संसद के मानसून सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान किए गए चंदे में कथित गबन के मामलों को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही की शुरुआत में छह पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि दी और उसके बाद हंगामा कर रहे सांसदों से शांत रहने की अपील की। अध्यक्ष ने बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने और सदन चलाने में सहयोग करने का आग्रह किया, लेकिन शोर-शराबा थमता न देख उन्होंने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे इन दोनों संवेदनशील मुद्दों पर संसद में तुरंत चर्चा की मांग पर अड़े रहेंगे।
कंगना रनौत का विपक्ष पर तीखा हमला
संसद के भीतर और बाहर जारी इस घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने विपक्ष के तौर-तरीकों की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को इस तरह से झुकाया नहीं जा सकता। कंगना ने साफ शब्दों में कहा कि विपक्ष सरकार को इस बात के लिए मजबूर या ब्लैकमेल नहीं कर सकता कि किसे पद पर बनाए रखना है और किसे हटाना है। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार के पास यह तय करने का पूरा अधिकार है कि शासन व्यवस्था कैसे चलाई जाए। विपक्ष की मांग पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अगर उन्हें सरकार चलाने का इतना ही शौक है, तो उन्हें खुद चुनाव लड़कर सत्ता में आना चाहिए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
गौरतलब है कि विपक्ष नीट परीक्षा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है, जिसके विरोध में विपक्षी गठबंधन की ओर से लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी गतिरोध पर बोलते हुए कंगना रनौत ने कहा कि संसद देश और जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और बहस करने का सबसे सही मंच है। संसदीय सत्र का मुख्य उद्देश्य ही यही होता है कि विपक्ष जनहित के सवाल उठाए और सरकार को हर विषय पर जवाबदेह बनाए। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष भी यही चाहता है कि सत्र सुचारू रूप से चले और विपक्ष अपने सभी सवाल सदन के भीतर उठाए। लेकिन चर्चा करने के बजाय संसद परिसर और सदन के भीतर हंगामा खड़ा करना और अराजकता का माहौल बनाना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
सत्र के पहले ही दिन आर-पार के मूड में दिखे दोनों पक्ष
मानसून सत्र के पहले दिन की शुरुआत ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और गतिरोध के साथ हुई। एक तरफ जहां कांग्रेस और सहयोगी दल नीट परीक्षा के आयोजन में हुई धांधली और राम मंदिर के नाम पर हुए कथित चंदा घोटाले के आरोपों को लेकर सरकार को पूरी तरह घेरने की रणनीति बना चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के सांसद और मंत्री विपक्ष के इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर पलटवार कर रहे हैं। सदन के भीतर समय से पहले हुए स्थगन और संसद परिसर के बाहर नेताओं के बीच हुए जुबानी बाणों से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में भी इन मुद्दों पर संसद का तापमान बेहद गर्म रहने वाला है।
ये भी पढ़ें: 23 दमदार सितारों से सजी 'रामायण' की टोली, रणबीर कपूर और यश के अलावा भी एक से बढ़कर एक कलाकार