बिहार के मोतिहारी के चकिया के राम जानकी नगर स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में तालाब के किनारे महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को हर-हर महादेव के नारे के बीच सहस्रशिवलिंग की स्थापना के साथ प्राण-प्रतिष्ठा हो गई।
विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग का छोटा रूप
यह विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग (33 फीट) का छोटा रूप होगा। इसके लिए महाबलीपुरम् से छोटे आकार में अरघा के साथ एक दूसरा शिवलिंग और नन्दी की मूर्ति आ चुकी है। इस शिवलिंग का भी निर्माण उसी पत्थर से हुआ है। इसमें भी 72 लिंगों से युक्त 14 वृत्तों में 1008 शिवलिंग हैं। इसकी स्थापना ‘सहस्र शिवलिंग मण्डपम्’ में की जाएगी। इस शिवलिंग पर सभी लोग पूजा कर सकेंगे और जल चढ़ा सकेंगे।
श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के मुताबिक, छोटे शिवलिंग की व्यवस्था इसलिए की गई है कि अभी विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य के दौरान बड़े शिवलिंग की पूजा नहीं जा सकती है और प्रतिदिन लोग यहां शिवलिंग की पूजा करने के लिए आ रहे हैं, इसलिए अब आने वाले भक्त छोटे शिवलिंग (बड़े शिवलिंग के छोटे रूप) की पूजा कर सकेंगे। भक्तों को पूजा करने में सहुलियत हो जाएगी। छोटे शिवलिंग स्थापना की पूजा शनिवार से शुरू हो गई थी।
विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य
स्थापना पूजा में यजमान जमीनदाता साधु तिवारी बने। विराट रामायण मंदिर के प्रांगण में स्थित तालाब के किनारे मंडप में शिवलिंग की स्थापना की गई है। मंदिर का निर्माण 2030 तक हो जाएगा। यहां एक पुजारी की नियुक्ति की गई है, जो नियमित रूप से यहां पूजा-पाठ करेंगे। श्रद्धालुओं के लिए रुद्राभिषेक की भी व्यवस्था मंदिर की ओर से की जाएगी। निकट भविष्य में तालाब का सौन्दर्यीकरण होगा। इस पूरे परिसर को ‘शिवसागर क्षेत्र’ नाम दिया गया है। इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण पेड़-पौधे से सुसज्जित कर आश्रम का रूप दिया जा रहा है। यहां लोग अपने बच्चों का मुंडन भी करा सकेंगे। मंदिर में जल चढ़ाने के लिए कुआं बनाने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, यहां महावीर मंदिर की ओर से नैवेद्यम लड्डू का काउंटर खुलेगा।
जल चढ़ाने से मिलेंगे 1072 देवी-देवताओं के आशीर्वाद
इसके साथ, ज्योतिष-सलाह, धर्म-ग्रंथ की उपलब्धता के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस स्थापना में शास्त्रीय विधि का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। इसकी व्यवस्था में लगे मंदिर के शोध-अधिकारी पंडित भवनाथ झा ने बताया कि महावीर मंदिर में हमेशा से शास्त्रीय सिद्धांतों का पालन होता रहा है। पद्मश्री आचार्य किशोर कुणाल भी स्वयं शास्त्रों पर हमेशा शोध करते रहते थे और उसका पालन करते थे। वैसे भी यह आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। पंडित झा ने बताया कि यहां चूंकि सहस्र शिवलिंग की स्थापना हो रही है, इसलिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्राचीन काल में शिवलिंग की स्थापना में जो विधि अपनाई जाती थी, वह विधि आज प्रचलन में नहीं हैं। इसे हस्तलिखित पाण्डुलिपियों से खोज कर उसके आधार पर स्थापना की जाएगी। इस शिवलिंग पर जल चढ़ाने से कुल 1072 देवी-देवताओं की आराधना का फल एक साथ मिलेगा।
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