1. Hindi News
  2. दिल्ली
  3. DUSU चुनाव में NSUI की क्यों हुई बुरी हार? शून्य पर आया छात्र संगठन, प्रभारी कन्हैया कुमार पर उठे सवाल

DUSU चुनाव में NSUI की क्यों हुई बुरी हार? शून्य पर आया छात्र संगठन, प्रभारी कन्हैया कुमार पर उठे सवाल

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Sep 19, 2026 11:07 pm IST,  Updated : Sep 19, 2026 11:07 pm IST

दिल्ली यूनिवर्सिटी एक समय एनएसयूआई का गढ़ माना जाता था लेकिन इस बार चुनाव रिजल्ट आने के बाद NSUI जीरो पर पहुंच गई है।

Rahul gandhi, Kanhaiya kumar- India TV Hindi
राहुल गांधी, कन्हैया कुमार Image Source : PTI

नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के चुनाव परिणामों से सबसे गहरा धक्का कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को लगा है। क्योंकि चुनाव में केंद्रीय पैनल के चारों पदों में से कोई भी पद एनएसयूआई को नहीं मिला। एबीवीपी ने तीन पदों पर जीत हासिल की जबकि एक पद पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहा। वहीं एनएसयूआई सीधे जीरो पर पहुंच गया। अब चुनाव रिजल्ट आने के बाद NSUI में टिकट बंटवारे का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। साथ ही एनएसयूआई के चुनाव प्रभारी कन्हैया कुमार पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बागी उम्मीदवार ने भारी अंतर से जीत हासिल की

इस चुनाव में  एनएसयूआई के एक बागी उम्मीदवार ने भारी अंतर से जीत दर्ज की, जबकि एक अन्य ने कड़ी चुनौती पेश की। उपाध्यक्ष का पद जीतने वाले निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने एनएसयूआई से  टिकट की मांग की थी। एनएसयूआई ने शुरू में उन्हें उम्मीदवार भी बनाया था, लेकिन बाद में उनसे नामांकन वापस लेने को कहा गया। बाद में वे निर्दलीय चुनाव में उतर गए। उन्हें 30,615 मत मिले, जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के इशु मौर्य को मिले 16,910 वोटों से लगभग दोगुने हैं। वही एनएसयूआई के आधिकारिक उम्मीदवार वीर चतर, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष चतरथ के बेटे हैं ,  4,313 वोटों के साथ काफी पीछे तीसरे स्थान पर रहे। 

एनएसयूआई टिकट के एक और दावेदार विशेष यादव को पहले संयुक्त सचिव का टिकट देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। इसके बाद उन्होंने समाजवादी छात्र सभा के समर्थन से चुनाव लड़ा और 15,778 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए और उनसे आगे रहे। इस पद के लिए एनएसयूआई के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले। 

अहंकार की लड़ाई के चलते दीपांशु शौकीन को टिकट नहीं मिला?

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार के करीबी सूत्रों ने हालांकि इन बातों को खारिज कर दिया कि दीपांशु शौकीन के साथ अहंकार की लड़ाई की वजह से उन्हें टिकट नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि एनएसयूआई ने शौकीन को अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने प्रस्ताव दिया था। लेकिन शौकीन उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने पर अड़े रहे। सूत्रों का आरोप है कि जाट समुदाय से आने वाले शौकीन, एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास (जो उसी समुदाय से हैं) के खिलाफ चुनाव लड़ने से हिचकिचा रहे थे और दावा किया गया कि दोनों के बीच कोई समझौता था।  उन्होंने कहा कि एनएसयूआई अध्यक्ष पद का मुकाबला छोड़ने को तैयार नहीं थी और इसके बजाय उसने आदिवासी उम्मीदवार विजय शंकर मीणा को मैदान में उतारा। 

2023 कन्हैया को NSUI का प्रभारी बनाया गया

बता दें कि कन्हैया कुमार को जुलाई 2023 में एनएसयूआई के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का प्रभारी नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल में यह पहली बार नहीं है जब किसी नाराज उम्मीदवार ने एनएसयूआई के आधिकारिक उम्मीदवार को हराया हो या उनसे कहीं बेहतर प्रदर्शन किया हो। पंजाब विश्वविद्यालय में 2024 में टिकट बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद एनएसयूआई के बागी अनुराग दलाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। ​​एनएसयूआई के आधिकारिक उम्मीदवार राहुल नैन को सिर्फ 501 वोट मिले और वह छठे स्थान पर रहे।

ये भी पढ़ें:

'नाराज फुफाओं के झूठ की गूंज को युवाओं ने नकारा', DUSU में ABVP की जीत पर बीजेपी

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। दिल्ली से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।