बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के इंडिया गठबंधन के लिए जो सीट सबसे मुश्किल होने वाली हैं, उनमें बांका का नाम भी शामिल है। यह सीट बीजेपी का गढ़ बनी हुई है और इस चुनाव में भी आरजेडी के लिए यहां से जीत हासिल करना मुश्किल होगा। अगर विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस को यह सीट मिलती है तो कांग्रेस के लिए भी खोई जमीन हासिल करना आसान नहीं होगा। बांका में 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भी एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार को बढ़त मिली थी। ऐसे में विपक्षी गठबंधन की राह बेहद मुश्किल नजर आती है। इस बार यहां 11 नवंबर को मतदान होना है।
झारखंड से सटे इस इलाके में विकास अब भी नहीं पहुंचा है। कुछ समय तक यहां नक्सलियों का प्रभाव ज्यादा था। हालांकि, अब यहां के हालात सुधरे हैं। यहां हमेशा से ही मतदान भी जमकर होता रहा है और मतदाताओं ने कई बार अपने विधायक बदले हैं, लेकिन इलाके की तस्वीर जस की तस बनी हुई है। ऐसे में एंटी इनकंबेंसी ही विपक्ष की एकमात्र उम्मीद है।
कब किसे मिले जीत?
बांका में अब तक 20 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें चार उपचुनाव भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा आठ बार जीत बीजेपी को मिली है। इनमें एक जीत तब आई थी, जब पार्टी का नाम जनसंघ था। वहीं, कांग्रेस ने यहां सात बार जीत हासिल की है। राजद को दो बार, स्वतंत्र पार्टी और जनता पार्टी को एक-एक बार जीत मिली है। 2014 में उपचुनाव जीतने के बाद से रामनारायण मंडल यहां से लगातार विधायक बने हुए हैं। वह इससे पहले भी यहां से तीन चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में उनके लिए सातवीं बार इस सीट से विधायक बनना बहुत मुश्किल नहीं होगा।
किसका पलड़ा भारी?
बांका सीट पर साफ तौर पर एनडीए का पलड़ा भारी है। बीजेपी यहां विधानसभा चुनाव लड़ती है और लगातार तीन चुनाव जीl चुकी है। ऐसे में पार्टी जीत का चौका लगाना चाहेगी। वहीं, लोकसभा चुनाव में जेडीयू को टिकट दिया जाता है। जेडीयू के गिरधारी यादव भी इस सीट से लगातार तीन बार सांसद बन चुके हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार को जीत हासिल करने के लिए इस सीट पर एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा।
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