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H1B वीजा मामले में जयशंकर ने बिना नाम लिए ट्रंप को सुनाया, कहा- 'ग्लोबल वर्कफोर्स है वास्तविकता'

 Published : Sep 26, 2025 09:36 am IST,  Updated : Sep 26, 2025 09:40 am IST

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि दुनिया को ग्लोबल वर्कफोर्स की हकीकत स्वीकार करनी होगी। उन्होंने वैश्विक कार्यबल के निर्माण की बात भी कही जो अधिक स्वीकार्य, समकालीन और कुशल हो।

S Jaishankar- India TV Hindi
S Jaishankar Image Source : @DRSJAISHANKAR/X

H-1B Visa: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा संदेश दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक कार्यबल वास्तविकता है। दुनिया वैश्विक कार्यबल की जरूरत को नजरअंदाज नहीं कर सकती है। इस दौरान उन्होंने जोर देकर यह भी कहा कि कई देश अपनी आबादी से श्रम की मांग पूरी नहीं कर सकते हैं।

'वैश्विक कार्यबल से कोई बच नहीं सकता'

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, "यह एक सच्चाई है। आप इससे भाग नहीं सकते। वैश्विक कार्यबल राजनीतिक बहस का विषय हो सकता है लेकिन, इससे कोई बच नहीं सकता। अगर आप मांग और जनसांख्यिकी को देखें, तो कई देशों में मांगें पूरी नहीं हो पाती हैं, सिर्फ राष्ट्रीय जनसांख्यिकी के कारण।"

'अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को करना होगा समाधान'

विदेश मंत्री ने एक ऐसे वैश्विक कार्यबल के निर्माण का आह्वान किया जो अधिक स्वीकार्य, समकालीन और कुशल हो। उन्होंने कहा, "हम वैश्विक कार्यबल का एक अधिक स्वीकार्य, समकालीन, कुशल मॉडल कैसे बना सकते हैं, जो एक वितरित, वैश्विक कार्यस्थल पर स्थित हो? मुझे लगता है कि आज यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है जिसका समाधान अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को करना होगा।"

ट्रंप ने बढ़ा दी है वीजा फीस

जयशंकर की यह टिप्पणी व्यापार और शुल्क चुनौतियों के साथ-साथ आव्रजन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बीच आई है। H-1B वीजा लंबे समय से भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी पाने का अहम जरिया रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इस वीजा के लगभग तीन-चौथाई लाभार्थी भारतीय होते हैं। इसके तहत कंपनियां आईटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। लेकिन, ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा पर एक लाख डॉलर की नई फीस लगा दी है। यह रकम पहले से मौजूद फाइलिंग और लीगल खर्चों के अलावा होगी, इससे वीजा बेहद महंगा हो जाएगा। 

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