चेन्नई: देश के शेयर बाजार नियामक को 15 मई से लागू नए इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के कुछ प्रावधानों को स्पष्ट करने की जरूरत है, जैसे कि क्या एंप्लाई स्टॉक ऑप्शंस (ईएसओपी) भी इसके दायरे में आएगा।
कंपनियों के अनुपालन अधिकारियों ने बताया कि नए नियमों से उनके लिए कठिनाई थोड़ी बढ़ गई है, क्योंकि पत्रकार, वेंडर और बैंकर जैसे कई अन्य बाहरी पक्षों को भी 'इनसाइडर' की परिभाषा के दायरे में शामिल कर दिया गया है।
इंटेलेक्ट डिजाइन एरीना लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी एस. स्वामीनाथन ने आईएएनएस से कहा, "इनसाइडर ट्रेडिंग के पुराने नियमों में ईएसओपी को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है, जबकि नए नियमों की व्याख्या करने पर ऐसा नहीं कहा जा सकता है। ईएसओपी योजना प्राय: सुपरिभाषित होती है और यह खरीदने का एक विकल्प होता है।"
उन्होंने कहा, "यह भी कहा जा सकता है कि कंपनी प्रशासन में सुधार के लिए उठाया गया हर कदम सराहनीय होना चाहिए।"
निशीथ देसाई एसोसिएट्स की साझेदार और नियामकीय गतिविधि खंड की प्रतिभा जैन ने आईएएनएस से कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस बात को ध्यान में रखकर नियमों बदलाव किया है ताकि हर पक्ष को अवसरों की समानता हासिल हो और निवेशकों के हित की रक्षा हो।
उन्होंने भी इस बात सहमति जताई कि ईएसओपी पर सेबी को स्पष्टीकरण देना चाहिए। उनकी एक सहयोगी तान्या पाहवा के मुताबिक 1992 के इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों में ईएसओपी को दायरे से बाहर रखा गया था।
नए नियमों में इनसाइडर यानी, संपर्क वाले व्यक्ति शब्द का दायरा बढ़ाया गया है।
जैन ने कहा, "इसलिए किसी भी व्यक्ति से यदि शेयर मूल्यों को प्रभावित करने वाली अप्रकाशित सूचना की जानकारी होने की उम्मीद की जाती है, चाहे वह कंपनी से संबद्ध हो या नहीं, तो वह नियमों के दायरे में आ जाएगा।"
नए नियम 'भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (इनसाइडर ट्रेडिंग निवारण) नियम-2015' में इनसाइडर या संपर्क वाले व्यक्तियों में हर ऐसे व्यक्ति को रखा गया है, जिसके पास शेयर मूल्य को प्रभावित करने वाली अप्रकाशित सूचना हो सकती है।
संपर्क वाले व्यक्ति में ऐसा हर व्यक्ति शामिल है, जो कंपनी की किसी विशेष गतिविधि के छह महीने पहले तक किसी भी प्रकार से कंपनी के संपर्क में रहा हो या निदेशक, अधिकारी, वेंडर तथा अन्य के रूप में कंपनी की संवेदनशील अप्रकाशित सूचना रख सकता हो।
इसके दायरे में निकट संबंधी, होल्डिंग/सहायक या सहयोगी कंपनी, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार या क्लियरिंग हाउस के अधिकारी, बैंकर तथा अन्य हो सकते हैं।
स्वामीनाथन के मुताबिक, एक बड़े समुदाय को इनसाइडर में शामिल किया गया है और सूचीबद्ध कंपनी के लिए उनसे अनुपालन घोषणा हासिल कर पाना एक चुनौती होगी।
उन्होंने कहा, "संभव है कि सेबी इसके लिए कोई निश्चित राशि की सीमा तय करे।"
जैन ने कहा कि हर सूचीबद्ध कंपनी के निदेशक मंडल और बाजार में हस्तक्षेप करने वाले संगठनों (मार्केट इंटरमीडियरीज) को अपने कर्मचारियों तथा अन्य संपर्क वाले व्यक्तियों के ट्रेडिंग को नियमित करने, उस पर नजर रखने तथा उसकी रिपोर्टिग करने के लिए नियम के मुताबिक एक आचार संहिता बनानी होगी।
जैन ने कहा कि नियमों के मुताबिक, लेखापरीक्षकों, लेखापरीक्षण कंपनियों, कानून कंपनियों, विश्लेषकों, सलाहकारों और पूंजीबाजार के प्रतिभागियों तथा अन्य को भी आचार संहिता बनानी होगी।
पूंजी बाजार से बाहर के संगठनों को भी संवेदनशील सूचनाओं की जानकारी के स्तर के अनुरूप आचार संहिता बनानी होगी।
जैन ने कहा कि साथ ही आचार संहिता बनाने वाले हर पक्ष को एक अनुपालन अधिकारी भी निश्चित करना होगा।
उन्होंने कहा, "(नियमों के तहत इनसाइडर या संपर्क वाले व्यक्ति के लिए) ट्रेडिंग विंडो बंद रहने पर शेयरों में ट्रेडिंग की अनुमति नहीं होगी। साथ ही 10 लाख रुपये से अधिक की ट्रेडिंग पर ट्रेडिंग विंडो खुली रहने पर भी पहले से अनुमति लेनी होगी।"
प्राइम डाटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने आईएएनएस से कहा, "नए नियमों में दायरा बढ़ाए जाने के कारण निगरानी पर काफी अधिक निवेश करना होगा। विश्वस्तर पर भी इनसाइडर ट्रेडिंग को पकड़ पाना आसान नहीं होता है। इसलिए इस मामले में ऐसे दंड होने चाहिए, जिससे सभी को सबक मिले।"
जैन ने बताया कि सेबी की एक जांच इकाई होती है, जो इस तरह की गतिविधि पर नजर रखती है।
उन्होंने कहा, "सेबी अधिनियम में हाल में हुए संशोधन के आधार पर उसके पास छापा मारने और जब्ती का भी अधिकार होगा। सेबी आम तौर पर किसी से सूचना मिलने पर या शेयर बाजार द्वारा किसी शेयर में असामान्य गतिविधि की जानकारी दिए जाने पर इनसाइडर ट्रेडिंग के तहत जांच करता है।"