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NEET री-एग्जाम में कथित गड़बड़ियों की जांच वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार, दिल्ली HC ने बताया कारण

 Reported By: Atul Bhatia Written By: Vinay Trivedi
 Published : Aug 19, 2026 05:44 pm IST,  Updated : Aug 19, 2026 06:18 pm IST

NEET-UG री-एग्जाम में कथित गड़बड़ियों की पड़ताल और NTA को खत्म करने की डिमांड वाली याचिका पर सुनवाई करने से दिल्ली हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। जानें हाईकोर्ट ने इसकी क्या वजह बताई है।

Delhi High Court NEET UG re-exam- India TV Hindi
NEET-UG री-एग्जाम में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से दिल्ली HC का इनकार। Image Source : ANI (प्रतीकात्मक फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-UG री-एग्जाम में कथित गड़बड़ियों की जांच और NTA को खत्म करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में व्यक्तिगत राहत और सभी अभ्यर्थियों से जुड़ी राहत की मांग को मिलाया गया है।

केंद्र ने किया आरोपों को खंडन

हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता। याचिका को पहले दूसरी अदालत से ट्रांसफर किए जाने के बाद जनहित याचिका के तौर पर लिया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार और NTA की ओर से आरोपों का खंडन किया।

OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोपों को बताया गलत

केंद्र सरकार ने NEET री-एग्जाम में किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता से इनकार किया। केंद्र ने OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोपों को भी गलत बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी उठाए गए कदमों की जानकारी

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने नीट में सुधारों को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए आज (बुधवार को) केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उसे राधाकृष्णन कमेटी और नंदन नीलेकणि कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दे।

एनटीए में किए जाने वाले सुधारों को संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए और एंट्रेंस एग्जाम का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए बदलाव किए जाने की आवश्यकता है: सुप्रीम कोर्ट

राधाकृष्णन कमेटी क्या है?

गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक होने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने और एनटीए की संरचना व कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सिफारिशें देने के लिए 7 सदस्यों वाली राधाकृष्णन कमेटी का गठन किया था। इससे पहले, NEET पेपर लीक मामले के आरोपी डॉ. मनोज शिरूरे की जमानत को कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

संरचनात्मक सुधारों के लिए Task Force का भी गठन

इसके अलावा, केंद्र सरकार ने नीट एग्जाम में संरचनात्मक सुधारों के लिए Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की लीडरशिप में एक High-Powered Task Force का भी गठन किया था। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की बेंच ने कहा, 'राधाकृष्णन कमेटी ने सही कहा है कि यह एक सिस्टमेटिक प्रॉब्लम है, जिसे संस्थागत रूप देने की आवश्यकता है और यही इसका सबसे अहम भाग है। कागज पर यह प्रक्रिया पूरी तरह से अच्छी दिखती है। लेकिन जब एक एग्जाम होने के बाद अगला एग्जाम होता है तब तक परिस्थितियां पूरी तरह से बदल जाती हैं।'

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