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लगातार खराब हो रही गाजीपुर लैंडफिल की हालत, एनजीटी की रिपोर्ट में डराने वाले खुलासे

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Apr 04, 2025 02:28 pm IST,  Updated : Apr 04, 2025 02:28 pm IST

रिपोर्ट में बताया गया है कि चारदीवारी नहीं होने के कारण यह जगह बेहद खतरनाक होती जा रही है। इसके अलावा यहां से निकलने वाला गंदा पानी यमुना नदी में जाकर मिल रहा है।

ghazipur landfill- India TV Hindi
गाजीपुर लैंडफिल Image Source : PTI

दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल की हालत लगातार खराब होती जा रही है। एनजीटी की रिपोर्ट में कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गाजीपुर लैंडफिल के चारो तरफ दीवार नहीं है, इसकी ऊपरी सतह पर दरारें पड़ रही हैं। वहीं, यहां से निकलने वाला पानी यमुना में जाकर मिल रहा है। 70 एकड़ में फैले गाजीपुर लैंडफिल की निगरानी एमसीडी करती है और पूर्वी दिल्ली का कचरा यहीं डंप किया जाता है। यह जगह पोल्ट्री मार्केट, मछली मार्केट, डेयरी और सब्जी मार्केट, बूचड़खाने और कचरे से एनर्जी बनाने वाले (डब्ल्यूटीई) संयंत्र से घिरी हुई है।

गाजीपुर लैंडफिल में गर्मी के समय आग लगने की कई घटनाएं सामने आती रहती हैं। पिछले साल भी ऐसी कई घटनाएं हुई थीं। इसके बाद एनजीटी ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया। रिपोर्ट के अनुसार, लैंडफिल की ऊंचाई 40 मीटर से बढ़कर अब 60 मीटर से अधिक हो गई है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 2017 में लैंडफिल की ऊंचाई 50 मीटर थी। एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, इस साइट पर कचरा डंप करने की क्षमत 100 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन यहां इससे ज्यादा कचरा डंप हो चुका है। 

यमुना में मिल रहा जहरीला पानी

26 मार्च को किए गए सर्वे में सामने आया कि एक लीचेट टैंक का दूषित पानी नाले में गिर रहा है, जो आगे चलकर यमुना नदी में मिलता है। (जब बारिश का पानी किसी डंपसाइट में कचरे से होकर गुजरता है तो लीचेट बनता है। जब लीचेट जमा कचरे के संपर्क में आता है तो खतरनाक केमिकल बाहर आते हैं, जिससे आस-पास के इलाकों में प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है।) रिपोर्ट में कहा गया है कि लैंडफिल के आसपास महत्वपूर्ण इमारतें हैं, जिनमें सरकारी विनियमित बाजार भी शामिल हैं। यह लैंडफिल घनी आबादी वाले क्षेत्र में है, जिसके ठीक पीछे हिंडन नदी बहती है। इससे लीचेट के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

लैंडफिल साफ करने का दावा झूठा

गाजीपुर लैंडफिल गेट के पास दो ट्रॉमेल (पानी से कचरा अलग करने का उपकरण) काम करते पाए गए, जबकि दावा किया गया था कि इस इलाके को पूरी तरह से साफ कर दिया गया है। इसके अलावा हिंडन नहर के पास और एमसीडी बूचड़खाने के पास कोई बाउंड्री नहीं है। ऐसे में कचरा बाहर की तरफ धंस सकता है। इससे आम लोगों और पास से गुजरने वाले वाहन इसकी चपेट में आ सकते हैं। असामाजिक तत्व यहां से अंदर पहुंचकर आग भी लगा सकते हैं। 1 सितम्बर, 2017 को लैंडफिल से निकला कचरा 110 मीटर तक बहकर सड़क और हिंडन नहर पर आ गया, जिससे दो लोगों की मौत हो गई थी।

चारदीवारी मजबूत करने का सुझाव

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लैंडफिल में दो छेद भी हैं, जिनके जरिए मीथेन गैस सीधे हवा में मिल रही है और शहर का प्रदूषण बढ़ा रही है। डब्ल्यूटीई संयंत्र 1,300 टीपीडी की पूरी क्षमता पर नहीं चल रहा था। यह लगभग 800-850 टीपीडी पर काम कर रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दो महीने के अंदर लैंडफिल के चारो तरफ दीवार को मजबूत किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कचरे की अनाधिकृत डंपिंग रोकने के लिए सुरक्षा चौकियां भी बनाई जानी चाहिए। 

दिल्ली सीएम का वादा

आप सरकार ने दिल्ली से कूड़े के तीन पहाड़ों को हटाने का वादा किया था। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। अब फरवरी में भाजपा के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछले महीने कहा था कि एक साल में तीनों लैंडफिल साइटों की ऊंचाई कम कर दी जाएगी।

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