Saturday, January 31, 2026
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Explainer: बासमती के बिना कैसे सजेगी बिरयानी की थाली, भारत को अपने चावल पर क्यों है इतना गुरूर? जानें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चावल पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है, लेकिन अमेरिका में बिरयानी के लिए भारतीय चावल ही पसंद किया जाता है। भारत के चावल का इतिहास और इसकी खासियत जानकर आप भी कहेंगे...हमें अपने चावल पर गरूर है।

Written By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Dec 10, 2025 11:21 am IST, Updated : Dec 10, 2025 11:30 am IST
भारत का चावल- India TV Hindi
भारत का चावल

Explainer: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बैठक के दौरान भारतीय चावल को लेकर बड़ी टिप्पणी की और कहा, भारत को अमेरिकी बाजार में अपना चावल डंप नहीं करना चाहिए, इसके साथ ही ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि चावल पर टैरिफ लगाकर इस समस्या का आसानी से हल निकल जाएगा। लेकिन भारतीय चावल पर टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले ट्रंप को मालूम है कि क्या अमेरिका भारतीय चावल के बिना रह सकता है? अमेरिका में बिरयानी का 'आधार' भारत का बासमती चावल है और अमेरिका के चावल की किस्में कभी भी भारतीय बासमती की जगह नहीं ले सकतीं। तो इस तरह से भारतीय चावल की खुशबू के बिना बिरयानी की थाली कैसे सजेगी?

ट्रंप ने भारत के चावल पर टैरिफ लगाने की दी धमकी

Image Source : FILE PHOTO (INDIATV)
ट्रंप ने भारत के चावल पर टैरिफ लगाने की दी धमकी

भारत को अपने चावल पर क्यों है नाज

राष्ट्रपति ट्रंप की इस धमकी के बाद Indian Rice Exporters Federation ने इसे लेकर एक विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि भारत के साथ अमेरिका के चावल का व्यापार पूरी तरह से देश के उपभोक्ताओं की मांग और उनके खाने की आदतों और जरूरतों से प्रेरित है, और कुछ नहीं। ये तो हो गई डोनाल्ड ट्रंप की धमकी की बात लेकिन क्या आप जानते हैं भारत को अपने चावल पर क्यों है नाज, तो आज जान लेते हैं भारतीय चावल क्यों है खास?

भारत की सभ्यता से जुड़ा है चावल का इतिहास

भारत का चावल खास है क्योंकि इसकी कहानी भारत की सभ्यता से जुड़ी है और इसका इतिहास 5000 साल से ज्यादा पुराना है। पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता में भी चावल की खेती के प्रमाण मिलते हैं और ये भी पता चलता है कि हमारे पूर्वजों ने नदियों के किनारे इस अनाज को उगाया था। हमारे वेद भी इसके गवाह हैं जिसमें चावल न सिर्फ भोजन का हिस्सा था बल्कि पूजा-अर्चना का हिस्सा भी था। आज भी पूजा पाठ में जिस अक्षत का प्रयोग करते हैं, वह चावल है और यह अमरता का प्रतीक है।

बासमती के बिना कैसे सजेगी बिरयानी की थाली

इसके बाद आते हैं मुगलकालीन इतिहास में, जब जहांगीर का शासनकाल था और सबसे सुगंधित चावल को 'बासमती' नाम मिला, इसका अर्थ है 'महकदार' या 'सुगंधित'। इस चावल की खेती भी जितने जतन से की जाती थी उतने ही जतन से इसके धान से चावल निकाला जाता और इसके बनाने का भी खास तरीका है। बासमती चावल के बारे में कहा जाता है कि ये बड़ी नाजो नखरे वाला अनाज है। जैसे मिथिलांचल में इसे लेकर एक कहावत प्रचलित है-धान बासमती, कूटे आसकत्ती, बनावे भागवंती...यानी बासमती के धान को धीरे धीरे आलसी की तरह कूटा जाता है और बनाने वाला भाग्यवान होता है।


भारत का बासमती चावल

Image Source : FILE PHOTO (INDIATV)
भारत का बासमती चावल

बासमती के सुहाने सफर की कहानी

बासमती चावल पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में उगाया जाता है। मुगलों ने इसे राजसी भोजन का हिस्सा बनाया और अपनी खासियत के साथ ही ये जल्द ही यूरोप पहुंच गया। 19वीं शताब्दी के अंत तक, भारत ब्रिटेन को चावल सप्लाई कर रहा था, जो औद्योगिक क्रांति के दौरान मजदूरों का मुख्य भोजन था। आज भारत में पारंपरिक रूप से चावल की कई हजार किस्में उगाई जाती थीं, हालांकि अब लगभग 6,000 किस्में बची हैं, और हर क्षेत्र की अपनी विशेष किस्में और उपयोग हैं। 

भारत के खास चावल की किस्मों के नाम

भारत में वैसे तो चावल की हज़ारों किस्में मौजूद हैं, जिन्हें मुख्य रूप से उनके दाने के आकार, लंबे, मध्यम, छोटे और रंग के अनुसार, सफेद, भूरा, काला, लाल और प्रोसेसिंग के आधार पर अरवा यानी कच्चा, उसना यानी आधा उबला हुआ, बांटा जाता है। किस्मों के आधार पर बासमती, सोना मसूरी, इंद्रायणी, अंबेमोहर, पंकज, मालती, पोन्नी और मणिपुर का काला चावल (चाक-हाओ) जैसी कई स्थानीय और लोकप्रिय किस्में शामिल हैं।  

172 देशों का पेट भर रहा है भारत का चावल 

भारत आज दुनिया के कई देशों का पेट भर रहा है और इसकी खुशबू दुनिया के 172 देशों में महक रही है, जिसमें अमेरिका के फ्यूजन व्यंजनों से लेकर अफ्रीका की थालियों तक में इसे परोसा जाता है। 'इंडियन राइस एक्सपोट्स फेडरेशन' के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और शीर्ष निर्यातक भी है। भारत की 'सोना मसूरी' अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पसंद की जाती है।

इन देशों में भारत के चावल की मांग
 

  • जॉर्डन
     
  • नीदरलैंड्स
     
  • उत्तरी मैसेडोनिया
     
  • सूडान
     
  • सऊदी अरब
     
  • इराक
     
  • ईरान
     
  • संयुक्त अरब अमीरात
     
  • अमेरिका
     
  • बांग्लादेश
     
  • यमन
     
  • मलेशिया
     
  • सिंगापुर
     
  • अफगानिस्तान
     
  • नाइजीरिया
     
  • ब्रुनेई
     
  • कुवैत

चावल एक और नाम अनेक

खेत में जब बाली में हो तो धान, कच्चा हो तो चावल और कई प्रांतों में यही चावल पक जाए तो भात कहलाता है। दूध में डालकर पका लें तो खीर, दक्षिण और पूर्वी भारत में पाल, पायसम पायेश कहलाता है। चावल को संस्कृत और मराठी में तंदुल, अंग्रेजी में राइस, धार्मिक कार्यों में प्रयोग हो तो यही चावल अक्षत, और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में कहीं पंता भात या पोइता, भात या पखला भात के नामों से भी जाना जाता है। चावल का वानस्पतिक नाम भी जान लीजिए तो इसका नाम, ओरीज़ा सैटिवा है।

 

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