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बिहार चुनाव में मोदी और नीतीश ने कैसे एंटी इंकम्बेंसी को तोड़ा, कैसे पलट गया पासा? जानें

 Written By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
 Published : Nov 15, 2025 06:21 pm IST,  Updated : Nov 15, 2025 07:32 pm IST

पिछले 20 वर्षों से बिहार की सियासत नीतीश के चेहरे पर चल रही है और ऐसे में इतने लंबे अर्से के शासन के बाद सत्ता विरोधी लहर का होना स्वाभाविक माना जाता है। लेकिन एनडीए के चुनावी शिल्पकारों ने अपनी मजबूत रणनीति से चुनावी फिजा को बदल दिया।

Nitish kumar- India TV Hindi
नीतीश कुमार Image Source : PTI

Bihar Assembly Election Results:  बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे अप्रत्याशित रहे। एनडीए की सुनामी ने महागठबंधन को झकझोर कर रख दिया है। महागठबंधन के कई बड़े नेताओं के होश उड़े हुए हैं। वे इस करारी हार के सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। क्योंकि महागठबंधन का शीर्ष नेतृत्व सत्ता विरोधी लहर(एंटी इंकम्बेंसी) की नाव पर सवार होकर चुनावी सफलता पाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उन्हें इस बात का अहसास नहीं था कि यह नाव डूबने वाली है। मोदी और नीतीश की अगुवाई में एनडीए ने एंटी इंकम्बेंसी के मिथक को तोड़ कर रख दिया। एनडीए ने विधानसभा की 243 में से 202 सीटें जीतकर चुनावी पूर्वानुमानों से काफी बेहतर प्रदर्शन किया। इस सुनामी में एनडीए की लहर ने महागठबंधन को 35 सीटों तक समेट दिया। वहीं अन्य को 6 सीटें मिली हैं। 

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एनडीए के चुनावी शिल्पकारों ने किया कमाल?

दरअसल,  पिछले 20 वर्षों से बिहार की सियासत नीतीश के चेहरे पर चल रही है और ऐसे में इतने लंबे अर्से के शासन के बाद सत्ता विरोधी लहर का होना स्वाभाविक माना जाता है। अपने चार कार्यकाल पूरी करनेवाली सरकार के लिए सत्ता में वापसी करना अक्सर मुश्किल होता है। महागठबंधन भी इसी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था लेकिन एनडीए के चुनावी शिल्पकारों ने अपनी मजबूत रणनीति से यह साबित कर दिया कि सरकार के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी नहीं थी। यह सरकार के प्रति लोगों में विश्वास का जनादेश था। 

इन योजनाओं ने बदली तस्वीर

नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले महिलाओं, बुज़ुर्गों और ग्रामीण गरीबों को ध्यान में रखकर कई योजनाएं शुरू कीं। इनमें रोजगार या घरेलू उद्योग शुरू करने के लिए महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर करना, सभी को 125 यूनिट तक मुफ़्त बिजली और वृद्धावस्था पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये करना शामिल था। महिलाओं के लिए उद्यम योजना के तहत, बिहार सरकार ने चुनाव से ठीक एक महीने पहले 1.21 करोड़ महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए। सियासी जानकारों का यह भी मानना है कि एनडीए सरकार की इस कोशिस ने चुनावी फिजा को बदलने में अहम भूमिका निभाई।

Bihar chuna result
Image Source : PTIबिहार चुनाव रिजल्ट

जनसुराज ने जमीनी मुद्दे उठाए

इस चुनाव में पहली बार उतरी प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने कुछ जमीनी मुद्दे जरूर उठाए और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की। जनसुराज ने युवाओं के मुद्दे, खासतौर से बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे उठाकर सत्ता विरोधी लहर बनाने की कोशिश की। अपनी पहली कोशिश में जनसुराज को भी कामयाबी नहीं मिल पाई। 

आरजेडी का पीछा नहीं छोड़ रहा 'जंगलराज'

वहीं महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल जैसी बड़े सियासी दल ने भी सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने की कोशिश जरूर की लेकिन एनडीए को ओर से जंगल राज की बार-बार याद दिलाई गई जिससे तेजस्वी अपनी कोशिशों में कामयाब नहीं हो पाए। वहीं महागठबंधन में तेजस्वी की सहयोगी पार्टी कांग्रेस की तो दुर्गति हो गई। पार्टी केवल 6 सीटों तक सिमट कर रह गई जबकि राहुल गांधी ने बिहार में वोट अधिकार यात्रा भी निकाली थी। राहुल गांधी लगातार वोट चोरी के आरोपों पर अपने चुनाव प्रचार के केंद्रित किए रहे।

महागठबंधन में तालमेल की कमी

इस चुनाव में महागठबंधन के सहयोगी दलों के बीच तालमेल का भी काफी अभाव दिखा, जिसका फायदा एनडीए ने उठाया। नामांकन की अंतिम तारीख तक सीटों के बंटवारे में आम सहमित नहीं बन सकी। महागठबंधन के दलों ने करीब 11 सीटों पर फेंडली फाइट की। इससे मतदाताओं के बीच अच्छा संदेश नहीं गया और इसका फायदा एनडीए को मिला। वहीं एनडीए इस मामले में काफी अनुशासित दिखा। वहां फ्रेंडली फाइट जैसी कोई स्थिति नहीं आई। गठबंधन के नेताओं के बीच बढ़िया तालमेल से जनता के बीच एक सही मैसेज गया। इन प्रयासों की झलक इस चुनाव परिणाम में स्पष्ट तौर पर नजर आ रही है।

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