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खत्म हुआ 14 साल का वनवास, फिर लौट रही 'हेरा फेरी' वाली अक्षय और प्रियदर्शन कल्ट जोड़ी, 'भूत बंगला' से पहले याद आए 5 मजेदार डायलॉग्स

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : Mar 09, 2026 02:05 pm IST,  Updated : Mar 09, 2026 02:05 pm IST

अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ील 14 साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही है। दोनों ने पहले एक साथ कई सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिनके डायलॉग्स काफी चर्चित हुए और उन पर आज भी मीम बनते हैं। एक नजर डालते हैं इन डायलॉग्स पर।

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फिल्मों के पोस्टर Image Source : PRESS KIT

हिंदी सिनेमा के इतिहास में अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की जोड़ी को 'कॉमेडी का पावरहाउस' माना जाता है। लगभग 14 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, यह आइकॉनिक जोड़ी फिल्म 'भूत बंगला' के साथ वापसी कर रही है, जो 10 अप्रैल, 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। एकता कपूर के बालाजी मोशन पिक्चर्स द्वारा निर्मित यह फिल्म आज के दौर के हिसाब से उसी पुराने कॉमेडी जादू को फिर से जीवंत करने का वादा करती है। 'भूत बंगला' की रिलीज से पहले, आइए अक्षय और प्रियदर्शन की उन कल्ट क्लासिक फिल्मों के 5 सबसे यादगार डायलॉग्स पर नजर डालते हैं, जो आज भी मीम्स की दुनिया और हमारी रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा हैं।

1. हेरा फेरी: औरत का चक्कर, बाबू भैया...

प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी 'हेरा फेरी' को भारतीय कॉमेडी की 'गीता' कहा जाता है। फिल्म में अक्षय कुमार (राजू) का बाबू भैया को समझाते हुए यह कहना, 'औरत का चक्कर, बाबू भैया... औरत का चक्कर', इतना लोकप्रिय हुआ कि आज दो दशकों बाद भी यह सोशल मीडिया पर किसी भी उलझी हुई स्थिति का मजाक उड़ाने के लिए सबसे बड़ा 'मीम टेम्पलेट' है।

2. भागम भाग: बहन डर गई, बहन डर गई!

फिल्म 'भागम भाग' अपनी तेज रफ्तार कॉमेडी और कन्फ्यूजन के लिए जानी जाती है। एक बेहद अफरातफरी वाले सीन में अक्षय कुमार का चिढ़ाते हुए यह डायलॉग,'बहन डर गई, बहन डर गई!'दर्शकों को लोट-पोट कर गया था। अक्षय की कॉमिक टाइमिंग ने इस साधारण सी लाइन को सदाबहार बना दिया।

3. दे दना दन: देने वाला जब भी देता है... सब कुछ फाड़ देता है

'दे दना दन' में अक्षय कुमार ने 'नितिन' के किरदार में अपनी किस्मत को कोसते और कभी उम्मीद जगाते हुए यह डायलॉग बोला था। जब वे कैटरीना कैफ के किरदार को सांत्वना दे रहे होते हैं, तब स्थिति अचानक उनके पक्ष में मुड़ती है और यह लाइन अनजाने में बेहद फनी बन जाती है। आज भी लोग इसे अपनी 'किस्मत चमकने' के मौकों पर इस्तेमाल करते हैं।

4. खट्टा मीठा: इतनी बेइज्जती? मैं तो ना सहता

'खट्टा मीठा' में सचिन टिचकुले के रूप में अक्षय कुमार ने भ्रष्टाचार और मिडिल क्लास संघर्ष को कॉमेडी के तड़के के साथ पेश किया। उनका यह व्यंग्यात्मक डायलॉग, 'इतनी बेइज्जती? मैं तो ना सहता', आज दोस्तों के बीच एक-दूसरे की टांग खींचने के लिए सबसे पसंदीदा हथियार है।

5. भूल भुलैया: क्या हुआ, खत्म नहीं हुआ क्या? नायग्रा फॉल है क्या?

हॉरर-कॉमेडी 'भूल भुलैया' में डॉक्टर आदित्य श्रीवास्तव (अक्षय कुमार) का प्रवेश ही फिल्म के मिजाज को बदल देता है। एक गंभीर और डरावने माहौल के बीच अचानक अक्षय का यह सवाल, 'क्या हुआ, खत्म नहीं हुआ क्या? नायग्रा फॉल है क्या?' डर को हंसी में बदल देता है। यह लाइन प्रियदर्शन के उस हुनर का प्रमाण है जहाँ वे गंभीर दृश्यों में भी ह्यूमर ढूंढ लेते हैं।

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