आरा: पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने बीजेपी छोड़ने का संकेत दिया है। उन्होंने आरा में आयोजित राजपूत समाज के एक कार्यक्रम में मंच से सीधे भाजपा नेतृत्व पर सवाल उठाए। आरके सिंह ने समर्थकों के बीच यह संकेत दिया कि वे अब भाजपा के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने कहा कि लगातार उपेक्षा और भीतरघात की वजह से वे नए विकल्प की तलाश में हैं। यहां तक कि उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाने पर भी विचार करने की बात कही।
बीजेपी नेतृत्व पर उठाए सवाल
आरा में आयोजित राजपूत समाज के एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने मंच से सीधे भाजपा नेतृत्व पर सवाल उठाए। कार्यक्रम के दौरान आरके सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा और उसके शीर्ष नेतृत्व ने राजपूत समाज की लगातार उपेक्षा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार लोकसभा चुनाव में उन्हें जानबूझकर कमजोर किया गया। उनके अनुसार, पार्टी और गठबंधन के बड़े नेताओं ने भीतरघात कर उन्हें हराने की साजिश रची।
आरा से दो बार सांसद रह चुके हैं आरके सिंह
बता दें कि पूर्व आईएएस अधिकारी आरके सिंह आरा लोकसभा सीट से 2014 और 2019 में लगातार दो बार सांसद चुने गए थे। वे मोदी सरकार में मंत्री के तौर पर भी काम कर चुके हैं। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाकपा-माले के सुदामा प्रसाद से करीब 59,808 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। यह हार आरके सिंह और खासकर बीजेपी के लिए अप्रत्याशित थी क्योंकि आरा को पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था। हार के बाद आरके सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपनी निराशा जाहिर की और पार्टी के आंतरिक मुद्दों पर तीखे बयान दिए। इस बयान ने बीजेपी की गुटबाजी को उजागर कर दिया किया।
आरके सिंह की हार के कारण
- आरके सिंह की हार के कारणों पर गौर करें तो आतंरिक गुटबाजी और स्थानीय नेताओं का भीतरघात मुख्य वजह रही।
- आर के सिंह सिंह पर आरोप कि वे क्षेत्र से गायब रहते थे। उम्मीदवारी घोषित होने के 23 दिन बाद ही आरा पहुंचे, जिससे कार्यकर्ताओं और जनता से जुड़ाव कम हुआ।
- भोजपुरी गायक पवन सिंह के नाम पर अफवाहें फैलाई गईं, जिससे कुशवाहा और अन्य जातियों के वोट बंट गए। पासवान और यादव वोट महागठबंधन की ओर गए।
- पूर्व मंत्री और लगातार दो बार चुनाव जीतने के बाद अतिआत्मविश्वास होने के चलते प्रचार में लापरवाही। पहले राउंड की गिनती में ही पिछड़ गए।
आर के सिंह इस हार पचा नहीं पाए और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी नेताओं पर सीधे हमला बोला। वे कई बार कह चुके हैं कि भीतरघात और आंतरिक गुटबाजी के चलते उनकी हार हुई है। वे बीजेपी के टिकट पर चुनाव नहीं हारते,उन्हें हराया गया है।