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लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने फिर से बिना नाम लिए भाई तेजस्वी पर साधा निशाना, कहा- "असली कमान घुसपैठियों-साजिशकर्ताओं के हाथों में है"

 Reported By: Nitish Chandra Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Jan 25, 2026 09:35 am IST,  Updated : Jan 25, 2026 09:35 am IST

पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने भाई तेजस्वी यादव पर बिना नाम लिए हमला बोला है।

Rohini Acharya- India TV Hindi
रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर बिना नाम लिए भाई तेजस्वी पर साधा निशाना Image Source : ROHINI ACHARYA/TEJASHWI YADAV-X

पटना: आरजेडी प्रमुख और पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सुर्खियां बटोरी हैं। रोहिणी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके एक बार फिर अपने भाई और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर बिना नाम लिए हमला बोला है।

रोहिणी ने अपने पोस्ट में क्या लिखा?

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "जो सही मायनों में लालूवादी होगा, जिस किसी ने भी लालू जी के द्वारा, हाशिए पर खड़ी आबादी - वंचितों के हितों के लिए मजबूती से लड़ने वाली, खड़ी की गयी पार्टी के लिए निःस्वार्थ भाव से संघर्ष किया होगा, जिस किसी को भी लालू जी के द्वारा सामाजिक - आर्थिक न्याय के लिए किए गए सतत संघर्ष एवं प्रयासों का गौरवबोध होगा, जिसे लालू जी की राजनीतिक विरासत व  विचारधारा को गर्व के साथ आगे ले जाने की परवाह होगी, वो अवश्य ही पार्टी की मौजूदा बदहाली के लिए जिम्मेवार लोगों से सवाल करेगा एवं ऐसे लोगों की संदिग्ध - संदेहास्पद भूमिका के खिलाफ अंजाम की परवाह किए बिना अपनी आवाज उठाएगा।"

रोहिणी ने लिखा, "वर्तमान की कड़वी, चिंताजनक एवं दुःखद सच्चाई यही है कि आज जनता के हक-हकूक की लड़ाई लड़ने के लिए जानी जाने वाली, जन-जन की पार्टी की असली कमान फासीवादी विरोधियों के द्वारा भेजे गए वैसे घुसपैठियों-साजिशकर्ताओं के हाथों में है, जिन्हें लालूवाद को तहस-नहस करने के टास्क के साथ भेजा गया है। कब्जा जमाए बैठे ऐसे लोग अपने गंदे मकसद में काफी हद तक सफल होते भी दिखते हैं।" 

रोहिणी ने लिखा, "नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रहे को सवालों से भागने, सवालों से बचने, जवाब देने से मुंह चुराने, तार्किक-तथ्यात्मक जवाब देने की बजाए भ्रम फैलाने, लालूवाद व पार्टी की हित की बात करने वालों के साथ दुर्व्यवहार, अभद्र आचरण, अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने की बजाए अपने गिरेबान में झांकना होगा और अगर वो चुप्पी साधता है, तो उस पर साजिश करने वाले गिरोह के साथ मिलीभगत का दोष व आरोप स्वतः ही साबित होता है।"

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