छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से एक ऐसा शिक्षक सामने आया है, जो अपने समर्पण और सेवा भावना से समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बोड़ला में पदस्थ शिक्षक पूनाराम पनागर न केवल बच्चों को पढ़ाते हैं, बल्कि उनके बाल भी निःशुल्क काटते हैं। उनकी इस अनूठी पहल के चलते लोग उन्हें प्यार से "सेलून वाले गुरुजी" के नाम से जानते हैं।
पूनाराम पनागर ने यह पहल वर्ष 2012 में की थी, जब वे महलीघाट गांव के प्राथमिक शाला में पदस्थ थे। दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र में सैलून की सुविधा न होने के कारण बच्चों के बाल काफी बढ़ जाते थे। यह देखकर उन्होंने खुद बच्चों के बाल काटना शुरू किया। स्थानांतरण के बाद बोड़ला में भी उन्होंने इस सेवा को जारी रखा।
15 साल से दे रहे मुफ्त कोचिंग
हर महीने एक रविवार को वे एससी-एसटी हॉस्टल में रह रहे गरीब बच्चों के बाल अपने हाथों से काटते हैं। बदले में वे बच्चों से केवल यह आग्रह करते हैं कि बाल कटवाने में जो पैसे बचते हैं, उससे किताबें और कॉपियां खरीद लें। इतना ही नहीं, पूनाराम पिछले 15 वर्षों से पहली से दसवीं तक के छात्रों को स्कूल समय के अतिरिक्त निःशुल्क कोचिंग भी दे रहे हैं। वे हर वर्ष पर्चा छपवाकर ग्रामीणों से अपील करते हैं कि अपने बच्चों का नामांकन निजी स्कूलों के बजाय सरकारी स्कूलों में कराएं।
विद्यार्थी, शिक्षक सब करते हैं तारीफ
पूनाराम पनागर की इस निःस्वार्थ सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण की सराहना न सिर्फ उनके विद्यार्थी करते हैं, बल्कि अभिभावक और अन्य शिक्षक भी उन्हें समाज सेवा की मिसाल मानते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर एक शिक्षक सच्चे मन से चाहे तो शिक्षा के जरिए समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
(कवर्धा से सिकंदर खान की रिपोर्ट)