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कभी जेब में थे सिर्फ 27 पैसे, 3 दिन तक रहे भूखे, जावेद अख्तर के संघर्ष के दिनों को शबाना आजमी ने किया याद

 Written By: Himanshi Tiwari
 Published : Oct 04, 2026 07:18 pm IST,  Updated : Oct 04, 2026 07:18 pm IST

शबाना आजमी ने जावेद अख्तर के संघर्ष के दिनों का जिक्र किया, जब उनके पति और जाने-माने कवि, पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख्तर पहली बार मुंबई आए थे। शबाना ने बताया कि उस समय जावेद की जेब में सिर्फ 27 पैसे थे।

Shabana Azmi Javed Akhtar- India TV Hindi
शबाना आजमी-जावेद अख्तर Image Source : INSTAGRAM/@AZMISHABANA18

आज से 62 साल पहले मशहूर स्क्रीनराइटर, गीतकार और कवि जावेद अख्तर पहली बार मुंबई आए थे। उन्होंने अपना घर छोड़ा और सपनों के शहर मुंबई के लिए ट्रेन पकड़ी। वे वहां अपने सपने पूरे करने के लिए पहुंचे और 4 अक्टूबर 1964 को मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर उतरे। अब उनकी पत्नी और मशहूर एक्ट्रेस शबाना आजमी ने जावेद अख्तर के संघर्ष के दिनों को याद किया और रविवार को इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए इस खास मौके को सेलिब्रेट किया। हालांकि, कभी फुटपाथ पर सोने वाले जावेद अख्तर ने आज शानदार जिंदगी जी रहे हैं।

शबाना आजमी ने खोले जावेद अख्तर के संघर्ष के पन्ने

दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी ने इंस्टाग्राम पर जावेद अख्तर की एक तस्वीर शेयर की है और कैप्शन में लिखा, '4 अक्टूबर 1964। एक नौजवान बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचा, जिसकी जेब में सिर्फ 27 पैसे थे, लेकिन आखों में बड़े-बड़े सपने थे।' उन्होंने आगे कहा, 'जिंदगी ने उन्हें कई मुश्किलों का सामना कराया। वे फुटपाथ पर रेलवे स्टेशनों पर और कई स्टूडियो के कंपाउंड में सोए। एक दिन ऐसा भी आया, जब उनके पास 3 दिनों तक खाने के लिए कुछ नहीं था और शरीर पर जो कपड़े थे, वे भी फटे-पुराने थे।'

संघर्ष से जावेद अख्तर की सफलता की कहानी

उन मुश्किलों के बावजूद जावेद अख्तर के हार न मानने की बात याद करते हुए शबाना ने आगे कहा, 'निराशा के उस मोड़ पर, जब वे हार मान सकते थे। उन्होंने खुद से कहा कि मैं यूं ही मरने के लिए पैदा नहीं हुआ था। ये दिन बदलेंगे और सच में दिन बदले। 4 अक्टूबर 1964: एक 19 साल का नौजवान, जिसके पास लगभग कुछ नहीं था। 4 अक्टूबर 2026 दशकों बाद: एक ऐसी जिंदगी, जिसने भारत को कुछ सबसे यादगार शब्द दिए हैं। यह जावेद अख्तर की कहानी है।'

जावेद अख्तर पर शबाना ने लुटाया प्यार

शबाना आजमी ने अपनी पोस्ट को जावेद अख्तर के सफर को दूसरों के लिए उम्मीद का संदेश बनाते हुए खत्म किया और लिखा, 'कुछ सफर लगभग बिना किसी चीज के शुरू होते हैं। बस एक सपने के साथ। अगर वह ऐसा कर सकते हैं तो आप भी कर सकते हैं। कभी हार न मानें।' वीडियो के कमेंट सेक्शन में जावेद अख्तर की बेटी और फिल्ममेकर जोया अख्तर, एक्टर ऋतिक रोशन, दीया मिर्जा, दिव्या दत्ता और अमृता सुभाष समेत कई सेलेब्रिटीज ने उनकी तारीफ की।

जावेद अख्तर ने शुरुआती संघर्ष को बताया खास 

2024 की अमेजन प्राइम वीडियो इंडिया की डॉक्युसीरीज 'एंग्री यंग मेन' में जावेद अख्तर ने मुंबई में अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया, 'मैंने तय किया था कि ग्रेजुएशन के बाद मैं मुंबई जाऊंगा और असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करूंगा, उम्मीद थी कि गुरु दत्त या राज कपूर के साथ। मुझे यकीन था कि कुछ साल ऐसा करने के बाद मैं पक्का डायरेक्टर बन जाऊंगा। कुछ दिन तो मैं दादर से बांद्रा तक पैदल ही चला जाता था, क्योंकि मेरे पास बस के किराए के लिए पैसे नहीं होते थे। कभी-कभी मुझे एहसास होता था कि मैंने दो दिनों से कुछ नहीं खाया है। मैं हमेशा सोचता था कि अगर कभी मेरी बायोग्राफी लिखी गई तो यह एक बहुत ही शानदार पल होगा।'

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