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Explainer: अमेरिका ने अपने पायलट को बचाने के लिए फैलाई अफवाह, जानें कैसे CIA की एक चाल से चित हुआ ईरान

 Published : Apr 06, 2026 02:25 pm IST,  Updated : Apr 06, 2026 02:43 pm IST

अमेरिका ने ईरान में फंसे अपने पायलटों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सबसे सफल और चुनौती भरा ऑपरेशन करार दिया है। चलिए जानते हैं कि अमेरिकी सेना ने कैसे इस पूरे मिशन को अंजाम दिया है।

Israel US Iran War- India TV Hindi
Israel US Iran War Image Source : AP/INDIA TV

Israel US Iran War: अमेरिका ने बेहद साहसिक और जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर ईरान में मार गिराए गए अपने 2 पायलटों को बचा लिया है। इस अभियान में अमेरिकी बलों ने पहले एक पायलट को ईरानी इलाके से सुरक्षित निकाला, जबकि दूसरे पायलट को पहाड़ी इलाके में छिपे होने के कारण बहुत जटिल ऑपरेशन के जरिए बचाया गया। ईरान ने अपने लोगों से अपील की थी कि वो दूसरे पायलट को खोजकर पुलिस को सौंप दें और बड़ा ईनाम ले जाएं।

CIA ने बनाया प्लान

ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने ईरानी सरकार को भ्रमित करने के लिए एक चालाकी भरा प्लान बनाया था। सीआईए ने अफवाह फैलाई कि अमेरिकी बल उस पायलट को पहले ही ढूंढ चुके हैं और उसे जमीन के रास्ते ईरान से बाहर ले जा रहे हैं। इस भ्रम की वजह से अमेरिकी एजेंसी को असली पायलट की लोकेशन का पता चल गया, जो एक पहाड़ी क्षेत्र में छिपा हुआ था।

फिल्मी कहानी जैसा रहा मिशन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने इस पूरे मिशन को फिल्मी कहानी जैसा बताया। बचाव दल को कई बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अभियान के दौरान ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर हमला हुआ और ट्रांसपोर्ट विमानों में तकनीकी खराबी आ गई। इन समस्याओं के कारण अमेरिकी सेना को अपने की विमानों को नष्ट करना पड़ा।

US Military Aircraft Remains In Iran
Image Source : APUS Military Aircraft Remains In Iran

ट्रंप ने क्या कहा?

मिशन सफल होने पर ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, “सैन्य इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर अलग-अलग जगहों से दो अमेरिकी पायलटों को बचाया गया है। हम कभी भी किसी अमेरिकी सैनिक को अकेला नहीं छोड़ेंगे!” ट्रंप ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए अमेरिका को पूरी तरह चुप रहना पड़ा ताकि मिशन का राज खुल ना जाए। राष्ट्रपति और उनके प्रशासन के शीर्ष अधिकारी लगातार दोनों पायलटों की लोकेशन पर नजर रखे हुए थे। व्हाइट हाउस और पेंटागन ने शुरुआती दुर्घटना के बाद 24 घंटे से ज्यादा समय तक इस घटना के बारे में कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी।

अफवाह ने बना दिया काम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे बताया कि ईरान में दिन के उजाले में पूरे सात घंटे तक यह बचाव अभियान चला। दोनों देशों की सेनाएं दूसरे पायलट को खोज रही थीं, लेकिन उसकी सही जगह किसी को नहीं पता थी। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि सीआईए के भ्रम फैलाने वाले प्लान के बाद ही पायलट की असली लोकेशन मिली और ट्रंप ने बचाव अभियान शुरू करने का आदेश दिया।

बचाव अभियान में कम नहीं थी चुनौतियों

अभियान के दौरान अमेरिकी बचाव दल को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ईरान की सेना का दावा है कि उन्होंने दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाया, लेकिन अमेरिकी पक्ष का कहना है कि दोनों हेलीकॉप्टर सुरक्षित वापस पहुंच गए। साथ ही, दो अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमानों में तकनीकी समस्या आई, जिन्हें बाद में अमेरिकी सेना ने खुद नष्ट कर दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरानी बल उस पायलट का शिकार कर रहे थे। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि बचाया गया पायलट गंभीर रूप से घायल है।

Donald Trump
Image Source : APDonald Trump

ट्रंप खुद रख रहे थे नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हमने अपना ऑपरेशन को बिना किसी अमेरिकी के हताहत हुए पूरा किया है। इससे साफ पता चलता है कि ईरान में हमारा हवाई प्रभुत्व और श्रेष्ठता पूरी तरह कायम है। सीएनएन के मुताबिक पूरे ऑपरेशन के दौरान ट्रंप व्हाइट हाउस में ही रहे। वो खुद पूरे मामले को मॉनिटर कर रहे थे। 

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