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नीतीश ने जातीय जनगणना की मांग फिर उठा, केंद्र से इस पर विचार करने का आग्रह किया

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jul 24, 2021 09:58 pm IST,  Updated : Jul 24, 2021 09:58 pm IST

केंद्र सरकार द्वारा संसद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातीय जनगणना नहीं कराने की बात स्पष्ट किए जाने के बावजूद नीतीश ने शनिवार को जाति आधारित जनगणना की मांग फिर दोहराई।

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब जातीय जनगणना के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। Image Source : PTI FILE

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब जातीय जनगणना के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा संसद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातीय जनगणना नहीं कराने की बात स्पष्ट किए जाने के बावजूद नीतीश ने शनिवार को जाति आधारित जनगणना की मांग फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि देश में जाति आधारित जनगणना से दलितों के अलावा अन्य गरीबों के लिए भी कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। कुमार ने कहा कि बिहार विधानसभा ने 2019 और 2020 में सर्व सम्मति से जाति आधारित जनगणना के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया था और केंद्र सरकार से इस पर 'अवश्य चिंतन करने' का आग्रह किया था।

जनता दल (युनाइटेड) के नेता नीतीश ने कहा कि जाति आधारित जनगणना 2010 में हुई थी और 2013 में एक रिपोर्ट मिली भी, लेकिन उसे कभी जारी नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के लाभार्थियों को यहां 350 एम्बुलेंस प्रदान करने के लिए आयोजित कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बात करते हुए कुमार ने कहा, ‘जाति आधारित जनगणना कम से कम एक बार की जानी चाहिए। इससे सरकार को दलितों के अलावा अन्य गरीबों की पहचान करने और उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाने में सुविधा होगी।’ कुमार के बयान से कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने संसद में कहा था कि केंद्र सरकार एससी और एसटी के अलावा कोई जातीय जनगणना नहीं कराएगी।


केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार ने नीतिगत मामले के रूप में जनगणना में एससी और एसटी के अतिरिक्त कोई जातीय जनगणना नहीं करने का फैसला किया है। संविधान के प्रावधानों के अनुसार लोकसभा और विधानसभाओं में जनसंख्या के अनुपात में एससी और एसटी के लिए सीटें आरक्षित हैं। कुमार ने कहा, ‘हमने 2019 और 2020 में जाति आधारित जनगणना के समर्थन में पहले ही विधानसभा में प्रस्ताव पारित किये हैं। हमने इसे केंद्र सरकार को भी भेजा था। हम इस मुद्दे को 1990 से उठा रहे हैं। एससी और एसटी के अलावा अन्य वर्गों के लोगों के विकास और कल्याण के लिए जाति आधारित जनगणना कम से कम एक बार की जानी चाहिए। केंद्र सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।’
 
वहीं, मुख्यमंत्री का ट्वीट आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सवालिया लहजे में कहा कि जातीय जनगणना पर केंद्र सरकार अगर पुनर्विचार नहीं करेगी तो आप क्या करेंगे? उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार में आपकी भी हिस्सेदारी है। नीतीश के ट्वीट के जवाब में तेजस्वी ने ट्वीट कर लिखा, ‘मुख्यमंत्री जी, केंद्र सरकार अगर जातीय जनगणना पर पुनर्विचार नहीं करेगी तो आप क्या करेंगे? हमारी मांग पर बिहार विाानसभा में सर्वसम्मति से जातिगत जनगणना का प्रस्ताव पारित किया गया था। केंद्र सरकार में आपकी हिस्सेदारी है। आपके कैबिनेट मंत्री हैं फिर भी अनुनय विनय कर रहे हैं?’

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