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अंकित शर्मा हत्याकांड में उम्रकैद को ताहिर हुसैन ने दी चुनौती, हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

 Written By: Malaika Imam
 Published : Sep 02, 2026 12:23 pm IST,  Updated : Sep 02, 2026 12:27 pm IST

ताहिर हुसैन ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 2 दिसंबर को करने का फैसला किया है।

ताहिर हुसैन को उम्रकैद- India TV Hindi
ताहिर हुसैन को उम्रकैद Image Source : PTI

दिल्ली हाई कोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की अपील पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने ताहिर हुसैन की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए मामले को 02 दिसंबर को अन्य संबंधित अपीलों के साथ सूचीबद्ध किया। अदालत ने जेल अधिकारियों को दोषी से संबंधित विवरण रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया। साथ ही, निचली अदालत के रिकॉर्ड भी तलब किए गए हैं।

ताहिर हुसैन ने अपनी अपील में निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हुसैन का दावा है कि मामले की जांच का उद्देश्य जनता के गुस्से को शांत करने के लिए उन्हें फंसाना था।

25 फरवरी से लापता थे अंकित शर्मा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 फरवरी 2020 को शिकायतकर्ता रविंदर कुमार ने दयालपुर थाने में सूचना दी थी कि उनका बेटा अंकित शर्मा, जो आईबी में तैनात था, 25 फरवरी से लापता है। बाद में स्थानीय लोगों से उन्हें जानकारी मिली कि एक व्यक्ति की हत्या कर उसके शव को चांद बाग पुलिया स्थित मस्जिद से खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है।

इसके बाद खजूरी खास नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद किया गया। अभियोजन के मुताबिक, उनके शरीर पर चोट के 51 निशान पाए गए थे।

पांच दोषियों को उम्रकैद

निचली अदालत ने 31 जुलाई को ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को अंकित शर्मा की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि अपराध की गंभीरता के बावजूद यह मामला "दुर्लभतम से दुर्लभ" श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मौत की सजा देने का आधार नहीं बनता।

2020 के दंगों में गई थी 53 लोगों की जान

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। कई दिनों तक चली हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। (इनपुट- PTI)

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