दिल्ली विधानसभा चुनावों में इस बार नई दिल्ली विधानसभा सीट हॉट सीट बना हुआ है। यह सीट पिछले तीन बार के विधानसभा चुनाव में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए बहुत आसान थे। इस सीट पर उनकी लोकप्रियता के कारण उनके सामने किसी दमदार प्रत्याशी का नहीं था लेकिन इस बार नजारा कुछ और है। इस सीट से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही ने ही अपने दिग्गजों को चुनावी मैदान में उतार दिया है। ऐसे में इस सीट पर सियासी घमासान देखने को मिलेगा और ये भी कि जनता इसबार किसे स्वीकारती है और बहुमत किसे मिलता है।
कांग्रेस आप और भाजपा में सियासी घमासान
नई दिल्ली सीट से भाजपा ने प्रवेश वर्मा को टिकट दिया है जो पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह के बेटे हैं तो वहीं कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित पर भरोसा जताया है। इससे पता चलता है कि इस बार अरविंद केजरीवाल के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी। एंटी इंकंबेंसी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के कारण दिल्ली में सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी डिफेंसिव मोड में है लेकिन इसके बावजूद अरविंद केजरीवाल को हराना इतना आसान भी नहीं है।
क्या कहता है समीकरण
नई दिल्ली सीट पर कांग्रेस का वोट लगातार कम हो रहा है पिछले चुनाव में कांग्रेस को यहां से सिर्फ चार प्रतिशत के आसपास ही मत मिले थे जबकि बीजेपी के हिस्से लगभग तैंतीस प्रतिशत मत आए थे.पर इस बार कांग्रेस ने संदीप दीक्षित को प्रत्याशी बनाया है। संदीप दीक्षित अपनी मां शीला दीक्षित के किए विकास कार्यों को याद दिला रहे हैं। जहां प्रवेश वर्मा की बात करें तो वे भी दिल्ली के पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के पुत्र हैं और भाजपा का जाना पहचाना चेहरा हैं। ऐसे में इस सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।
कितने हैं मतदाता
नई दिल्ली सीट पर साल 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान 1,46,000 हज़ार मतदाता थे, वहीं अब ये संख्या बढ़कर 1,90,000 हज़ार के आसपास पहुंच गई है। इस इलाके में अधिकतर सरकारी कार्यालय हैं और साथ ही कुछ झुग्गी बस्तियों और कॉलोनियों को छोड़कर अधिकतर इलाक़ा पॉश है जहां रईस रहते हैं या अपर मिडिल क्लास रहते हैं। सांसदों के सरकारी आवास भी इसी सीट के इलाक़े में आते हैं।