दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में वायु प्रदूषण को कम करने को लेकर रिव्यु मीटिंग ली। इस बैठक में दिल्ली सरकार के मंत्री, मुख्य सचिव, डीडीए, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, पर्यावरण विभाग, उद्योग और परिवहन विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी विभाग प्रमुखों से कहा कि प्रदूषण से लड़ने के लिए जो ब्लू प्रिंट तैयार किए गए हैं, उसको समयबद्ध तरीके पूरा किया जाय।
केंद्र सरकार का मिल रहा सहयोग
इस मीटिंग में रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 12 महीने, 7 दिन काम करेगी। इसके लिए अल्प व दीर्घकालीन विस्तृत योजनाएं बनाई गई है। प्रदूषण के खिलाफ इस लड़ाई में केंद्र सरकार का मार्गदर्शन व सहयोग भी मिल रहा है, इसलिए वायु प्रदूषण की चुनौती से निर्णायक रूप से निपटने के लिए व्यापक व समयबद्ध योजना पर कार्य चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार चार सालों में वायु प्रदूषण (PM 2.5) के स्तर में कमी लाने के लिए एक कार्य योजना पर कार्य कर रही है, जिसमें सरकार के सभी विभागों के कार्य शामिल हैं।
ट्रांसपोर्ट विभाग
दिल्ली में 14,000 बसें लाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का प्लान है कि अपने बस बेड़े को 31 दिसंबर 2026 तक 6,000, 31 दिसंबर 2027 तक 7,500, 31 मार्च 2028 तक 10,400 और 31 मार्च 2029 तक 14,000 बस दिल्ली की सड़कों पर चले।
इन 14,000 बसों में 500 बसें 7 मीटर लंबाई हैं, जो ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ को मजबूत करने के लिए तैनात की जाएंगी। इन बसों को दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए वर्तमान में 100 इलेक्ट्रिक मेट्रो फीडर बसें चलाई जा रही है। वहीं, 31 जनवरी 2026 तक 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ई-ऑटो, बाइक टैक्सी और फीडर कैब के पायलट प्रोजेस्ट को शुरू करने तैयारी है।
ईवी पॉलिसी 2.0: में दोपहिया और कमर्शियल वाहनों पर जोर
- नई इलेक्ट्रिक पालिसी में दिल्ली के 58 लाख दोपहिया वाहनों को टारगेट किया गया है। दो पहिया वाहन मालिकों को सब्सिडी और स्क्रैपिंग प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
- पब्लिक चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स की संख्या को मौजूदा 9,000 से बढ़ाकर 36,000 करने का लक्ष्य रखा गया है। कमर्शियल ट्रकों और तिपहिया वाहनों के लिए ब्याज सबवेंशन और केंद्र की ‘पीएम ई-ड्राइव’ योजना का लाभ लिया जा रहा है।
- 62 भीड़भाड़ वाले ‘कंजेशन पॉइंट्स’ की पहचान की गई है, जिनमें से 30 पर सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। ट्रैफिक व्यव्स्था को सुदृढ़ करने के लिए दिल्ली सरकार ने डीटीसी से 1,200 अतिरिक्त कर्मी ट्रैफिक पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।
- वर्तमान में दिल्ली मेट्रो का 395 किमी का नेटवर्क है। जिसे बढ़कर 500 KM करने की योजना है। मेट्रो में प्रतिदिन 30 से 35 लाख लोग सफर करते हैं। फेज-4 के पूरा होने से यात्रियों की संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही अगले चार सालों में एनसीआरटीसी (NCRTC) का कुल नेटवर्क 323 किमी तक पहुंचाया जाएगा।
- दिल्ली सरकार ने सड़क सुधार कार्यों के लिए 6,000 करोड़ का बजट रखा है। दिल्ली मे 3,300 किमी सड़क को फिर से बनाने या सुधारने की आवश्यकता है। इस 3,300 किमी में पीडब्ल्यूडी की 800 किमी सड़कें, नगर निगम की 1,200 किमी सड़कें और अनधिकृत कॉलोनियों की 1,000 किमी सड़कें शामिल हैं। योजना के तहत सड़कों के किनारों और सेंट्रल वर्ज (बीच का हिस्सा) का पूर्ण पक्कीकरण (paving) और हरियाली शामिल होगी। बार-बार सड़क काटने से रोकने के लिए भूमिगत यूटिलिटी डक्ट्स का प्रावधान भी किया जाएगा। इस कार्य को पूरा करने के लिए एक साल का वक्त का रखा गया है।
मशीनों और स्प्रिंकलर का हो रहा उपयोग
सड़कों से धूल और मलबे को हटाने के लिए मशीनों और स्प्रिंकलर का उपयोग किया जा रहा है। अभी एमसीडी, एनडीएमसी, डीएसआईआईडीसी और एनएचएआई सहित तमाम एजेंसियों द्वारा 76 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें (MRSM) तैनात की गई हैं। 31 जनवरी, 2026 तक एमसीडी द्वारा 14 और मशीन तैनात की जाएंगी। 60 फीट से कम चौड़ी सड़कों के लिए दिल्ली सरकार द्वारा 70 अतिरिक्त एमआरएसएम मशीनों की तैनाती को मंजूरी दी गई है।
दो और योजना लागू कर रही PWD
इनके अलावा सरकार पीडब्ल्यूडी की सड़कों के लिए दो और योजना लागू कर रही है। PWD की सड़कों पर 70 एमआरएसएम मशीनों के साथ-साथ 140 लिटर पिकर, डस्ट डंपर और वॉटर टैंकर तैनात करेगी। इसपर दिल्ली सरकार 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसी तरह प्रमुख सड़कों पर धूल ना उड़े उसके के लिए पूरे शहर में 250 वॉटर स्प्रिंकलर-कम-एंटी-डस्ट मशीनों को तैनात किया जाएगा। इस योजना की लागत भी 2000 करोड़ है।
दिल्ली नगर निगम लैंडफिल साइटों की सफाई की रूपरेखा तैयार की गई है। कूड़े के पहाड़ को खत्म करने की समय सीमा भी तय की गई है।
- ओखला लैंडफिल: जुलाई 2026 तक
- भलस्वा लैंडफिल: अक्टूबर 2026 तक
- गाजीपुर लैंडफिल दिसंबर 2027 तक
दिल्ली सरकार ने कचरा प्रबंधन के लिए एमसीडी को इस वित्त वर्ष में 500 करोड़ रुपये और भविष्य में 300 करोड़ रुपये सालाना देने की घोषणा भी की है।
औद्योगिक प्रदूषण से मुक्ति
आब तक 1,000 से अधिक प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को सील किया गया है। बड़े उद्योगों को रीयल-टाइम प्रदूषण निगरानी के लिए ‘ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम’ (OCEMS) लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
35 लाख नए पौधे और रिज का पुनरुद्धार
- अगले 4 साल में ‘दिल्ली रिज’ क्षेत्र में 35 लाख पेड़ लगाए जाएंगे, जिनमें से 14 लाख पेड़ इसी साल लगाए जाने का लक्ष्य है। इसके अलावा 365 एकड़ ‘ब्राउन पार्क’ क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा।
- बायोमास और कंस्ट्रशन वेस्ट से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए तेहखंड में नया प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया जा रहा है।
- सर्दियों में लोगों द्वारा कचरा जलाने से रोकने के लिए 15,500 इलेक्ट्रिक हीटर बांटे जा रहे हैं ताकि लोगों को हीटिंग के लिए बायोमास न जलाना पड़े।
स्मार्ट पार्किंग प्रबंधन
दिल्ली सरकार का मानना है कि मौजूदा पार्किंग सुविधाएं अपर्याप्त हैं। जीरो पार्किंग जोन और निर्धारित सड़क किनारे पार्किंग नियमों में बदलाव की जरूरत है। इसके लिए पार्किंग स्पेस बढ़ाने की योजना बनाई गई है। जिससे स्मार्ट प्राइसिंग व्यवस्था लागू की जा सके। भीड़भाड़ वाले इलाकों में निजी वाहनों काम उपयोग हो सके इसकी योजना बनाई जा रही है। भीड़भाड़ और बाजार के इलाकों में मल्टी-लेवल पार्किंग बढ़ाई जाएगी।
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त निगरानी और ANPR प्रणाली
परादूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का फैसला लिया गया है। इसके लिए एक अभियान शुरू किया जाएगा। साथ ही, दिल्ली की एंट्री पॉइंट्स पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) सिस्टम लगाए जा रहे हैं। ताकि नियमों का पालन न करने वाली गाड़ियों की पहचान कर उनके खिलाफ करवाई की जा सके।