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राजनीति' में खूब लहराए कट्टे, फिर फिल्मी राह पर बने ऐसे विलेन की कांप गए हीरो, हर किरदार में जमाते हैं रंग

 Written By: Shyamoo Pathak
 Published : Nov 10, 2025 06:00 am IST,  Updated : Nov 10, 2025 06:00 am IST

आशुषोत राणा के जन्मदिन पर जानते हैं उनकी कहानी। कैसे एक छात्र नेता से बॉलीवुड के धाकड़ एक्टर और शानदार राइटर के तौर पर पहचान बनाई।

Ashutosh Rana- India TV Hindi
आशुतोष राणा Image Source : INSTAGRAM@ASHUTOSH_RAMNARAYAN

बॉलीवुड एक्टर आशुतोष राणा आज अपना 58वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने करियर में 135 से ज्यादा फिल्मों और सीरयल्स में काम करने वाले आशुतोष ने अपने करियर की शुरुआत टीवी से की थी। लेकिन चंद किरदारों के बाद फिल्मों में एंट्री ली और अपनी एक्टिंग से ऐसी गदर मचाई कि आज भी लोग उनके किरदारों को भूले नहीं हैं। लेकिन खास बात तो ये है कि आशुतोष राणा फिल्मों में आने से पहले छात्र राजनीति में काफी सक्रिय रहते थे। इतना ही नहीं कई बार विरोध प्रदर्शन और नेतागीरी में कट्टे लहराने से भी पीछे नहीं हटते थे। लेकिन छात्र जीवन छूटते ही राजनीति भी छूट गई और कला की दुनिया में ऐसा नाम कमाया कि आज उनके किरदारों की दीवानगी फिल्मों तक ही सीमित नहीं रही। उनकी आवाज से लेकर थियेटर में उनकी भाषा पकड़ और तल्लफ्फुस को देखकर लोग दातों तले उंगलिया दबा लेते हैं। एक बेहतरीन एक्टर के साथ आशुतोष राणा एक शानदार लेखक भी हैं और फोन पर ही कई ऐसी कविताएं लिख चुके हैं जिन्हें सुनकर युवाओं का खून खौलने लगता है। 

रीजनीति में खूब लहराए कट्टे

आशुतोष राणा का जन्म जबलपुर के पास एक कस्बे गाडरवारा में हुआ था। यहां अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए आशुतोष सागर विश्वविद्यालय पहुंच गए। यहां उन्होंने न केवल पढ़ाई की बल्कि छात्र राजनीति में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। यहां कई बार विरोध प्रदर्शन और छात्रों को विवाद निपटाने में अगुआ रहते थे। उनकी पत्नी ने एक बार अपनी शादी का किस्सा बताते हुए बताया था, 'हम लोग शादी से पहले ट्रेन में जा रहे थे। राणा जी के कुछ दोस्त भी थे और मेरे परिवार के लोग भी साथ में ही थे। जब उनके दोस्त उनके कॉलेज के दिनों के किस्से सुना रहे थे तो एक ने कहा कि भइया वो वाला किस्सा सुनाइये जब आपने कट्टा लहरा दिया था। ये सुनकर मेरे परिवार वाले काफी चौंक गए थे। तो कॉलेज के दिनों में राणा जी ऐसे रहा करते थे।' आशुतोष ने अपने कॉलेज की बदमाशी और राजनीति वहीं छोड़ दी और अपने गुरु के कहने पर मुंबई आ गए। 

टीवी से की थी शुरुआत

अपनी कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद आशुतोष मुंबई आ गए और टीवी की दुनिया में अपनी जमीन तलाशने लगे। यहां लगातार किरदारों को गढ़ा और टीवी पर करीब आधा दर्जन सीरियल्स में काम किया। आशुतोष राणा ने शुरुआत में छोटे-बड़े किरदार निभाए और फिल्मों में भी काम करने लगे। साल 1998 में रिलीज हुई फिल्म 'दुश्मन' में उन्होंने गोकुल पंडित नाम का ऐसा किरदार निभाया कि देखने वालों की रूह कांप गई। इस किरदार ने उन्हें पहचान दिलाई और फिल्मी दुनिया का ये सिलसिला शुरू हो गया जो आज भी करीब 150 फिल्मों तक जारी है। उन्होंने बॉलीवुड के साथ साउथ सिनेमा में भी विलेन से लेकर पॉजिटिव किरदारों में कमाल किया है। 

एक्टर के साथ कमाल के लेखक भी हैं

आशुतोष को लोगों ने फिल्मों में तो खूब देखा है लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि वे कमाल के थियेटर आर्टिस्ट भी हैं। बीते दिनों दिल्ली में एक प्ले के दौरान उन्होंने रावण का रोल स्टेज पर निभाया था और उसे देखकर लोग कांप उठे थे। एक बेहतरीन एक्टर के साथ उनकी आवाज और हिंदी भाषा की पकड़ भी लोगों का दिल जीतती है। इसके साथ ही आशुतोष एक कमाल के राइटर भी हैं और एक कविता हे 'भारत के राम जगो, मैं तुम्हें जगाने आया हूं', युवाओं के बीच आज भी जोश भर देती है। खास बात ये है कि आशुतोष अपने फोन पर ही किताबें और कविताएं लिखने में भी महारथ हासिल कर चुके हैं। आज जन्मदिन के इस खास मौके पर आशुतोष राणा को उनके फैन्स ने सोशल मीडिया पर बधाई दी है। 

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