आजकल गांव-देहात से जुड़ी कहानियां दर्शकों के बीच खूब पसंद की जा रही हैं। 'पंचायत' और 'ग्राम चिकित्सालय' जैसी चर्चित सीरीज को दर्शकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। ऐसी ही एक सीरीज है 'दुपहिया', जिसके पहले सीजन की सफलता के बाद अब इसका दूसरा सीजन ओटीटी पर दस्तक दे चुका है। 'दुपहिया' का पहला सीजन 2025 में आया था, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था। अब इस सीरीज का दूसरा भी आ गाय है, जो पहले सीजन वाली सादगी को बनाए रखता है। ऐसे शो के वापस आने पर एक अलग ही सुकून मिलता है जिसके किरदार पहले से ही जाने-पहचाने लगते हैं और 'दुपहिया' के साथ भी कुछ ऐसा ही है। मगर नया सीज़न और पहले से ज्यादा ड्रामे से भरा है, लेकिन इसमें कई दिल को छू लेने पल भी हैं। 'दुपहिया 2' में पेपर लीक जैसी समस्या को भी मजबूती से रखा गया है।
'दुपहहिया' में बिहार के एक गांव धड़कपुर की कहानी दिखाई गई है, जहां एक लड़की की शादी इसलिए टूट जाती है, क्योंकि दहेज में दूल्हे को दुपहिया (मोटरसाइकिल) चाहिए, इसके बाद लड़की गुस्से में कहती है कि वह एसएसी क्लियर करेगी और अपनी शर्तों पर अपनी जिंदगी जीएगी। दूसरे सीजन में धड़कपुर गांव की कहानी पिछली कहानी के साथ आगे बढ़ती है और इस बार बात 5G नेटवर्क टावर और पेपर लीक जैसे मुद्दे तक पहुंच चुकी है। चलिए, जानते हैं कि 'दुपहिया 2' में क्या नया और खास है।
कहानी
बनवारी लाल झा (गजराज राव) और उनका परिवार की बेटी रोशनी (शिवानी रघुवंशी) की शादी टूटने के बाद मुश्किलों भरी जिंदगी जी रहा है। रोशनी की शादी टूटने के बाद मास्टर जी की नौकरी भी उनसे छिन गई, जिसके चलते घर का गुजारा मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ बेटा भुगोल (स्पर्श श्रीवास्तव) है जो लौंडा नाच (पूर्वांचल का एक पारंपरिक लोक नृत्य और थिएटर रूप) करके पैसे कमाता है, लेकिन पिता उसके पैसों को हाथ नहीं लगाना चाहते। वहीं बेटी रोशनी SSC की पढ़ाई कर रही है और सिलेबस उसके दिमाग के ऊपर से जा रहा है। इसी बीच गांव में एक दिन 5जी नेटवर्क का टावर लगाने का प्रस्ताव आता है और बनवारी लाल की किस्मत चमक उठती है। मगर 5जी को लेकर गांव में अफवाह फैल जाती है और वापस बनवारी की जिंदगी में अंधेरा छा जाता है। दूसरी तरफ रोशनी SSC पास करने के लिए अमावस (भुवन अरोड़ा) की मदद लेती है और कहानी में एंट्री होती है प्रथम कुमार (दिनेश लाल यादव निरहुआ) की।
प्रथम कुमार एक दलाल है, जो पैसे लेकर नकल करने और पेपर लीक कराने का काम करता है। मगर एक पुलिस इंस्पेक्टर मिथिलेश (यशपाल शर्मा) को प्रथम के इस धंधे की भनक लग जाती है, जो प्रथम के पीछे पड़ जाता है। लेकिन, प्रथम की ऊंची पहुंच के चलते उसके भी हाथ बंध जाते हैं। अब एक तरफ गांव में मची 5जी की भसड़ है और दूसरी तरफ पेपर लीक और इन दोनों में बनवारी लाल का परिवार बुरी तरह फंसा है। अब बनवारी और उसका परिवार इस भसड़ से कैसे बाहर निकलता है, इसका जवाब सीरीज में छुपा है, जो आपको सीरीज देखने पर ही पता चलेगा।
कैसा है अभिनय?
'दुपहिया' के पहले सीजन की ही तरह 'दुपहिया 2' में भी कलाकारों का दमदार अभिनय देखने को मिलता है। फिर चाहे वो बनवारी लाल के किरदार में गजराज राव हों या फिर पुष्पलता यादव के किरदार में रेणुका शहाणे। वहीं प्रथम के किरदार में दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ भी जबरदस्त लगते हैं। स्पर्श श्रीवास्तव भी भूगोल की भूमिका में कमाल के लगते हैं। हीरो बनने की चाहत, लेकिन लौंडा नाच को मजबूर लड़का, जो अब अपनी उस इमेज से परेशान हो गया है, जो लौंडा नाच के चलते पूरे गांव में बन चुकी है। पिछली बार की तरह इस बार भी 'भूगोल' के किरदार से स्पर्श श्रीवास्तव ने लाइमलाइट लूट ली। शिवानी रघुवंशी, यशपाल शर्मा, भुवन अरोड़ा ने भी अपने किरदार से पूरा न्याय किया है। कुल मिलाकर अगर आप इस लॉन्ग वीकेंड में एक बढ़िया शो देखना चाहते हैं, तो 'दुपहिया 2' अपन वॉच लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।
निर्देशन और लेखन
निर्देशन की बात करें तो सोनम नायर ने 'धड़कपुर' में ज्यादा बदलाव न करते हुए इसकी मूल आत्मा को बरकरार रखा है। धड़कपुर अब भी वैसा ही लगता है, जैसा पहले सीजन में देखने को मिला था। गांववालों में अब भी एक-दूसरे के प्रति आत्मियता बनी हुई है और वही रोजमर्रा वाली हलचल देखने को मलती है, जिससे इस सीरीज में घुलना-मिलना और आसान हो जाता है। हालांकि, पहले सीजन में जहां सीरीज सिर्फ एक ही कहानी पर केंद्रित थी तो वहीं इस सीजन में कई कहानियों को साथ संभालने की कोशिश की गई है। नए सीजन में रोशनी का पेपर, भूगोल की समस्या, पुलिस जांच और 5जी मोबाइल टावर, जैसी अलग-अलग समस्याओं को साथ-साथ चलाने की कोशिश की गई है। लेकिन, सोनम अलग-अलग सीन को भी अच्छे से संभालती हैं।
लेखन की बात करें तो राइटर अविनाश द्विवेदी और चिराग गर्ग का काम ही है जो इस सीरीज को और बेहतरीन बनाता है। उनके लिखे हुए डायलॉग, पंच लाइन और स्क्रीनप्ले काफी मजबूत हैं। पिछले सीजन वाला जादू इस सीजन में भी देखने को मिलता है। हालांकि, इसे एक परफेक्ट सीरीज कहना गलत होगा, क्योंकि कुछ जगहों पर ऐसे पल देखने को मिलते हैं जो महत्वहीन लगते हैं।
क्या अच्छा है और क्या नहीं?
'दुपहिया सीजन 2' की बात करें तो इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके हल्के-फुल्के पल और कॉमेडी है, जो पहले एपिसोड से लेकर आखिरी तक ज्यों कि त्यों बनी रहती है। ये कहीं भी उबासी नहीं दिलाती। गांव में हर-छोटी-बड़ी समस्या के लिए मोबाइल टावर को जिम्मेदार ठहराना, मजेदार आइडिया लगता है। ये एक साफ-सुथरी सीरीज है, जिसमें भद्दे मजाक नहीं हैं और न ही ये ट्विस्ट और टर्न्स पर निर्भर करती है। कहानी में रोजमर्रा की परेशानियों, स्थितियां और गलफहमियां ही इसे मजेदार बनाती हैं। वहीं इसकी समस्या की बात करें तो इसकी धीमी रफ्तार इसकी सबसे बड़ी समस्या है। कई जगह पर कहानी जरूरत से ज्यादा बिखरी हुई लगती है।
वर्डिक्ट:
'दुपहिया 2' अपनी देसी मिट्टी की खुशबू, सहज किरदारों और हल्के-फुल्के हास्य के दम पर दर्शकों को धड़कपुर की दुनिया में दोबारा ले जाती है। इस बार कहानी में 5G टावर, पेपर लीक, पुलिस जांच और पारिवारिक उलझनों जैसे कई मुद्दे जोड़े गए हैं। गजराज राव, स्पर्श श्रीवास्तव, रेणुका शहाणे और दिनेश लाल यादव समेत पूरी कास्ट ने अच्छा काम किया है। हालांकि कई ट्रैक एक साथ चलने के कारण कहानी कुछ जगह बिखरी और धीमी लगती है। फिर भी साफ-सुथरी कॉमेडी, मजबूत संवाद और गांव की सादगी इसे लॉन्ग वीकेंड के लिए एक मनोरंजक विकल्प बनाती है।