पटना: बिहार में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सनसनीखेज दावा किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की साजिश करार देते हुए कहा कि अगर उनका नाम लिस्ट में नहीं है, तो वे चुनाव कैसे लड़ेंगे? उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका EPIC नंबर बदल गया है। लेकिन तेजस्वी का यह ‘एटम बम’ फुस्स हो गया, क्योंकि चुनाव आयोग ने तुरंत सबूत पेश कर उनके दावों की हवा निकाल दी।
Related Stories
‘मेरा नाम ही वोटर लिस्ट में नहीं’
तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'चुनाव आयोग का ऐप है, उसमें मेरा EPIC नंबर डाला, लेकिन मेरा नाम नहीं मिला। जब मेरा नाम नहीं है, तो बिहार के करोड़ों लोग जो बाहर रहते हैं, वे कैसे चेक करेंगे? क्या गरीब-मजदूर रोजी-रोटी छोड़कर वोटर लिस्ट में नाम ढूंढने जाएंगे?' उन्होंने आगे दावा किया कि 65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिसे उन्होंने लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दिया। तेजस्वी ने कहा, 'नाम कटने से न राशन मिलेगा, न पेंशन, न सरकारी सुविधाएं। यह गरीबों और कमजोर वर्गों को हाशिए पर धकेलने की कोशिश है।'
चुनाव आयोग ने आरोपों पर दिया जवाब
चुनाव आयोग ने तेजस्वी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने दीघा विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट जारी की, जिसमें तेजस्वी प्रसाद यादव का नाम, फोटो, पिता लालू यादव का नाम, मकान नंबर 110, उम्र 36 साल और सीरियल नंबर 416 दर्ज है। आयोग ने बताया कि तेजस्वी का EPIC नंबर RAB0456228 है, जिसे उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में नामांकन के दौरान भी इस्तेमाल किया था। पटना के जिलाधिकारी डॉ. थियागराजन ने स्पष्ट किया, '2020 में तेजस्वी द्वारा दाखिल एफिडेविट में यही EPIC नंबर (RAB0456228) दर्ज है। यह नंबर अभी भी वैध है।'
'RJD के किसी BLA ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई'
थियागराजन ने आगे कहा, 'अगर तेजस्वी किसी अन्य EPIC नंबर का जिक्र कर रहे हैं, तो उसे जांचना होगा।' तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस EPIC नंबर (RAB2916120) का हवाला दिया, वह गलत निकला। आयोग ने कहा कि EPIC नंबर तभी बदलता है, जब कोई व्यक्ति अपना नाम किसी अन्य राज्य की वोटर लिस्ट में जुड़वाता है, लेकिन तेजस्वी का मामला ऐसा नहीं है। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि वोटर SIR के अनुसार दावे और आपत्ति 1 सितंबर तक दर्ज करा सकते हैं। आयोग ने कहा कि तेजस्वी अपनी पार्टी के BLA से आपत्ति दर्ज कराने को कहें, अब तक RJD के किसी भी BLA ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।
65 लाख लोगों के नाम कटने का सच
तेजस्वी ने दावा किया कि बिहार में 65 लाख 64 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, खासकर यादव और मुस्लिम समुदाय के। उन्होंने इसे जेडीयू-बीजेपी सरकार की साजिश बताया। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि यह सफाई अभियान का हिस्सा है। पिछले 22 साल में 22 लाख वोटरों की मृत्यु हो चुकी है, 36 लाख लोग बिहार से स्थायी रूप से पलायन कर गए, और 7 लाख लोगों के नाम एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज थे। इन कारणों से ड्राफ्ट लिस्ट में नाम हटाए गए।
रीजन और सीटों पर वोटर घटने का आंकड़ा
आंकड़ों से पता चलता है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने का पैटर्न सभी क्षेत्रों में एकसमान है। सीमांचल में, जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, 9.8% वोटर कम हुए। कोसी में, जहां यादव वोटर ज्यादा हैं, 8% नाम कटे। भोजपुर में, जहां सवर्ण आबादी है, 8.54% और मगध में, जहां पिछड़ी जातियां हैं, 6.98% वोटर कम हुए। किशनगंज में 49,340, बहादुरगंज में 36,574 और ठाकुरगंज में 29,277 वोटर कम हुए, जहां क्रमशः कांग्रेस, ओवैसी की पार्टी और RJD जीती थी। वहीं, बीजेपी की मोतिहारी सीट पर 54,420 और गोपालगंज में 66,042 वोटर कम हुए। इससे साफ है कि नाम कटने की प्रक्रिया में किसी खास समुदाय या पार्टी को निशाना नहीं बनाया गया।
सियासी बयानबाजी और जवाब
पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा एवं सम्राट चौधरी ने तेजस्वी के आरोपों को बेबुनियाद बताया। वहीं, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए, लेकिन आंकड़े उनके दावों का समर्थन नहीं करते। चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में गलती सुधार के लिए एक महीने का समय दिया गया है। अगर किसी का नाम गलती से कट गया है, तो वे इसे जुड़वा सकते हैं। इस तरह देखा जाए तो तेजस्वी यादव के ‘वोटर लिस्ट से नाम कटने’ के दावे को चुनाव आयोग ने तथ्यों के साथ मजबूती से खारिज कर दिया।