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पुलिस का बड़ा बयान, कहा- आधार में पता बदलने की आसानी भी साइबर फ्रॉड का बड़ा कारण

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Mar 28, 2023 11:08 am IST,  Updated : Mar 28, 2023 11:08 am IST

जांच के दौरान टीम को यह पता चला कि आरोपियों ने एक डॉक्टर की मदद से अपने आधार डेटाबेस में पता बदलवाया था जिसने महज 500 रुपये में पता बदलने संबंधी उनके प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर किया था।

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पुलिस के मुताबिक, आधार कार्ड में पता बदलने की आसानी का अपराधी फायदा उठा रहे हैं। Image Source : PTI REPRESENTATIONAL

नयी दिल्ली: साइबर अपराधों से जुड़े मामलों की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आधार कार्ड में पता बदलवाने की आसान प्रक्रिया साइबर धोखाधड़ी का एक सबसे बड़ा कारण है। आधार कार्ड धारक भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से कई तरीकों से अपना पता बदलवा सकता है। UIDAI ही आधार कार्ड जारी करती है। इनमें से एक तरीका यह है कि व्यक्ति UIDAI की वेबसाइट से पता-परिवर्तन प्रमाण पत्र डाउनलोड कर सकता है और इसे विभिन्न लोक अधिकारियों जैसे कि सांसद, विधायक, पार्षद, समूह ‘ए’ एवं समूह ‘बी’ के राजपत्रित अधिकारी और MBBS डॉक्टर से हस्ताक्षर कराकर इसे अपलोड कर सकता है।

‘मोहर लगाने और साइन करने में हुई लापरवाही’

साइबर अपराध के कई सुलाझाए गए मामलों में जांच अधिकारियों ने पाया है कि जालसाजों ने आधार डेटाबेस में अपने व्यक्तिगत विवरण को अद्यतन करने के लिए फर्जी रबर स्टैंप और लोक अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया। कुछ मामलों में लोक प्राधिकारियों ने भी व्यक्तियों की जानकारी सत्यापित किए बिना लापरवाही से अपनी मोहर और हस्ताक्षर प्रदान कर दिए। एक जांच अधिकारी ने कहा, ‘साइबर धोखाधड़ी मामले में हमने पाया कि एक विधायक ने आरोपी के पते में परिवर्तन के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके आधार पर उसने आधार डेटाबेस में अपना पता बदलवा लिया।’

‘दिल्ली से आया था ठगी का एक अनोखा मामला’
जांच अधिकारी ने कहा, ‘आगे की जांच में हमें पता चला कि विधायक ने अपने कार्यालय के एक कर्मी को इस तरह के प्रमाणपत्रों पर मुहर लगाने और उसके हस्ताक्षर का इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत किया था।’ मार्च 2022 में निरीक्षक खेमेंद्र पाल सिंह के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस के मध्य जिले के साइबर थाने की जांच टीम ने एक मामले का पर्दाफाश किया, जिसमें दो नाइजीरियाई नागरिकों सहित 6 लोग खुद को अनिवासी भारतीय (NRI) दुल्हे के तौर पर पेशकर युवतियों को ठगा करते थे।

‘सिर्फ 500 रुपये में डॉक्टर ने कर दिया था साइन’
जांच के दौरान टीम को यह पता चला कि आरोपियों ने एक डॉक्टर की मदद से अपने आधार डेटाबेस में पता बदलवाया था जिसने महज 500 रुपये में पता बदलने संबंधी उनके प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर किया था। दिल्ली पुलिस के ‘इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस’ (IFSO) के उपायुक्त प्रशांत गौतम ने कहा, ‘साइबर अपराधी अपना पता बदलते हैं और कुछ मामलों में तो वे अपने आधार डेटाबेस में कई बार अपना पता बदलते हैं और पीड़ितों के खातों से पैसे हस्तांतरित करने के लिए अलग-अलग बैंकों में कई खाते खुलवाते हैं।’

‘पुलिस के पास आधार डेटा तक पहुंच नहीं है’
साइबर अधिकारी ने कहा, ‘पुलिस के पास आधार डेटा तक पहुंच नहीं है, इसलिए हमें प्रत्येक मामले में आरोपी के मूल विवरण का पता लगाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जिससे देरी होती है और हमारा काम चुनौतीपूर्ण हो जाता है।’ जांच अधिकारियों का कहना है कि ऐसा लगता है कि UIDAI की वेबसाइट पर अपलोड की गई व्यक्तियों की बदली हुई जानकारी को दोबारा सत्यापित करने का कोई तरीका नहीं है। (भाषा)

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