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महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों को मिली बड़ी राहत, मराठी सीखने के लिए सरकार ने दी 1 साल की मोहलत

 Reported By: Sachin Chaudhary Written By: Subhash Kumar
 Published : Aug 27, 2026 05:12 pm IST,  Updated : Aug 27, 2026 05:36 pm IST

महाराष्ट्र में रिक्शा चालकों और टैक्सी चालकों को बड़ी राहत मिल गई है। मराठी सीखने के लिए सरकार ने ड्राइवरों को 1 साल की मोहलत दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद इस बात की जानकारी दी है।

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महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-टैक्सी चालकों को दी राहत। Image Source : PTI

महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने को लेकर कई दिनों से विवाद मचा हुआ है। अब महाराष्ट्र सरकार ने इस मुद्दे को लेकर बड़ा फैसला किया है और रिक्शा और टैक्सी चालकों को बड़ी राहत दे दी है। सरकार ने रिक्शा और टैक्सी चालकों को बोलचाल की मराठी सीखने के लिए एक साल की मोहलत दी गई है। आइए जानते हैं कि इस फैसले के बारे में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने क्या जानकारी दी है।

CM फडणवीस से मिले थे संस्थाओं के प्रमुख

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि रिक्शा-टैक्सी चालक संस्थाओं के प्रमुख उनसे मिले थे। उन्होंने चालकों की ओर से मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय मांगा था। उनकी मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने एक साल की मोहलत देने का फैसला किया है। एक साल तक सरकार मराठी ना आने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

बता दें कि मराठी सीखने को लेकर हो रहे विवाद पर इससे पहले भी CM फडणवीस का बयान सामने आया था। उन्होंने साफ किया था कि सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी। सीएम फडणवीस ने कहा था कि चालकों को मराठी का विशेषज्ञ बनाने का कोई कारण नहीं है। उन्हें कामकाज से संबंधित बुनियादी मराठी आनी चाहिए।

रिक्शा-टैक्सी चालकों ने किया मराठी का समर्थन- CM

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि "रिक्शा-टैक्सी चालकों ने इस बात का समर्थन किया है कि मुंबई में काम चलाऊ मराठी उनको सीखनी चाहिए, वो इसे सीखना भी चाहते हैं, इसके लिए उनका पूरा समर्थन है। लेकिन उन्होंने इसके साथ ये भी कहा कि अलग-अलग उम्र के लोग इस व्यवसाय में हैं। कई लोगों ने बहुत पहले पढ़ाई छोड़ दी थी। इसलिए इतने कम समय में मराठी सीखना उनके लिए कठिन है। उन्होंने कामचलाऊ मराठी सीखाने के लिए बहुत वृहद प्लान तैयार किया है। उन्होंने ये मांग की है कि इसके लिए उन्हें 1 साल का समय दिया जाए। राज्य सरकार ने उनकी बात को माना है और उन्हें एक साल का समय दिया जा रहा है। 1 साल तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस दौरान उनकी मदद की जाएगी, अलग-अलग तरह से कक्षाएं तैयार कर के, साहित्य तैयार कर के उन्हें मराठी सीखाने का काम किया जाएगा।

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