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कभी फुटपाथ पर सोने वाले जावेद अख्तर के लग्जरी पैलेस से नहीं हटेगी नजर, शबाना संग दिखाया कोना-कोना

Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
Published : Feb 02, 2026 05:47 pm IST,  Updated : Feb 02, 2026 05:47 pm IST
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज कलाकार शबाना आजमी और मशहूर गीतकार-कवि जावेद अख्तर ने हाल ही में अपने खूबसूरत खंडाला स्थित बंगले की पहली झलक साझा की। यह खास मौका तब आया, जब फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान ने अपने व्लॉग के जरिए दर्शकों को इस आलीशान घर की सैर कराई। खास बात यह है कि जावेद अख्तर फराह खान के मामा हैं, क्योंकि उनकी शादी फराह की मौसी और अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी से हुई थी। इस व्लॉग में न सिर्फ घर की भव्यता दिखाई दी, बल्कि संघर्ष, यादें और जिंदगी के अनुभव भी खुलकर सामने आए।
1/9 Image Source : Farah Khan Youtube
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज कलाकार शबाना आजमी और मशहूर गीतकार-कवि जावेद अख्तर ने हाल ही में अपने खूबसूरत खंडाला स्थित बंगले की पहली झलक साझा की। यह खास मौका तब आया, जब फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान ने अपने व्लॉग के जरिए दर्शकों को इस आलीशान घर की सैर कराई। खास बात यह है कि जावेद अख्तर फराह खान के मामा हैं, क्योंकि उनकी शादी फराह की मौसी और अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी से हुई थी। इस व्लॉग में न सिर्फ घर की भव्यता दिखाई दी, बल्कि संघर्ष, यादें और जिंदगी के अनुभव भी खुलकर सामने आए।
व्लॉग के दौरान जावेद अख्तर ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि आज की यह लग्जरी उनके लिए कितनी अविश्वसनीय लगती है। उन्होंने खुलकर उस दौर की बात की जब उनके पास न रहने के लिए घर था और न खाने के लिए खाना। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उन्हें फुटपाथ पर सोना पड़ता था और लगातार दो-तीन दिन तक भूखे रहना आम बात थी।
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व्लॉग के दौरान जावेद अख्तर ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि आज की यह लग्जरी उनके लिए कितनी अविश्वसनीय लगती है। उन्होंने खुलकर उस दौर की बात की जब उनके पास न रहने के लिए घर था और न खाने के लिए खाना। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उन्हें फुटपाथ पर सोना पड़ता था और लगातार दो-तीन दिन तक भूखे रहना आम बात थी।
आज इतने सालों बाद, जब वह एक शानदार बंगले के मालिक हैं, तब भी उन्हें कभी-कभी यकीन नहीं होता कि यह सब सच में उनके साथ हुआ है। खंडाला का यह बंगला हरियाली और सुकून का एक खूबसूरत संगम है। घर के बाहर एक बड़ा सा बगीचा है, जो ऊंचे-ऊंचे हरे पेड़ों से घिरा हुआ है। बगीचे को क्लासिकल टच देने के लिए इसमें संगमरमर की मूर्तियां लगाई गई हैं और बीच में एक आकर्षक फव्वारा मौजूद है।
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आज इतने सालों बाद, जब वह एक शानदार बंगले के मालिक हैं, तब भी उन्हें कभी-कभी यकीन नहीं होता कि यह सब सच में उनके साथ हुआ है। खंडाला का यह बंगला हरियाली और सुकून का एक खूबसूरत संगम है। घर के बाहर एक बड़ा सा बगीचा है, जो ऊंचे-ऊंचे हरे पेड़ों से घिरा हुआ है। बगीचे को क्लासिकल टच देने के लिए इसमें संगमरमर की मूर्तियां लगाई गई हैं और बीच में एक आकर्षक फव्वारा मौजूद है।
यह जगह पहली नजर में ही शांति और ठहराव का एहसास कराती है। बाहर से घर एक विशाल फोयर में खुलता है, जिसकी ऊंची लकड़ी की छत इसे पुराने इंग्लिश बंगले जैसा लुक देती है। अंदर कदम रखते ही विंटेज फर्नीचर और सादगीभरे लेकिन रिच इंटीरियर का मेल नजर आता है, जो इस घर के क्लासिक चार्म को और बढ़ाता है।
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यह जगह पहली नजर में ही शांति और ठहराव का एहसास कराती है। बाहर से घर एक विशाल फोयर में खुलता है, जिसकी ऊंची लकड़ी की छत इसे पुराने इंग्लिश बंगले जैसा लुक देती है। अंदर कदम रखते ही विंटेज फर्नीचर और सादगीभरे लेकिन रिच इंटीरियर का मेल नजर आता है, जो इस घर के क्लासिक चार्म को और बढ़ाता है।
इसके बाद फराह खान दर्शकों को शबाना और जावेद के ड्राइंग रूम में ले जाती हैं। यह कमरा दुनियाभर से लाई गई कलाकृतियों से सजा हुआ है, जिन्हें कपल ने अपनी यात्राओं के दौरान इकट्ठा किया है। हर कोना किसी न किसी कहानी को बयां करता है। इसी दौरान जावेद अख्तर मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि इनमें से कुछ आर्ट पीस शायद फराह खान जितने ही पुराने होंगे, जिस पर माहौल हल्का-फुल्का हो जाता है।
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इसके बाद फराह खान दर्शकों को शबाना और जावेद के ड्राइंग रूम में ले जाती हैं। यह कमरा दुनियाभर से लाई गई कलाकृतियों से सजा हुआ है, जिन्हें कपल ने अपनी यात्राओं के दौरान इकट्ठा किया है। हर कोना किसी न किसी कहानी को बयां करता है। इसी दौरान जावेद अख्तर मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि इनमें से कुछ आर्ट पीस शायद फराह खान जितने ही पुराने होंगे, जिस पर माहौल हल्का-फुल्का हो जाता है।
ड्राइंग रूम के बड़े दरवाजे और खिड़कियां बाहर के हरियाले नजारे को अंदर तक ले आती हैं, जिससे पूरा स्पेस खुला-खुला और जीवंत महसूस होता है। फराह कपल की बड़ी लकड़ी की डाइनिंग टेबल भी दिखाती हैं, जहां परिवार और दोस्त अक्सर साथ बैठकर वक्त बिताते हैं। शबाना आजमी ने इस प्रॉपर्टी से जुड़ी दिलचस्प कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह जमीन करीब 15 साल पहले खरीदी थी और यहां मौजूद एक 150 साल पुराना पेड़ देखकर ही उन्होंने इसे लेने का फैसला कर लिया था।
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ड्राइंग रूम के बड़े दरवाजे और खिड़कियां बाहर के हरियाले नजारे को अंदर तक ले आती हैं, जिससे पूरा स्पेस खुला-खुला और जीवंत महसूस होता है। फराह कपल की बड़ी लकड़ी की डाइनिंग टेबल भी दिखाती हैं, जहां परिवार और दोस्त अक्सर साथ बैठकर वक्त बिताते हैं। शबाना आजमी ने इस प्रॉपर्टी से जुड़ी दिलचस्प कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह जमीन करीब 15 साल पहले खरीदी थी और यहां मौजूद एक 150 साल पुराना पेड़ देखकर ही उन्होंने इसे लेने का फैसला कर लिया था।
हालांकि घर को लेकर शबाना और जावेद की सोच बिल्कुल अलग थी। शबाना इसे एक सिंपल वीकेंड कॉटेज के रूप में देख रही थीं, जबकि जावेद अख्तर यहां एक भव्य बंगला बनाना चाहते थे। शबाना ने हंसते हुए बताया कि इस बात को लेकर उनकी लगभग रोज लड़ाई होती थी। उन्होंने कहा, 'जावेद के सबसे अच्छे दोस्त ने मुझसे कहा था कि जावेद अख्तर शोले हैं और तुम अंकुर हो। तुम दोनों कभी नहीं मिल सकते, इसलिए तुम्हें अंकुर छोड़कर उसे शोले बनाने देना होगा। इसके बाद मैंने बहस करना बंद कर दिया।'
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हालांकि घर को लेकर शबाना और जावेद की सोच बिल्कुल अलग थी। शबाना इसे एक सिंपल वीकेंड कॉटेज के रूप में देख रही थीं, जबकि जावेद अख्तर यहां एक भव्य बंगला बनाना चाहते थे। शबाना ने हंसते हुए बताया कि इस बात को लेकर उनकी लगभग रोज लड़ाई होती थी। उन्होंने कहा, 'जावेद के सबसे अच्छे दोस्त ने मुझसे कहा था कि जावेद अख्तर शोले हैं और तुम अंकुर हो। तुम दोनों कभी नहीं मिल सकते, इसलिए तुम्हें अंकुर छोड़कर उसे शोले बनाने देना होगा। इसके बाद मैंने बहस करना बंद कर दिया।'
फराह खान ने बातचीत के दौरान जावेद अख्तर से पूछा कि संघर्ष भरे अतीत के बाद आज इतनी शानदार प्रॉपर्टी का मालिक बनना कैसा लगता है। इस पर जावेद ने बेहद भावुक जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी मुझे हैरानी होती है कि क्या यह सच में मेरे साथ हो रहा है। जिनके पास कुछ नहीं होता, उन्हीं के पास कल्पना होती है। मैंने अपनी कविता भूख तब लिखी थी, जब मैंने लगातार तीन दिन तक कुछ नहीं खाया था।' उन्होंने यह भी कहा कि चाहे इंसान जिंदगी में कितने ही बड़े घर में क्यों न रहने लगे, दिल के किसी कोने में एक छोटा सा कमरा हमेशा रहता है, जो उसे उसके संघर्ष की याद दिलाता है।
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फराह खान ने बातचीत के दौरान जावेद अख्तर से पूछा कि संघर्ष भरे अतीत के बाद आज इतनी शानदार प्रॉपर्टी का मालिक बनना कैसा लगता है। इस पर जावेद ने बेहद भावुक जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी मुझे हैरानी होती है कि क्या यह सच में मेरे साथ हो रहा है। जिनके पास कुछ नहीं होता, उन्हीं के पास कल्पना होती है। मैंने अपनी कविता भूख तब लिखी थी, जब मैंने लगातार तीन दिन तक कुछ नहीं खाया था।' उन्होंने यह भी कहा कि चाहे इंसान जिंदगी में कितने ही बड़े घर में क्यों न रहने लगे, दिल के किसी कोने में एक छोटा सा कमरा हमेशा रहता है, जो उसे उसके संघर्ष की याद दिलाता है।
सिर्फ जावेद अख्तर ही नहीं, बल्कि शबाना आजमी की शुरुआती ज़िंदगी भी बेहद साधारण रही है। उन्होंने बताया कि वह एक सामान्य परिवार से आती हैं और बचपन में कम्युनिस्ट पार्टी के एक कम्यून में रहती थीं। वहां आठ छोटे-छोटे कमरे थे और हर कमरे में आठ-आठ परिवार रहते थे। इन सभी परिवारों के लिए सिर्फ एक बाथरूम और एक टॉयलेट हुआ करता था। शबाना ने बताया कि वह नौ साल की उम्र तक वहीं रहीं, जिसके बाद उनका परिवार मुंबई आ गया।
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सिर्फ जावेद अख्तर ही नहीं, बल्कि शबाना आजमी की शुरुआती ज़िंदगी भी बेहद साधारण रही है। उन्होंने बताया कि वह एक सामान्य परिवार से आती हैं और बचपन में कम्युनिस्ट पार्टी के एक कम्यून में रहती थीं। वहां आठ छोटे-छोटे कमरे थे और हर कमरे में आठ-आठ परिवार रहते थे। इन सभी परिवारों के लिए सिर्फ एक बाथरूम और एक टॉयलेट हुआ करता था। शबाना ने बताया कि वह नौ साल की उम्र तक वहीं रहीं, जिसके बाद उनका परिवार मुंबई आ गया।
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