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पटना टेंडर घोटाला: IAS योगेश कुमार और अभिलाषा शर्मा सस्पेंड, ठेकेदार के खर्चे पर गए थे विदेश

 Reported By: Nitish Chandra, Edited By: Shakti Singh
 Published : May 30, 2026 04:23 pm IST,  Updated : May 30, 2026 04:24 pm IST

ठेकेदार रिशुश्री ने दोनों आईएएस अधिकारियों को अपने खर्चे पर विदेश यात्रा कराई थी। वह अधिकारियों को मनचाही पोस्टिंग भी दिलवाता था। घोटाले के पैसे से उसने करोड़ों की जमीन खरीदी है।

Patna Scam- India TV Hindi
पटना टेंडर घोटाला Image Source : INDIA TV

टेंडर घोटाला मामले में बिहार सरकार ने 2017 बैच के आईएएस योगेश कुमार सागर और 2014 बैच की आईएएस अभिलाषा शर्मा को सस्पेंड कर दिया है। इससे पहले पटना में ठेकेदार रिशुश्री को स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने गिरफ्तार कर बेउर जेल भेजा था। दोनों पर ठेकेदार रिशुश्री से निजी लाभ लेने का आरोप है। रिशु ने टेंडर मैनेज करने के लिए दोनों आईएएस अधिकारियों की विदेश यात्रा का खर्च भी उठाया था।

2017 बैच के आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर समाज कल्याण विभाग में तैनात थे। योगेश मूल रूप से यूपी के बरेली के हैं। 2012 में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से उन्होने एमबीबीएस किया था।

ठेकेदार के पैसे पर विदेश घूमा था पूरा परिवार

रिशुश्री ने योगेश कुमार सागर और उनके परिवार के 8 लोगों को यूरोप की यात्रा कराई थी। 22 जून 2024 से 30 जून 2024 तक हुई इस यात्रा में योगेश और उनके परिवार के 8 लोग ऑस्ट्रिया के वियाना, साल्जबर्ग और वॉल्फगैंग शहर घूमे और वहां आलीशान होटलों में ठहरे। पूरी यात्रा पर 21.92 लाख रुपए खर्च हुए जिसके पैसे रिशुश्री ने दिए। 

9 लाख रुपये में बनवाया रूफटॉप गार्डेन

अभिलाषा शर्मा बिहार में सीतामढ़ी में डीएम समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं है, बाद में उन्होंने वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के तौर पर काम किया। वर्तमान में वे ग्रामीण विकास विभाग में अतिरिक्त सीईओ और डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात थी। रिशु ने अभिलाषा शर्मा पर भी करीब 29 लाख रूपये खर्च किये। विदेश यात्रा के आलावा अभिलाषा शर्मा के घर पर रूफ टॉप गार्डेन तैयार करने पर 9 लाख खर्च किए। 

अधिकारियों की मनचाही पोस्टिंग करवाता था रिशु

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि रिशु श्री बड़ी कंपनियों को बिहार में ठेका दिलाने के बदले उनसे टेंडर वैल्यू का 5 से 7 प्रतिशत तक कमीशन लेता था। इसमें से 2 से 3.5 प्रतिशत हिस्सा वह उन को देता था, जो फाइलें आगे बढ़ाते थे। रिशु के डिजिटल डिवाइस से मिली एक्सेल शीट में घूस की रकम को 'डिपार्टमेंटल एकस्पेंस' के नाम से दर्ज किया गया था। वह अधिकारियों की मनचाही पोस्टिंग भी करवाता था। बदले में उसे टेंडर की गोपनीय जानकारी पहले ही मिल जाती थी। फिर कंपनियों के हिसाब से टेंडर की शर्तों को बदलवा देता था। 

घोटाले के पैसे से खरीदी करोड़ों की जमीन

ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी को सीतामढ़ी में नगर आयुक्त बनवाने के लिए रिशु ने ऊपर के अधिकारियों को 25 लाख दिए थे। उसने आईएएस आनंद किशोर के माध्यम से तबादले और पोस्टिंग करवाई। ईडी की जांच में आईएएस संतोष कुमार मल्ल का भी नाम आया है। रिशुश्री के इनसे भी करीबी संबंध थे। पैसा सीधे रिशु के पास नहीं आता था। रिशु ने 'साई आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन', 'रिलायबल इंफ्रा' और 'नेस्टबिल्ड जैसी कई शेल कंपनियां बना रखी थीं। इन कंपनियों में उसके भाई चिन्मय प्रिया और शुभम श्री डायरेक्टर थे। कमीशन का पैसा इन खातों से होते हुए रिशु तक पहुंचता था, जिससे उसने पटना के मीठापुर और बाईपास जैसे इलाकों में करोड़ों की जमीनें खरीदी।

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