इस रूपरेखा के तहत, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। इससे अमेरिका में वस्त्र, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक एवं रबड़ उत्पाद, जैविक रसायन, हस्तशिल्प उत्पाद और चुनिंदा मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में काफी अवसर प्राप्त होंगे।
मंगलवार को सुबह 11.25 बजे तक बाजार की प्रमुख कंपनियों में शामिल अडाणी एंटरप्राइज़ेस के शेयर सबसे ज्यादा 10.76 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ कारोबार कर रहे थे।
अमेरिका की कृषि सचिव ब्रुक रॉलिन्स ने अमेरिकी किसानों के लिए एक बार फिर काम करने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया।
वाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका, भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को भी हटा देगा।
मंगलवार को सेंसेक्स की 30 में से सिर्फ HDFC Bank के शेयर ही बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए, जबकि बाकी की सभी 29 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए।
वेनेजुएला के प्रेसीडेंट निकोलस मादुरो को उनके बेडरूम से kidnap करने के बाद आज प्रेसीडेंट ट्रंप ने क्लीयर कर दिया कि अब उनकी निगाह कोलंबिया, क्यूबा, ग्रीनलैंड और मैक्सिको पर है.
भारत का निर्यात 2020 में लगभग 276.5 अरब डॉलर था, जो 2021 में बढ़कर 395.5 अरब डॉलर और 2022 में 453.3 अरब डॉलर हो गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला साल सबसे ज्यादा विवादित होने की वजह से दुनिया भर में सुर्खियों में रहा। ट्रंप के विवादित फैसलों ने पूरे विश्व पर असर डाला और उसकी वजह से कई देशों के साथ रिश्तों में तनाव पैदा हो गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चावल पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है, लेकिन अमेरिका में बिरयानी के लिए भारतीय चावल ही पसंद किया जाता है। भारत के चावल का इतिहास और इसकी खासियत जानकर आप भी कहेंगे...हमें अपने चावल पर गरूर है।
अमेरिकी किसानों की शिकायत पर डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर ये संकेत दिए हैं। एक बैठक के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी किसानों को 12 अरब डॉलर की मदद का ऐलान किया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल जुलाई के आखिर में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए जुर्माने के रूप में भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था।
22 लाख टन एलपीजी भारत के सालाना एलपीजी आयात का लगभग 10 प्रतिशत है और ये भारतीय बाजार के लिए पहला ऐसा अमेरिकी एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट है।
करीब छह साल बाद दुनिया की दो आर्थिक महाशक्तियां एक साथ मिलीं, एक अमेरिका और दूसरा चीन। डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात तो मात्र 100 मिनट की थी, लेकिन इस मुलाकात पर सबकी निगाहें टिकी थीं। जानें क्या क्या डील हुई?
अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय वाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप की प्रतिक्रिया व्यापार वार्ता में कनाडा की रणनीति को लेकर प्रशासन की लंबे समय से बरकरार हताशा का परिणाम है।
अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप ने चीन को लेकर सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें ही नहीं बल्कि कई बार भारी-भरकम टैरिफ लगाने की भी धमकी दी।
चीन द्वारा शेयर किए गए एक डेटा के मुताबिक, चीन ने अमेरिका से सितंबर, 2024 में 1.7 मिलियन मीट्रिक टन सोयाबीन आयात किया था।
चीन का अमेरिका को निर्यात लगातार 6 महीनों से घट रहा है। अगस्त में इसमें 33 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
इस साल अप्रैल में दोनों पक्षों की ओर से नए टैरिफ कुछ समय के लिए 100 प्रतिशत से ऊपर चले गए थे।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीन पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ 1 नवंबर, 2025 से लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि अगर चीन कोई सख्त कदम उठाता है तो ये 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ 1 नवंबर से पहले ही लागू कर दिए जाएंगे।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा है कि भारत और चीन पर टैरिफ लगाने के डोनाल्ड ट्रंप के कदम से वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ेगी और अमेरिका की आर्थिक वृद्धि धीमी हो जाएगी।
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