरिका को पलक झपकते ही इसके बारे में जानकारी मिल जाएगी। यहां प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां भी तैनात की गई हैं जो लगातार एक्टिव रहती हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यहां पर गुप्त अंडरग्राउंड बंकर, हाईटेक लैब्स और एडवांस्ड वेपन टेस्टिंग फैसिलिटी तक मौजूद हैं। यह द्वीप समूह एक तरह से अमेरिका का गुप्त द्वार है, जिसके सहारे वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखता है। क्वाजालीन बेस पर लगभग 1,300 अमेरिकी सैनिक और कुछ खास लोग ही रहते हैं। यहां हर तरह की सुविधाएं मौजूद हैं। 

अमेरिका की ताकत और भयावह इतिहास

ये तो बात अमेरिकी ताकत की हुई लेकिन इसका इतिहास भयावह है। जापान में परमाणु बम गिराने के बाद (हिरोशिमा और नागासाकी, 1945) अमेरिका ने महसूस किया कि उसे और भी ज्यादा शक्तिशाली हथियारों की जरूरत है। इसके लिए उसने मार्शल आइलैंड्स को परीक्षण स्थल चुना। 1946 से 1958 के बीच अमेरिका ने यहां 67 परमाणु परीक्षण किए। 1954 में हुआ कैसल ब्रावो टेस्ट इतना शक्तिशाली था कि यह अमेरिका की उम्मीद से भी 3 गुना ज्यादा विनाशकारी साबित हुआ। इस परीक्षण के बाद आसमान में रेडियोधर्मी बादल फैल गए और आसपास के गांवों के लोग बुरी तरह बीमार पड़ गए। कई पीढ़ियों तक लोगों को कैंसर, जन्मजात विकलांगता और त्वचा रोग झेलने पड़े।

स्थानीय लोगों ने झेली बर्बादी

अमेरिका ने जब द्वीपों पर परमाणु परीक्षण और सैन्य अड्डे बनाए, तब स्थानीय लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई। हजारों लोगों को जबरन उनके घरों से हटाकर दूसरी जगह बसाया गया। कई द्वीप हमेशा के लिए रेडियोधर्मी प्रदूषण से दूषित हो गए। आज भी बिकिनी द्वीप पर रहना असंभव है क्योंकि वहां की मिट्टी और पानी जहरीले हो चुके हैं। स्थानीय लोग पीढ़ियों से न्याय की मांग कर रहे हैं लेकिन कुछ भी नहीं हुआ है।

America Force (Representational Image)
Image Source : APAmerica Force (Representational Image)

स्वतंत्र देश लेकिन अमेरिका का वर्चस्व

मार्शल आइलैंड्स भले ही एक स्वतंत्र देश है, लेकिन यह पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है। यहां अमेरिकी डॉलर चलता है। रक्षा और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका के पास है। अमेरिका आर्थिक सहायता देता है, लेकिन बदले में यहां अपना अड्डा कायम रखता है। यह स्थिति स्थानीय राजनीति को भी प्रभावित करती है। मार्शल आइलैंड्स सरकार चाहकर भी अमेरिका के खिलाफ नहीं जा सकती है।

महाशक्तियों की प्रयोगशाला बन जाते हैं छोटे देश

मार्शल आइलैंड्स की कहानी सिर्फ एक छोटे से द्वीप समूह की नहीं बल्कि उस वैश्विक राजनीति की है जिसमें महाशक्तियां छोटे देशों को प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल करती हैं। अमेरिका ने यहां परमाणु परीक्षण किए, गुप्त अड्डे बनाए और अब भी इस जगह को अपनी सामरिक ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। आज भी यह द्वीप समूह अमेरिकी सीक्रेट बेस के कारण दुनिया की निगाहों में है। लेकिन, दुर्भाग्य यह है कि यहां के मूल निवासियों को सिर्फ दर्द और तकलीफ मिली है।

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