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आरक्षण पर चिराग पासवान बोले- "यह कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार, समीक्षा भी बर्दाश्त नहीं"

 Written By: Malaika Imam
 Published : Aug 23, 2026 05:02 pm IST,  Updated : Aug 23, 2026 05:35 pm IST

आरक्षण पर चिराग पासवान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण को खत्म करने की बात तो दूर, कोई इसकी समीक्षा भी करना चाहे तो वो भी उन्हें और उनकी पार्टी को मंजूर नहीं।

Chirag Paswan- India TV Hindi
चिराग पासवान Image Source : PTI

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी पार्टी का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। चिराग पासवान ने दोहराया है कि आरक्षण किसी की दी हुई खैरात नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों का एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है।

दरअसल, चिराग पासवान ने फरवरी 2020 में भी संसद के भीतर इसी बात को मजबूती से उठाया था। इसी वीडियो को शेयर उन्होंने कहा है कि आरक्षण को समाप्त करने की बात तो दूर, इसकी समीक्षा भी उनकी पार्टी को कभी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता अटूट है।

चिराग पासवान का सियासी सफर

बता दें कि चिराग पासवान दिग्गज दलित नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय राम विलास पासवान के पुत्र हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और इसके बाद साल 2011 में आई हिंदी फिल्म 'मिले ना मिले हम' से बतौर अभिनेता करियर की शुरुआत की। हालांकि, फिल्मों में मनचाही सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया और साल 2012 में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष बने। 

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बिहार के जमुई सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज कर मुख्यधारा की राजनीति में जोरदार एंट्री की, जिसके बाद 2019 में वे इसी सीट से दोबारा सांसद चुने गए। अक्टूबर 2019 में पार्टी की कमान संभालने के बाद चिराग के जीवन में कई बड़े सियासी और पारिवारिक उतार-चढ़ाव आए।

अक्टूबर 2020 में पिता राम विलास पासवान के निधन से उन्हें गहरा आघात पहुंचा, और इसके तुरंत बाद साल 2021 में पार्टी के भीतर गंभीर बगावत देखने को मिली। उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व में पार्टी के अधिकांश सांसद अलग हो गए, जिससे उनके सामने अपने राजनीतिक वजूद को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। इस मुश्किल दौर में हार न मानते हुए चिराग ने अक्टूबर 2021 में 'लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)' का गठन किया और 'बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट' के नारे के साथ जनता के बीच अपनी नई पहचान और जमीन को दोबारा मजबूत करने के लिए संघर्ष शुरू किया।

उनका यह संघर्ष और धैर्य साल 2024 के लोकसभा चुनाव में रंग लाया। जब उन्होंने अपने पिता की पारंपरिक सीट हाजीपुर से शानदार जीत हासिल की और उनकी पार्टी ने एनडीए गठबंधन के तहत शानदार प्रदर्शन किया। उनकी इस राजनीतिक वापसी और मजबूत जनाधार को देखते हुए 9 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री के रूप में शामिल किया गया।

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